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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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डी एन झा को अगर एक लाइन में समझना है तो समझो कि वह इतिहासकार नहीं था, वह भारत की आत्मा पर शॉक देने वाला वामपंथी था और यह बात हम नहीं वह खुद कहता है कि मुझे हिंदुओं को शॉक ट्रीटमेंट देना था क्योंकि हिंदू लातो के भूत हैं बातों से नहीं मानते।
सोचिए ऐसे व्यक्ति को विद्वान की तरह हम पढ़ते रहे, श्रद्धाभाव से।
उसका पूरा खेल तीन चीजों पर टिका था - नालंदा, गाय और धर्म और तीनों में उसका तरीका एक ही था, हमलावर को बचाओ और हिन्दू को बदनाम करो।
पहले नालंदा पर बात करते हैं। दुनिया का हर बच्चा जानता है नालंदा को बख्तियार खिलजी ने जलाया था। मुस्लिम इतिहासकार मिन्हाजे सिराज खुद लिखता है कि हमने वहाँ जाकर मुंडे हुए ब्राह्मणों को काट दिया और किले जैसी इमारत को लूट लिया। तिब्बती यात्री धर्मस्वामी लिखता है कि मैंने अपनी आँखों से धधकती लाइब्रेरी देखी। पर झा और उसकी की जमात कहती है नहीं नालंदा तो हिन्दुओं ने ही जलाया था। क्यों? क्योंकि अगर खिलजी ने जलाया मान लिया तो उनका सेकुलरिज्म का झूठ टूट जाएगा।
दूसरा गाय को लेकर झा असत्य और अनपढ़ बात करता है। जब नालंदा जलाने वाले को बचाना है तो हिन्दू को कसाई साबित करो। इसलिए किताब लिखी पवित्र गाय का मिथक। वेद में सौ जगह गाय को अघ्न्या कहा है जिसका मतलब है जो कभी मारी नहीं जा सकती, उस पर वह आँख बंद कर लेगा। और किसी पुरानी व्याख्या में जहाँ नरम अन्न की बात है वहाँ से एक लाइन उठाकर कहेगा देखो हिन्दू गाय खाता था। यह शोध नहीं है, यह ठगी है। किसान जानता है गाय क्या है, वह दूध है, वह खेत है, वह माँ है। पर झा को यह माँ मिथक लगती है क्योंकि अगर गाय माँ है तो फिर हिन्दू करुणावान हुआ और अगर हिन्दू करुणावान है तो बर्बर कौन है?
तीसरा धर्म, नालंदा धर्म का दीपक था और गाय धर्म का आधार थी। दोनों को गाली देकर असल में धर्म को ही गाली देनी थी। उसका कहना था कि भारत में धर्म जैसा कुछ है ही नहीं, हिंदुत्व केवल दो सौ साल की कहानी है।
झा उन विश्वविद्यालयों में बिका जहां भारत को गाली दी जाती थी। विदेश के उन सेमिनारों में बिका जहाँ भारत का अपमान करना ही बुद्धिमानी समझा जाता है।
सच यह है कि झा ने इतिहास नहीं लिखा, उसने अपनी हिन्दू घृणा की आत्मकथा लिखी और उसे इतिहास का नाम दे दिया।
जब मंदिरों को तोड़ कर मस्जिद बनाने वालों का नाम लिखा जाता है तो मीर बाकी गोरी गजनी बाबर से लेकर औरंगजेब का नाम याद आता है। लेकिन जब इतिहास में हिंदू सभ्यता को तोड़ कर उसके स्थान पर मजहबी, वामपंथी निर्माण की बात आए तो डिस्टोरियंस डी एन झा को याद रखिएगा।
-डॉ पवन विजय
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