सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

आर्य आक्रमण सिद्धांत के तीन झूठ



देवदत्त पटनायक आर्यों को मध्य एशिया का निवासी सिद्ध करने झूठ का नैरेटिव खूब बना रहा है। राखीगढ़ी के कंकाल से यह साबित करने की कोशिश की जा रही है कि आर्य भारत के बाहर से आए थे। ये जाहिल लोग यवनों, अरबों, तुर्कों, मुग़लों और अंग्रेजों को भारत का मूल निवासी बताते हुए ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य को भारत के बाहर का बता कर एजेंडा सेट करते हैं।

आर्यन इनवेजन थ्योरी कोई इतिहास नहीं, अंग्रेजों का बनाया हुआ एक हथियार था जिसे आज भी चलाया जा रहा है।

इस थ्योरी की धज्जियां मैंने अपनी पुस्तक ज़ीरो में उड़ा दी हैं फिर भी कुछ अलग से तथ्य लिख रहा हूँ।

इस थ्योरी की शुरुआत 1840 में हुई जब मैक्स मूलर नाम के जर्मन ने वेदों का अनुवाद किया और कहा वेद 1500 BC में लिखे गए। उसके बाद अंग्रेज अधिकारी रिसले ने कहा भारत में दो कौम हैं - आर्य और अनार्य, गोरे और काले। क्यों कहा? क्योंकि उन्हें भारत को बाँटना था। अगर भारतीयों को ये समझा दो कि तुम एक नहीं हो, उत्तर वाले बाहर से आए हैं, दक्षिण वाले असली हैं, तो ये कभी एक नहीं होंगे। यही बाँटो और राज करो की नीति थी।

आजादी के बाद यही थ्योरी नए कपड़ों में लौट आई - पहले कहा गया आक्रमण हुआ, फिर जब घोड़ों के सबूत नहीं मिले तो कहा गया माइग्रेशन हुआ, अब कहते हैं जीन आया। नाम बदलते हैं, मकसद वही है - भारतीय को बताओ तुम बाहर से आए हो, इसलिए इस जमीन पर तुम्हारा हक नहीं है।

इस थ्योरी के तीन झूठ हैं जो अब पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं।

पहला झूठ - संस्कृत बाहर से आई। अगर संस्कृत बाहर से आई तो भारत में संस्कृत की सबसे ज्यादा पुरानी पांडुलिपियाँ क्यों हैं, सेंट्रल एशिया में एक भी क्यों नहीं। और संस्कृत का सबसे करीबी रिश्तेदार लिथुआनियाई भाषा है, जो आज भी वैदिक मंत्रों जैसी है, पर बीच के ईरान, तुर्की में संस्कृत का नामोनिशान क्यों नहीं। मतलब संस्कृत यहीं से बाहर गई।

दूसरा झूठ - घोड़े बाहर से आए। ऋग्वेद में घोड़े का जिक्र है इसलिए कहा घोड़ा बाहर से आया। पर सुरकोटदा में 2100 BC का घोड़ा मिल चुका है, जो आर्य आगमन से 600 साल पहले का है। महाभारत को मैने 3200BC के आस पास का सिद्ध किया है,इसके अलावा महाराष्ट्र में 7000 साल पुराने घोड़े के दांत मिले हैं। घोड़ा यहाँ पहले से था।

तीसरा झूठ - R1a बाहर से आया। ये सबसे बड़ा प्रोपेगेंडा है। राखीगढ़ी के एक कंकाल को दिखा कर कहते हैं देखो R1a नहीं है। पर तारतू यूनिवर्सिटी ने 300 लोगों का DNA करके दिखा दिया कि R1a की असली डाइवर्सिटी पंजाब में है, साइबेरिया में नहीं। और अगर R1a बाहर से आया तो उसका भाई R1b कहाँ है, वो तो भारत में है ही नहीं। इसका मतलब R1a यहीं पैदा हुआ और यहीं से यूरोप तक गया। 

और सबसे बड़ा सबूत - सरस्वती नदी। वेदों में सरस्वती को महानदी कहा गया है, जो समुद्र तक जाती है। सैटेलाइट से पता चला सरस्वती घग्गर-हाकरा ही है जो 3000 BC में सूख गई। अगर आर्य 1500 BC में आए तो उन्होंने सूखी हुई नदी को महानदी कैसे कह दिया, जो उनके आने से 1500 साल पहले ही सूख चुकी थी। इसका एक ही मतलब है वेद सरस्वती के सूखने से पहले लिखे गए, यानी 3000 BC से पहले।

आर्यन इनवेजन थ्योरी का मकसद इतिहास बताना नहीं, भारतीय को जड़ से काटना है। जब तक भारतीय ये मानता रहेगा कि वो बाहर से आया है, वो इस जमीन के लिए लड़ेगा नहीं। इसीलिए इस थ्योरी को हर स्कूल की किताब में डाला गया।

अब डीएनए, पुरातत्व और सैटेलाइट तीनों ने इस थ्योरी को झूठा साबित कर दिया है। आर्य कोई बाहर से नहीं आया, आर्य इसी जमीन का नाम है। जो बाहर गए वो यहीं से गए।

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