सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

वामपंथ हिंसक क्यों होता है?



वामपंथ के जो मूल assumptions हैं, वे गलत हैं. वामपंथ के अनुसार संसाधन सीमित हैं और उनका वितरण ही संसार की मूल समस्या है. संसाधन असीमित हैं, मनुष्य हमेशा नए संसाधन खोज कर नई असीमित संपदा का सृजन कर सकता है.. यह बात सदियों से आँखों के सामने है लेकिन वामपंथ इसे स्वीकार नहीं कर सकता. क्योंकि उसके लिए सम्पदा, और उससे मिलने वाला जीवन स्तर महत्व की बात नहीं है, उस सम्पदा पर और प्रत्येक व्यक्ति के जीवन पर नियंत्रण महत्वपूर्ण है. 

    इसी का एक दूसरा पक्ष है... वामपंथ की दृष्टि में नॉलेज सीमित है. और जो नॉलेज एक ऑथोरिटी से आता है वही वैध है... जो उनकी किताब में लिखा है, जो उनके लीडर ने कह दिया, जो कार्ल मार्क्स लिख कर चला गया वही और उतना ही नॉलेज है. और जब उनके पास पूर्ण और परफेक्ट नॉलेज है तो उन्हें एक परफेक्ट वर्ल्ड बनाने में क्या बाधा हो सकती है? जो बाधा है वह यह कि उनके पास पॉवर नहीं है... बस, उन्हें पॉवर मिल जाए तो एक परफेक्ट वर्ल्ड, एक यूटोपिया खड़ा कर देंगे.

     समस्या यह है कि उनका यह assumption गलत है. यह रियलिटी नहीं है. और रियलिटी से कोई नहीं लड़ सकता. अगर आपके पास सत्य है तो रियलिटी आपके साथ है.. दुनिया में सबसे बड़ा मित्र, सबसे शक्तिशाली सहयोगी कोई है तो वह है रियलिटी. 

    वामपंथ की लड़ाई रियलिटी से है. समस्या यह है कि वे रियलिटी से कैसे लड़ें? इसके लिए उन्हें सत्य को नियंत्रित करना होगा, सत्य का दमन करना होगा. फ्री मार्केट प्लेस ऑफ आइडियाज़ में उनके विचार खड़े नहीं हो सकते. उसके लिए उन्हें इस मार्केट प्लेस को कंट्रोल करना होगा... प्रचार से, झूठ से, और अंत में हिंसा से... 

 वामपंथ बिना हिंसा के एक दिन भी सर्वाइव नहीं कर सकता. उनकी लड़ाई सत्य से है और सत्य का एक ही प्रभावी शत्रु है... हिंसा. आप हिंसा से सत्य को नियंत्रित कर सकते हैं, तब तक जब तक आपका अस्तित्व न खत्म हो जाए.

डॉ राजीव मिश्रावामपंथ हिंसक क्यों होता है?

वामपंथ के जो मूल assumptions हैं, वे गलत हैं. वामपंथ के अनुसार संसाधन सीमित हैं और उनका वितरण ही संसार की मूल समस्या है. संसाधन असीमित हैं, मनुष्य हमेशा नए संसाधन खोज कर नई असीमित संपदा का सृजन कर सकता है.. यह बात सदियों से आँखों के सामने है लेकिन वामपंथ इसे स्वीकार नहीं कर सकता. क्योंकि उसके लिए सम्पदा, और उससे मिलने वाला जीवन स्तर महत्व की बात नहीं है, उस सम्पदा पर और प्रत्येक व्यक्ति के जीवन पर नियंत्रण महत्वपूर्ण है. 

    इसी का एक दूसरा पक्ष है... वामपंथ की दृष्टि में नॉलेज सीमित है. और जो नॉलेज एक ऑथोरिटी से आता है वही वैध है... जो उनकी किताब में लिखा है, जो उनके लीडर ने कह दिया, जो कार्ल मार्क्स लिख कर चला गया वही और उतना ही नॉलेज है. और जब उनके पास पूर्ण और परफेक्ट नॉलेज है तो उन्हें एक परफेक्ट वर्ल्ड बनाने में क्या बाधा हो सकती है? जो बाधा है वह यह कि उनके पास पॉवर नहीं है... बस, उन्हें पॉवर मिल जाए तो एक परफेक्ट वर्ल्ड, एक यूटोपिया खड़ा कर देंगे.

     समस्या यह है कि उनका यह assumption गलत है. यह रियलिटी नहीं है. और रियलिटी से कोई नहीं लड़ सकता. अगर आपके पास सत्य है तो रियलिटी आपके साथ है.. दुनिया में सबसे बड़ा मित्र, सबसे शक्तिशाली सहयोगी कोई है तो वह है रियलिटी. 

    वामपंथ की लड़ाई रियलिटी से है. समस्या यह है कि वे रियलिटी से कैसे लड़ें? इसके लिए उन्हें सत्य को नियंत्रित करना होगा, सत्य का दमन करना होगा. फ्री मार्केट प्लेस ऑफ आइडियाज़ में उनके विचार खड़े नहीं हो सकते. उसके लिए उन्हें इस मार्केट प्लेस को कंट्रोल करना होगा... प्रचार से, झूठ से, और अंत में हिंसा से... 

 वामपंथ बिना हिंसा के एक दिन भी सर्वाइव नहीं कर सकता. उनकी लड़ाई सत्य से है और सत्य का एक ही प्रभावी शत्रु है... हिंसा. आप हिंसा से सत्य को नियंत्रित कर सकते हैं, तब तक जब तक आपका अस्तित्व न खत्म हो जाए.

डॉ राजीव मिश्रा

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