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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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-डॉ.नितिन सहारिया, महाकौशल
फ़्रांस में इस हफ्ते जो हो रहा है, वो सिर्फ एक विरोध नहीं, कई गुस्से का एक साथ फटना इत्यादि घटनाक्रम वास्तव में *यह एक षड्यंत्र है, जो 'ग्लोबल फोर्सज' -अमेरिका इत्यादि के द्वारा संचालित किया जा रहा है।* इसका डायरेक्शन, निर्देशन, पटकथा इत्यादि सब कुछ अमेरिका -वाशिंगटन से संचालित है।
- हिंसा के बहाने की मुख्य वजह 3 हैं, जो एक के बाद एक जुड़ गईं:*
1. शुरुआत - स्कूलों से:
17 सितंबर को पेरिस के पास एक हाईस्कूल में शिक्षकों की कमी, खचाखच भरी क्लास, टूटी इमारतों और पीने के पानी की कमी के खिलाफ छात्र हड़ताल पर गए। 8 दिन में 410 स्कूल इस आंदोलन में आ गए।
2. बड़ा कारण - महंगाई:
छात्र आंदोलन में धीरे-धीरे मज़दूर यूनियन, किसान और आम लोग जुड़ गए। अब मुद्दा बन गया - पेट्रोल, गैस, बिजली और खाने-पीने की बेतहाशा कीमतें, और सरकारी खर्च में कटौती। लोगों ने इसे 2018 वाले Yellow Vest आंदोलन की तरह सोशल मीडिया पर फिर से जीवित कर दिया।
3. हिंसा में कैसे बदला:
17 अक्टूबर को देशभर में करीब 5.5 लाख लोग (आयोजकों के अनुसार 8 लाख) सड़कों पर उतरे, सिर्फ पेरिस में 1.10 लाख। दिन में मार्च शांतिपूर्ण रहा, शाम होते ही नकाबपोश समूहों ने गाड़ियों में आग लगाई, दुकानों में लूटपाट की।
सबसे बड़ी घटना - 'लिमोज' शहर का 143 साल पुराना टाउन हॉल जला दिया गया, जो 1883 में बना था और विश्व युद्ध भी झेल चुका था। उसकी छत और घड़ी वाली मीनार ढह गई। लियोन में टूरिज्म ऑफिस, मार्सिले में सिटी हॉल में भी आगजनी हुई।
सरकार के आंकड़ों के अनुसार 1200 से 2400 तक गिरफ्तारियां हुईं और 150 पुलिसकर्मी घायल हुए। प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने कर्फ्यू जैसे कदम और राष्ट्रपति मैक्रों ने सख्त कार्रवाई की बात कही है।
सार में: फ्रांस जल नहीं रहा, बल्कि वहाँ का मध्यम वर्ग और Gen-Z एक साथ कह रहा है - पढ़ाई की हालत खराब है, जेब पर महंगाई भारी है, और सरकार सुन नहीं रही। राष्ट्रपति चुनाव मई 2027 में हैं और मैक्रों दोबारा नहीं लड़ सकते, इसलिए सियासत भी इस गुस्से को और हवा दे रही है। इन्हीं सब बातों को बहाना बनाकर 'ग्लोबल फोर्सज' फ्रांस को जलवा रही हैं।
ग्लोबल फोर्सज- अमेरिका इत्यादि का षड्यंत्र जैसे बांग्लादेश ,भारत में ट्रायल चल रहा है , वैसा ही फ्रांस में भी चल रहा है। अमेरिका नहीं चाहता कि फ्रांस के वर्तमान राष्ट्रपति मैक्रो वापस बैठे। अराजक, सृजन विरोधी आसुरी शक्तियां/ तत्व संपूर्ण विश्व में अपना झंडा लहराना चाहती हैं, साम्राज्य कायम करना चाहती है;इसी के प्रयत्न जहां-तन्हा देशो में चल रहे हैं। अराजक तत्व स्थानीय मुद्दों को सामने करके, बहाना बनाकर आंदोलन प्रारंभ करते हैं, पीछे गुप्त एजेंडा उनका कुछ अलग ही होता है; जैसा कि पिछले दिनों बांग्लादेश में छात्रों-युवाओं को साथ में लेकर Zen- G का आंदोलन हुआ और अंतिम परिणाम देश में आगजनी ,हिंसा, अराजकता फैलाकर सरकार को गिराया गया एवं कठपुतली सरकार बनाकर देश पर कब्जा कर लिया गया।
जैसे गांव में जमीदार की दादागिरी चलती है ,वैसे ही विश्व में अमेरिका अपनी दादागिरी- तानाशाही चलाने में जब नाकाम हो जाता है, जब स्वार्थ नहीं सधता तब वह 'गुप्त षड्यंत्र'/ Agenda चला करके सरकार को गिराता है, वहां पर कठपुतली राष्ट्र अध्यक्ष / सरकार बिठाकरके और अपने गुप्त एजेंडे को पूरा करता है। विश्व के 50 सौं देशो में अमेरिका के 'हिडन एजेंडा' /गुप्त षड्यंत्र 50-50 वर्षों तक चलते रहते हैं। जैसे अमेरिका ने इराक को निपटाया/ नष्ट किया अब ईरान की बारी है। जिस भी देश से अमेरिका कि नहीं पटती- नहीं बनती तब वह अन्य तरीकों से उस देश पर कब्जा करता है, उसे नष्ट करता है। वास्तव में अमेरिका किसी भी देश को बढ़ते हुए नहीं देखना चाहता; जैसे गांव का जमीदार सबको दवा कर रखता था। बस वैसा ही हाल आज वैश्विक रूप में अमेरिका व अन्य देशों का है। अभिजीत दीपके ,सौरव दास ,नेहा बोरा तो मात्र टूल किट हैं अमेरिका के।
फ्रांस, अल्बानिया , पुर्तगाल, बेल्जियम ,इटली, बांग्लादेश इत्यादि में जो कुछ उपद्रव- हिंसा ,आगजनी हो रही है; उसके पीछे इन्हीं आसुरी शक्तियों का बोलबाला ,करा-धरा है। वर्तमान में विश्व के अंदर आसुरी शक्तियों का गठबंधन है और उनका एजेंडा सारे विश्व में अंधेरा कायम करना है। यह सारा घटनाक्रम इसी की कवायद मात्र है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत जी ने भी इसी सत्य की ओर विजयादशमी के उद्बोधन 20/10/2026 में इशारा किया है।
सुप्रीम कोर्ट के *वरिष्ठ एडवोकेट अश्वनी उपाध्याय जी* का कहना है कि-" *फ्रांस में पार्षद ,सांसद और मंत्री हैं। संसद ,संविधान और सुप्रीम कोर्ट है। हाईवे, एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट भी हैं लेकिन हिंसा और लूटपाट तब भी हो रही है।* *याद रखिए !*
आज के नेता 25 वर्ष बाद आपका मकान, दुकान ,खेत- खलियान बचाने नहीं आएंगे। लेकिन घुसपैठ, धर्मांतरण और जनसंख्या नियंत्रण से जुड़े कानून आपकी आने वाली 25 पीडियौं को बचाएंगे।"
युगऋषि , वेदमूर्ति पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के शब्दों में समाधान दिखलाई देता है-
अनाचार बढ़ता है कब ?
सदाचार चुप रहता जब।।
अर्थात देश की सज्जन शक्ति, नैतिक-बौद्धिक शक्तियां संगठित नहीं है, इसलिए आज आसुरी शक्तियां अपना तांडव -अन्धेरा कायम कर रही हैं अतः *समाधान संगठित शक्ति के द्वारा प्रतिरोध करने पर ही निकल सकता है अन्यथा विनाश धीरे-धीरे बढ़ता जाएगा, विश्व पर कब्जा करते चला जाएगा* अतः समय रहते हम सभी को अधर्म ,अन्याय, अत्याचार के विरोध में संगठित होकर खड़े ही मात्र नहीं होना है अपितु आसुरी शक्तियों की कमर ,रीढ़ तोड़कर सर्वनाश कर देना चाहिए। अपने राष्ट्र धर्म- युगधर्म का स्मरण करिए।
*अधर्म का नाश करने से ही धर्म की जय होती है। प्रकाश का अभाव ही अंधकार है। सज्जनों की निष्क्रियता ही राष्ट्र के लिए घातक है।* भगवान श्रीकृष्ण ने भी तो यही कहा है-
"विनाशाय च दुष्कृताम्ं " ।
सूर्योदय होने के पूर्व अंधेरा गहराता है, तो समझो कि अब अंधेरे का अंत निकट है व सूर्योदय होने ही वाला है।
भारत के बारे में 'ग्लोबल फोर्सज' जो गलतफहमी का शिकार है कि वह भारत में अपना षड्यंत्र बांग्लादेश जैसा सफल कर लेंगे, तो यह उनका स्वप्न मात्र है। भारत सनातन- आध्यात्मिक मूल्यों से चलने वाला राष्ट्र है। यहां इतिहास में बड़े-बड़े शुंभ निशुंभ ,महिषासुर, मधु- कैटभ, त्रिपुरासुर ,कंस,राबण जैसे असुर हुए जिनका भारतीय मेधा- चिति ने संहार करके काल के गाल में पहुंचा दिया था अत: आसुरी शक्तियां, किलविश की औलादें, जरा भारत को ठीक तरीके से पहचान लें।
हर हर महादेव! जय भवानी!! 🙏🚩
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