संदेश

सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

महोबा के भक्त आल्हा आल्हा कि ध्वजा नही आई हो माँ"

क्रूर, अत्याचारी विधर्मियों ने सनातनी मंदिरों भवनों को सदा ही विनष्ट विखंडित किया।

मनुष्यों की रक्षा जब देवाधिदेव महादेव करते हैं तो धर्म की रक्षा भी स्वयं वे ही करते हैं।

जब कोई शिल्पकार मूर्ति बनाता है तो वह अपने कल्पना को मूर्त रूप देता है और "मूर्ति" का निर्माण होता है

सतयुग के द्वितीय चरण में देवताओं और असुरों ने यह निर्णय लिया कि समुद्र मंथन किया जाए।

सनातन वास्तुशिल्प कितना अद्भुत, अकल्पनीय और रहस्यमय रहा है इसका प्रमाण तो यत्र-तत्र-सर्वत्र व्याप्त है।

सब कहते हैं कि आधुनिक विज्ञान ने जितनी उन्नति वर्तमान समय में किया है वह अतीत में कभी सम्भव नहीं था।

महाराष्ट्र में पाँच प्रमुख नदियाँ "गायत्री, सावित्री, वेन्ना, कोयना और कृष्णा"...

दक्षिण का कैलाश (वल्लीअंगिरी पर्वत) समुद्रतल से १००० मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

हमारे सनातनी पूर्वजों की सृजनशीलता किसी भी अन्य सभ्यता से अतुलनीय ही रहा है।

चलो माना कि यदि हमारा इतिहास केवल पौराणिक कथा है तो इन महान धरोहरों को कौन बना कर छोड़ दिए हैं.???

देवाधिदेव महादेव के अधिकांश शिवालयों प्रभु को शिवलिङ्ग के रूप में ही पूजन किया जाता है।

सनातन संस्कृति के अमूल्य धरोहर को सहेज कर रखने वाले भग्नावशेषों देखना है तो हम्पी, कर्नाटक में देखें.!!

बस्तर दंतेवाड़ा का एक सौन्दर्यपूर्ण इतिहास के बारे में आइए जानें?

ऐसा माना जाता है कि भावों का संप्रेषण गद्य की तुलना में पद्य में कहीं अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।

वामियों ने सुनियोजित ढंग से षड़यंत्र रचकर सनातनियों के मनोबल को तोड़ने का कार्य किया है।

जब तक राजतंत्र "सनातन धर्म" के अनुशासन, संरक्षण, निर्देशन में संचालित होता रहा तो उस साम्राज्य का यश चहुँ ओर विख्यात रहा था।

आपने अखण्ड पाषाण शिला से निर्मित प्रतिमाएँ, मूर्तियाँ, क्रीड़ा सामग्री इत्यादि बहुतायत में देखे होंगे।

यह अकल्पनीय मन्दिर 100 वर्ष नहीं, 200 वर्ष नहीं, और 500 वर्ष भी नहीं, ये मन्दिर पूरे 1000 वर्ष प्राचीन है।