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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Swami PREM JHA
को
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क्रूर, अत्याचारी विधर्मियों ने सनातनी मंदिरों भवनों को सदा ही विनष्ट विखंडित किया।
शासन में अत्याचार से अधिकार किया।
यहां तक कि इतिहास को बदलने का यथासंभव कुचेष्टा किया।
पंरतु क्या संसार से सनातन धर्म के चिन्ह को कोई मिटा पाया.??
महान सनातन धर्म का अमिट छाप पग - पग पर मिलेगा।
महान काकतीय वंश का राजधानी रहा है वारंगल।
इसकी स्थापन ११६३ ई. में किया गया था।
काकतीय वंश साम्राज्य के प्रथम नरेश रुद्रदेव प्रथम रहे हैं।
इस साम्राज्य के सबसे शक्तिशाली शासक गणपतिदेव रहे जिन्होंने ६३ वर्षों तक शासन किया।
काकतीय वंश साम्राज्य के अंतिम नरेश प्रतापरुद्र रहे।
काकतीय वंश के शासकों ने पाषाण वास्तुशिल्प और शिल्पकला मूर्तिकला को संरक्षण दे कर अनेक मंदिरों, तोरण द्वार, राजप्रासाद का निर्माण करवाए।
परंतु रेगिस्तानी पशुओं को हीन भावना के कारण सनातन धर्म से जन्म प्रदत्त द्वेष/शत्रुता रहा।
और १३०९ ई. में असभ्य विधर्मी अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति मलिक काफूर ने एक लाख की सेना ले इस साम्राज्य को तहस - नहस कर दिया।
उस विधर्मी मलिक काफूर के सेना में जिस प्रकार हिनूओं के ही गद्दार था।
आज उसी गद्दार के वंशज डीएनए जीवी बनकर सनातनियों को भ्रमित कर रहा है कि "सबका डीएनए एक है"।
हर युग में ऐसा गद्दार होता रहा है।
वारंगल किला परिसर में स्थित इस भग्नावशेष और विचार करें कि कितने निपुणता, समर्पण, परिश्रम और भक्तिभाव से इन मंदिरों का निर्माण किया गया होगा।
काले ग्रेनाइट पत्थर के स्तम्भ के निचले भाग में बने मूर्तियों को ध्यान से देखें, कितना अद्भुत दृश्य है.!!
वारंगल किला, वारंगल, तेलंगाना।
(चित्र - साभार)
नमन है सनातनी पूर्वजों को जिन्होंने इस अनुपम कृति का निर्माण किया है।
अतुलनीय सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल 🙏🔱🚩
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