सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

आर एस शर्मा: वह डिस्टोरियन जो हिंदू घृणा का पोस्टमैन था



रामशरण शर्मा को इतिहासकार कहना इतिहास का अपमान है। वह मार्क्सवादी गिरोह का वह पोस्टमैन था जो एनसीईआरटी की किताबों के जरिए तीन पीढ़ियों के दिमाग में जहर डिलीवर करता रहा।

बरौनी, बेगूसराय के एक परिवार में 26 नवंबर 1919 को पैदा हुआ, पटना कॉलेज से एमए फिर लंदन एसओएएस में ए.एल. बाशम के नीचे पीएचडी की। आरा, भागलपुर में पढ़ाया, 1946 में पटना कॉलेज में लेक्चरर बना, 1958-73 तक पटना यूनिवर्सिटी का हेड, फिर 1973-85 तक दिल्ली यूनिवर्सिटी हिस्ट्री का हेड और डीन।

यहीं से उसका असली करियर शुरू होता है - इतिहास नहीं, वामपंथी नेटवर्किंग। जवानी में किसान नेता कार्यानंद शर्मा, राहुल सांकृत्यायन ने उसे मार्क्सवादी चश्मा पहना दिया। फिर दिल्ली में इरफान हबीब, रोमिला थापर, डी.एन. झा, सतीश चंद्र के साथ मिलकर दिल्ली ग्रुप ऑफ हिस्टोरियन्स बनाया। इस गैंग ने आईसीएचआर पर कब्जा किया, शर्मा उसका फाउंडिंग चेयरमैन बना, और फिर यूजीसी, एनसीईआरटी, यूनिवर्सिटी अपॉइंटमेंट - हर जगह वामपंथी फिल्टर लगा दिया।

उसका एजेंडा साफ था - हिंदू को अपने ही घर में किराएदार साबित करो।

पहला झूठ : आर्य बाहर से आए। 
अंग्रेजों की फेंकी हड्डी को चबा-चबा कर थ्योरी बनाया कि आर्य आक्रमणकारी थे और हड़प्पा को मारकर बसे। सच्चाई? एक भी सबूत नहीं। राखीगढ़ी का डीएनए आज के भारतीयों से सौ प्रतिशत मिलता है, सैटेलाइट से सरस्वती नदी का सूखना साबित है, हड़प्पा में युद्ध का एक भी निशान नहीं। वेद में कहीं हम बाहर से आए नहीं, लिखा है हम सरस्वती के पुत्र हैं। पर शर्मा को वेद नहीं, मार्क्स पढ़ना था।

दूसरा नैरेटिव:हिंदू गाय खाते थे। 
हिंदू गाय को मां कहता है तो शर्मा को दर्द होता था। उसने अपने पुरखों की परम्परा, पीढ़ियों के प्रति कृतज्ञता को बेच दिया, इसलिए वेदों के अघ्न्या जैसे शब्दों का मनमाना अनुवाद करके लिखा,देखो तुम्हारे पूर्वज खुद गोमांस खाते थे। उसने जानबूझकर यज्ञ के प्रतीकात्मक शब्दों को मांस की दुकान बना दिया, ताकि आज गाय के लिए लड़ने वाला हिंदू ही अवैदिक लगे।

तीसरा जहर: जातिवाद और सामंतवाद। 
उसकी किताब शूद्राज इन एंशिएंट इंडिया और इंडियन फ्यूडलिज्म में एक ही लाइन - भारत में सब बुरा हिंदू धर्म की वजह से है। भारतीय ग्राम व्यवस्था को जबरदस्ती यूरोप के फ्यूडलिज्म में ठूंस दिया।

उसने 115 किताबें 15 भाषा में लिखीं, पद्मभूषण, नेहरू अवार्ड, और बदले में हिंदुओं के बच्चों को पढ़ाया कि तुम्हारे पूर्वज लुटेरे थे, गाय खाने वाले थे, जातिवादी थे।

राम शरण शर्मा का बोया जहर अब फसल के रूप में लहलहा रहा है, डी एन झा के बाद जेएनयू की मिस शर्मा एंड कंपनी, दृष्टि, विजन गिरोह राम शरण के ही अकादमिक डीएनए से संबंधित है।


-डॉ पवन विजय 

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