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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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उत्तर प्रदेश के इस चौबारे पर, अपने गाँव के एक कोने में बैठे-बैठे जब मैं इन दिनों हवाओं का रुख देखता हूँ, तो मेरा कलेजा काँप उठता है। आज हमारे ही कुछ अपने लोग वे नेता, जो टीवी चैनलों पर बैठकर खुद को सवर्णों का सबसे बड़ा पैरोकार बताते हैं, कुछ पत्रकार जो कलम की जगह भ्रम बेच रहे हैं वे आज योगी आदित्यनाथ जी को 'ब्राह्मण विरोधी' और 'सवर्ण विरोधी' करार देने में लगे हैं। वे यूजीसी की उस गाइडलाइन को लेकर आग उगल रहे हैं, जिस पर खुद सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। उनका मकसद न्याय दिलाना नहीं, बल्कि उस जिद में उत्तर प्रदेश को फिर से उसी दलदल में धकेलना है जहाँ से बड़ी मुश्किल से योगी जी ने हमें निकाला है।
जरा इन बड़े चेहरों की फितरत को तो देखिए। आज जो लोग स्टूडियो में बैठकर "योगी से बैर नहीं, मोदी तेरी खैर नहीं" जैसे आत्मघाती नारे लगवा रहे हैं, क्या वे वाकई समाज का भला चाहते हैं? अरे भाई, आँखें खोलिए! ये वही लोग हैं जो आज योगी जी के खिलाफ आग उगल रहे हैं, लेकिन अगर कल सपा की सरकार आ गई, तो यही तथाकथित नेता और पत्रकार सबसे पहले अपनी सेटिंग बिठाएंगे। इन्हें मलाईदार ठेके मिल जाएंगे, बड़े पद और पुरस्कार मिल जाएंगे। इनकी गाड़ियाँ भी चमकेंगी और इनकी कोठियाँ भी महफूज रहेंगी। ये तो चंद दिनों में हवा का रुख देखकर पाला बदल लेंगे, क्योंकि इनकी पहुँच है, इनकी सेटिंग है।
लेकिन जरा सोचिए, उस आम ब्राह्मण, उस ठाकुर, उस बनिया और लाला का क्या होगा जो अपने गाँव की चौपाल पर, अपनी छोटी सी दुकान पर या अपने खेत में पसीना बहाता है? उसकी कौन सी सेटिंग है? जब मुस्लिम और अहीरों की सांठगांठ से मैदान में खुला गुंडाराज उतरेगा, तो सबसे पहला और सबसे बड़ा शिकार यही सामान्य वर्ग का गरीब और मध्यम वर्ग बनेगा।
यह कोई कोरी कल्पना नहीं है, यह कड़वा इतिहास है। मैं मध्य प्रदेश से हूँ, लेकिन मुझे आज भी वो दिन अच्छी तरह याद है। साल 2012 था, तब मैं मात्र 12 वर्ष का एक नासमझ बच्चा था। हम अपने गाँव में बैठे थे, चारों तरफ सपा की जीत के जश्न और चुनाव परिणामों की चर्चाएं हो रही थीं। तब मेरे पिता जी, जो एक शिक्षक थे, उन्होंने अखबार की तरफ देखते हुए भारी मन से एक बात कही थी "बेटा, सपा के जीतते ही आज रात सपाई गुंडों ने दो गाँव लूट लिए हैं।" पिता जी के वे शब्द आज भी मेरे कानों में गूँजते हैं। उन्होंने मुझे सिखाया था कि राजनीति सिर्फ अखबारों की सुर्खियां नहीं होती, इसके पीछे इंसानों का खून और आंसू जुड़े होते हैं।
वही जंगलराज, वही हफ्ता-वसूली, वही हर जिले में पनपते माफिया और ट्रांसफर-पोस्टिंग का वो गंदा उद्योग—क्या हम सब भूल गए हैं? 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की गलियों में क्या होता था, यह किसी से छिपा नहीं था। आज वही माफिया या तो मिट्टी में मिल चुके हैं या अपनी जान बचाने के लिए सब्जी बेचने को मजबूर हैं। उत्तर प्रदेश की बेटियाँ सुरक्षित रात में सफर करती हैं, सड़कों पर बम-धमाकों की गूँज बंद हो चुकी है, और अयोध्या में भव्य राम मंदिर में प्रभु श्री राम विराजमान हैं। जिस बंगाल में 'जय श्री राम' बोलना तक गुनाह था, वहाँ आज दुर्गा पूजा में वही नारे गूँज रहे हैं। यदि आज उत्तर प्रदेश शांत है, दंगा-मुक्त है, तो इसके पीछे योगी जी का वह बुलडोजर और उनका वह अटूट संकल्प है, जिसने अपराधियों की रीढ़ तोड़ दी।
लेकिन आज कुछ नासमझ लोग अपने ही हाथों से अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं। वे यह भूल जाते हैं कि पिछले ढाई हजार वर्षों में भारत ने क्या कुछ नहीं झेला है। आज भारत के कई हिस्से और पड़ोसी देशों का इतिहास गवाह है कि अपनों की फूट और गलतफहमियों ने कैसे बड़े-बड़े साम्राज्य मिटा दिए। 80 साल पहले बना पाकिस्तान इसका ताजा उदाहरण है। यदि आज हम जरा भी चूके, तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश को कश्मीर बनने से कोई नहीं रोक सकता।
हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि योगी आदित्यनाथ जी को उत्तर प्रदेश की कमान सौंपने वाले कोई और नहीं, बल्कि हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और गृहमंत्री अमित शाह जी हैं। यदि केंद्र में मोदी जी की मजबूत सरकार का अटूट समर्थन और सुरक्षा का कवच न होता, तो शायद योगी जी भी अकेले इतने कड़े फैसले न ले पाते। मोदी जी और योगी जी का यह मेल उत्तर प्रदेश के लिए एक सुरक्षा चक्र है।
आज जब चुनाव में सिर्फ 120 दिन का समय बचा है, तब आपस में छोटी-मोटी बातों पर लड़ने, अहंकार पालने या आँखें मूंदकर किसी के बहकावे में आने का वक्त नहीं है। अगर आज हमने योगी जी का साथ छोड़ दिया, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी। वे म्लेच्छों और अराजक तत्वों के हाथों में सत्ता सौंपकर हम अपने ही विनाश का रास्ता तैयार कर रहे हैं। इसलिए, तमाम किंतु-परंतु और गिले-शिकवे भुलाकर, उस कड़वे अतीत को याद रखिए और इस वर्तमान को बचाने के लिए पूरी ताकत से योगी जी के साथ चट्टान की तरह खड़े हो जाइए, क्योंकि यही हमारे वजूद की आखिरी लड़ाई है।
✍️दीपक कुमार द्विवेदी
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