सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

इस्लामिक जिहादी मानसिकता सच

मेरे साथ एक फिलिस्तीनी जूनियर है. मेडिकल की पढ़ाई इजिप्ट से की है और उसका परिवार इजिप्ट में ही रहता है. वे लोग पहले इजरायल के उस भाग में रहते थे जो फिलिस्तीन और इजरायल के विभाजन के बाद इजरायल के हिस्से पड़ गया था.

    मैंने उसके सामने कंप्यूटर पर इजरायल और फिलीस्तीन का मैप खोल दिया और पूछा - यह बताओ! आज के दिन वह कौन सा लक्ष्य है जिसके लिए फिलिस्तीनी लड़ रहे हैं? माने, रियलिस्टिकली वह क्या है जो हासिल हो जाएगा तो फिलिस्तीनी कहेंगे कि हमें जो चाहिए था वह मिल गया, अब युद्ध खत्म करते हैं. 

   वह अपनी शिकायतों का पुलिंदा खोल कर बैठ गया कि ऑटोमन साम्राज्य के समय कितने प्रतिशत यहूदी थे और कैसे यहूदियों ने बाहर से आकर सबकुछ कब्जा कर लिया. मैंने कहा - वह सब रहने दो! वैसे तो तुम पीछे चलते चलते बेबीलोन और फराओ तक चले जाओगे. कौन कहाँ से गिनती शुरू करना चाहता है यह तो अपनी अपनी सुविधा पर निर्भर है. यह बताओ आज जो है उसमें क्या मिल जाएगा तो यह कॉन्फ्लिक्ट खत्म हुआ मान लोगे.

  उसने फिर शिकायतें शुरू कर दीं... हम अपने देश में एक जगह से दूसरी जगह नहीं जा सकते. गाज़ा और वेस्ट बैंक के बीच कोई कनेक्शन नहीं है, वेस्ट बैंक के चारों ओर नौ मीटर ऊँची दीवार है. कोई एयरपोर्ट नहीं है। 

   मैंने पूछा - अच्छा, अगर वेस्ट बैंक और गाजा के बीच एक 16 लेन की फ्लाईओवर बना दी जाए जिसके नीचे का हिस्सा उत्तर और दक्षिण इजरायल को जोड़े और फ्लाईओवर वेस्ट बैंक और गाज़ा को, तो उससे काम चल जाएगा? और वेस्ट बैंक और गाज़ा में दो दो एयरपोर्ट बना दिए जाएं, तब? उसका खर्च आखिर लड़ाई के खर्च से तो कम ही आयेगा. शान्ति के लिए इजरायल ने कैम्प डेविड समझौते में पूरा का पूरा सिनाई क्षेत्र इजिप्ट को लौटा दिया.. अगर यही तुम्हारी माँग हो इतना तो इजरायल कर ही देता.

   वह बोला - नहीं, हम पूरे क्षेत्र (इजरायल और फिलीस्तीन) में एक जगह से दूसरी जगह जाने और बसने की आजादी चाहते हैं..

   मैंने पूछा - ठीक है, मान लो कि तुम पूरे क्षेत्र में कहीं भी आ जा सकते हो, बस सकते हो, काम कर सकते हो.. इस क्षेत्र में जो वर्तमान डेमोग्राफी है उसके साथ यह तुम्हें मंजूर है? फिर तो यह एक ही देश हो गया.. किसी बंटवारे की जरूरत ही नहीं है. मान लो, जैसा यूनाइटेड किंगडम है.. इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स वगैरह.. वैसा ही एक यूनाइटेड स्टेट ऑफ इजरायल एंड फिलिस्तीन. एक डेमोक्रेसी जिसमें सबको समान वोटिंग राइट हो, सेक्युलर कांस्टीट्यूशन हो और सबको अपना अपना रिलिजन मानने की आजादी हो. यह माँग रहे हो?

   वह चिन्ता में पड़ गया.. बिना अनरीजनेबल दिखे, बिना कट्टरपंथी साबित हुए कैसे इस आर्गुमेंट से बाहर निकला जाए?
   वह बोला - सब हो जाएगा, तब भी एक प्वाइंट रह ही जाएगा जिसपर कोई राजी नहीं होगा..
मैंने पूछा - जेरूशलम?
वह बोला - हाँ! जेरूशलम! वह हमारे लिए रिलिजियस महत्व की जगह है. वहाँ अल अक्सा मस्जिद है.
मैंने पूछा - लेकिन वहाँ तो क्रिश्चियन्स का बेथलेहम भी है, यहूदियों का टेम्पल माउंट और वेस्टर्न वॉल भी है. 

उसने कहा - यहूदी और क्रिस्चियन वहाँ अपना रिलिजन प्रैक्टिस कर सकते हैं. लेकिन पॉलिटिकल कंट्रोल हमारा होना चाहिए.
   फिर वह बताने लगा - सलाउद्दीन के बारे में जानते हो? जब सलाउद्दीन ने जेरूशलम जीता तो उसने ईसाइयों और यहूदियों को वहाँ से निकाला भी नहीं. उसने कहा कि तुम अपना रिलिजन प्रैक्टिस कर सकते हो और यहाँ रह सकते हो.. बस एक टैक्स देना होगा, उन्हें पूरा प्रोटेक्शन भी मिलेगा.

मैंने पूछा - जज़िया टैक्स?

वह थोड़ा सकपका गया. उसने कहा कि उसे उम्मीद नहीं थी कि मुझे जज़िया टैक्स के बारे मालूम होगा. वह मुझे जज़िया के फायदे और जस्टिफिकेशन समझाने लगा. जज़िया सिर्फ एक और टैक्स है, जिसके बदले आपको प्रोटेक्शन मिलता है. अब वह प्रोटेक्शन किससे मिलता है और इसकी जरूरत क्यों पड़ने वाली है यह प्रश्न बहुत असहज करने वाले हैं, और वह इसपर निर्भर है कि आप उससे यह प्रश्न नहीं पूछेंगे.

   मेरे पास और भी प्रश्न थे, लेकिन मैंने नहीं पूछा. क्योंकि मुझे मालूम है कि एक बहस जीत कर मैं उसका हृदय परिवर्तन नहीं कर लूँगा.. बस, जो वह सोचता है वह नहीं जान पाऊँगा. पहला प्रश्न तो यह है कि भाई, अगर जज़िया इतनी बढ़िया चीज है तो तुम्हीं दे दो जज़िया और बदले में प्रोटेक्शन ले लो ना. इजरायल से ही प्रोटेक्शन माँग के देख लो.. वह तो तुमसे जज़िया भी नहीं माँग रहा.

   इस्लाम का मूल लक्ष्य पॉलिटिकल कंट्रोल है. और उनकी सबसे बड़ी समस्या यह है कि उनके पास नैतिकता के यूनिवर्सल पैरामीटर नहीं हैं. बल्कि नैतिकता का जो बेसिक पैरामीटर है वही उनके पास नहीं है. जो व्यवहार वे आपसे करते हैं, वही व्यवहार वे आपसे स्वीकार नहीं करते. उनके लिए न्याय की व्याख्या मुस्लिम के लिए कुछ और है और गैर मुस्लिम के लिए कुछ और.

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