सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

ये हमारा भारत आज किस मोड़ पर आ गया है ???...

।।ॐ।।

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-डॉ. नितिन सहारिया, महाकौशल


            भारत दुनिया का सनातन- पुरातन राष्ट्र है। भारत ऋषि -मुनियों, साधु- संतों, देवताओं,तपस्वियों का धर्म प्राण देश है। भारत सनातन मूल्यों,वचन की निष्ठा, धर्म पालन, धर्माचरण -सदाचार , आस्तिकता - ईस्वर विश्वास , नारी का सम्मान के लिये जाना जाता है। भारत विविध परंपराओं, त्योहारों, प्रथाओं , वेशभूषा -विन्यास, रीति-रिवाजों, खान-पान, पन्थो, विचार धाराओं , दर्शन, मूल्यों,रुप- रंगो के लिए दुनिया में जाना जाता है। *भारतीय संस्कृति ज्ञानमयी, त्यागमयी, यज्ञमयी , आध्यात्मिक, दैवीय Divine culture, मूल्य आधारित, ऋषि प्रणीत, वैश्विक संस्कृति रही है, जिसने अनगढ़ को सुगढ़, अंगूलीमाल को संत, मानव को महामानव- देवमानव, लोहे को सोना, भोगि को योगी, अणु को विभु बनाया है।* भारतीय संस्कृति -देव संस्कृति अमृत, पारस के समान है। यह विश्व-ब्रह्मांड में अतुल्य, अनादि, अनुपम, अखंड , अनंत , कालजयी, आध्यात्मिक , समन्वयवादी संस्कृति है । 
           *भारतवर्ष के ऋषियों ने अपने शरीर को यंत्र बनाकर व ब्रह्मांड को प्रयोगशाला बनाकर आत्मा- परमात्मा, ब्रह्मा पर रिसर्च किया है।* भारतीय संस्कृति " सर्वे भवंतु सुखिन:" , 'वसुधैव कुटुंबकम ', आत्म्वत सर्व भूतेषू , ईशावास्य मिद्ं सर्व्ं, तेंन त्यतेंन भुंजित: , "सियाराम मय सब जग जानी" इत्यादि के साथ सम्पूर्ण चराचर में एक ही ब्रम्हा - चेतना का दर्शन करने वाली संस्कृति है। जिसने संपूर्ण विश्व को अपना परिवार माना है।
          भारत को आजाद हुए आज 75 से अधिक वर्ष हो गए हैं और हम आजादी का अमृतकाल भी मना चुके हैं। *हम 15 अगस्त 1947 को आजाद तो हुए किंतु स्वाधीन नहीं हो पाए अभी तक। हमारे देश का समाज आज भी पश्चिमी सभ्यता Western culture व्यवहार, तकनीकी, शिक्षा, खान-पान, वेशभूषा, तौर- तरीकों इत्यादि का बड़ी मात्रा में अंधानुकरण कर रहा है।* कुल मिलाकर आज भी हमारे देश का समाज बौद्धिक परावलंवन -मानसिक हीनता की ग्रंथि से जूझ रहा है। *हालांकि 2014 के बाद स्थिति में बदलाव आरंभ हुए हैं।* 
        आज देश की स्थिति बहुत गंभीर, असमंजस, अलगावबाद, भ्रष्टाचार, नारी शोषण- अपहरण, मिलावट खोरी, कालाबाजारी, संवैधानिक असमानता, न्याय में देरी, की बनी हुई है । आज देश में आंतरिक व वाहा संकट के बादल मर्डरा रहे हैं । *देश के अंदर देशघाती शक्तियों की संख्या अत्यधिक मात्रा में बढ़ चुकी है* जैसे टुकुर -टुकड़े गैंग ,अर्बन नक्सली, कम्युनिस्ट, सनातन विरोधी गैंग, विकास विरोधी गैंग, बांग्लादेशी घुसपैठिये, पूर्वोत्तर के अलगाववादी गुट, दक्षिण के सनातन विरोधी दल , बसपा, सपा ,आप ,गोन्ग्पा, AIMIM , DMK, ULFA, CNN ,BODO ,सबका बॉस INC इत्यादि देश/ सनातन विरोधी संगठन । 
             *दुनिया की वैश्विक शक्तियां ग्लोबल फोर्सज भी भारत की प्रगति, शांति, विकास में बाधक हैं ।* अमेरिका, चीन,पाकिस्तान ,बांग्लादेश, टर्की तरह-तरह के षड्यंत्र भारत में परोक्ष रूप से चलाते रहते हैं।
             आज देश के अंदर भ्रष्टाचार चरम पर है। गरीब आदमी को न्याय नहीं मिल पा रहा है। गरीब और गरीब होता जा रहा है एवं अमीर और अमीर। *भारत का सर्वोच्च न्यायालय भी जाति, कम्युनिटी,पन्थ देखकर के बात करता है, न्याय करता है अर्थात दोहरा रवैया अपनाता है।* जैसे हिंदू कम्युनिटी का कोई मामला आता है तो माननीय न्यायालय सख्त हो जाता है और मुस्लिम, ईसाई या कम्युनिस्ट कम्युनिटी का कोई मामला आता है तो माननीय न्यायालय दरिया दिली दिखाता है, कानूनी दाव -पैन्च दिखा करके मामले से किनारा कर लेता है अथवा छूट दे देता है। *भारत का सर्वोच्च न्यायालय आतंकी के लिए 2:30 बजे रात को खुल जाता है। किंतु झारखंड में छात्रों के साथ वर्षों से हो रहे पीएससी में अन्याय ,भ्रष्टाचार व वर्तमान आंदोलन पर स्वत: से संज्ञान नहीं लेता है।* 
          मुंबई में फिल्म स्टार सलमान खान गरीबों को गाड़ी से कुचलने के बाद भी अदालत से बा इज्जत बरी हो जाता है। तो फिर प्रश्न उठता है कि वह गरीब लोग आखिर मरे कैसे? *2020 में मुंबई के फिल्म स्टार सुशांत सिंह की हत्या बालिबुड गिरोह के द्वारा करवा दी जाती है। सारा मामला देश के सामने स्पष्ट हो गया किंतु उसके परिवार को न्याय नहीं मिला ।* क्योंकि उसमें एक बड़े राजनीतिक नेता के बेटे का भी नाम आ रहा था, बॉलीवुड गैंग की पोल खुल रही थी अतः मामले/काण्ड को दबा दिया गया। *मुंबई के पास पालघर में मई 2020 के दौरान निहत्थे साधुओं की पीट-पीटकर हत्या कर दी जाती है, ईसाई मिशनरियों द्वारा जिन्हें आज तक न्याय नहीं मिला।* इस प्रकार यदि पूरे देश के अंदर घटनाओं के आंकड़े इकट्ठे किए जाएंगे तो सैकड़ो में इनकी संख्या निकलेगी। यह तो अभी हाल ही के कुछ पिछले वर्षों की घटनाओं पर ध्यान दिलाया गया है।
         *देश में विभाजन के समय जो हिंसा का घटनाक्रम चला उसमे लाखों हिंदुओं की जानें गई ,हजारों माताओं-बहनों के साथ दुराचार ,लूटपाट, आगजनी ,हिंसा हुई।* कोलकाता ,असम , उत्तरप्रदेश, बंगाल ,उत्तराखंड, दिल्ली, मुरादाबाद, मेरठ ,जौनपुर, सहारनपुर, संभलपुर, पंजाब, काश्मीर, नोआखाली इत्यादि के दंगों में मारे गए हिंदुओं का हिसाब लगाएंगे तो प्रत्येक हिंदू का दिल दहल जाएगा।
         *पुरी के शंकराचार्य जी वर्तमान भारत की स्थिति से दु:खी होकर कहते हैं* कि -
 1. सैद्धांतिक धरातल पर भारत स्वतंत्र देश नहीं है।
2 . परतंत्रता के दिनों में हमारे प्रशस्त सनातन सर्व हितप्रद मानबिंदुओं का जितना क्षय हो रहा था, उससे अधिक क्षय स्वतंत्र भारत में प्रशस्त मान बिंदुओं का हो रहा है।
3 . जनता जनार्दन व चुने हुए राजनेताओं को विचार करना चाहिए कि क्या भारत सैद्धांतिक धरातल पर स्वतंत्र देश है ?
4 . शिक्षा पद्धति हमारी अपनी नहीं है।
5 . रक्षा की प्रणाली हमारी अपनी नहीं है।
6 .कृषि, गोरक्ष, वाणिज्य के प्रकल्प हमारे अपने नहीं है।
7 . सेवा ,उद्योग के प्रकल्प हमारे अपने नहीं हैं।
8 . संविधान की आधारशिला अपनी नहीं है।
9 . अब धीरे-धीरे भोजन, वस्त्र ,आवास, विवाह इत्यादि के प्रकल्प भी हमारे विकास के नाम पर विलुप्त किये जा रहे हैं।
         भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद तो हो गया किंतु उसके बाद जो षडयंत्रों , घोटालों , झूठे इतिहास लेखन का , देश को पश्चिमी संस्कृति की ओर धकेलने का , हिंदुओं की नसबंदी कराके जनसंख्या घटाने का, देश को इस्लामीकरण की ओर धकेलने का जो घटनाक्रम चला वह दिल को दहला देने-लोमहर्ष्क रहा है। भारत के राष्ट्रपति भवन में रोजा इफ्तार की पार्टियां हुआ करती थी इत्यादि;शायद जिसका वर्णन करना भी संभव नहीं होगा। *अभी 2014 से देश वास्तविक अर्थों में स्वाधीन होता जा रहा है अथवा भारत वास्तव में भारत बनने / विकसित भारत/ विश्वगुरू की राह पर चल पड़ा है।* 
             आजादी के पश्चात हुए षड्यंत्रों /कांडों की सूची तो वैसे सैकडों में है किन्तु कुछ प्रमुख इस प्रकार से हैं -
          • नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के साथ सड़यंत्र,( प्लेन डेथ स्टोरी)
• सरदार बल्लभ भाई पटेल के साथ सड़यंत्र / (पी.एम. बनने से रोकना /अन्तिम संस्कार मे जाने से रोकना ...)
  • लाल बहादुर शास्त्री की हत्या का सड़यंत्र -11/01/1966 ताशकंद ( उज्वेकिस्तान ),( pm नही होने देना)
 •गौ सेवा आन्दोलन - (7 नवम्बर 1966 , गोपस्ट्मी ) संसद् के सामने साधू हत्याकांड ,( सैकडों साधू व गौ की हत्या)
• नवम्बर 1984 सिख दंगो/ विभत्स हत्याकांड ( देश में 8-17000 मौतें)
• महाराष्ट्र के एक शहर मे एक रर्हीश जादे ने एक बच्ची को गाड़ी से कुचल दिया...
• ''1978 यू.पी. सन्भल दंगे'' मे मारे गये 200 से अधिक हिंदू परिवारों को इन्साफ न्ही मिला।
• 2-3 दिसम्बर 1984 भोपाल म. प्र. में 'गैस कांड ' ( 3-4 हज़ार लोगों की मौत )
• किसान आंदोलन मुल्ताई-बैतूल 12/01/1998 (म. प्र.) का गोलीकांड 
• 1990-91 कश्मीरी हिंदुओं का सामूहिक नरसंहार ,विस्थापन कांड 
• 1991 का अजमेर रेप कांड 
• 1990 -91 में विद्यार्थियों का आत्मदाह/ आन्दोलन (आरक्षण को लेकर )
• बिहार का सतेन्द्र दुबे ( NHAI के स्वर्णिम चतुर्भुज प्रोजेक्ट इंजीनियर ) हत्याकांड - 27/11/2003 
• 4 जून 2011- रात्री 12:30 am ,बाबा रामदेव आन्दोलन रामलीला मैदान ,नई दिल्ली का लाठी काण्ड ( UPA सरकार में ) ....

            अभी *वर्तमान में झारखंड के रांची शहर में छात्रों का पीएससी में भ्रष्टाचार को लेकर लगभग 25/07/2026 से 24 दिन से लगातार आंदोलन चल रहा है, कोई सुनवाई नहीं,ऊपर से लाठी चार्ज हुआ सो अलग। झारखंड सरकार का जंगल राज चल रहा है* एक-एक पोस्ट के अलग-अलग रेट तय हैं। एक छात्रा ने बताया कि उसे 300 में से 299 अंक मिले फिर भी उसका चयन नहीं हुआ; तब हम समझ सकते हैं कि चयन प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की सन्लिपत्ता किस स्तर की है। *इस पर आज तक माननीय न्यायालय ने कोई अपने से संज्ञान क्यू नहीं लिया ?* 
              *उपरोक्त कांड - घटनाओं में इंसाफ नहीं मिला। वे दर-दर न्याय के लिए भटकते रहे, ठोकरे खाते रहे किंतु न्याय नहीं मिला और हम लोग कहते हैं कि भारत स्वतंत्र- स्वाधीन हो गया !*
         भारत के प्रत्येक देशभक्त नागरिक को आज यह चिंतन करना चाहिए कि *यदि इसी प्रकार से देश चलता रहा तो आने वाला भविष्य कितना विनाशकारी ,अराजकता, अशांति, संकटों से भरा होगा। जरा विचार करें! हम अपनी आने वाली पीढियां के लिए कैसा भारत छोड़कर जाना चाहते हैं? क्या हम स्वर्णिम भारत बनाकर जाएंगे अथव गुलाम, भ्रष्टाचार से युक्त ,भेदभाव , संघर्षो से भरा हुआ, योग्यता को दरकिनार करते हुये जातिगत आधार पर चयन प्रक्रिया, नारी शोषण, खनन माफिया राज , लव जिहाद, धर्मांतरण, दिमागी नक्सल, इस्लामी, आराजक तत्वो से युक्त अथवा मुक्त भारत बनाकर जायेंगे।* 
   *आज प्रत्येक भारतवासी को अपने राष्ट्रधर्म- युगधर्म को पहचानने व उसके अनुरूप आचरण करने की आवश्यकता है।* यदि हम ऐसा कर सके तो ही हमारा भारत भूमि में जन्म लेना सार्थक होगा अन्यथा व्यर्थ।

  प्राण से प्रिय, हमारे लिए है वतन।
 स्वर्ग से भी बड़ा है ,हमारा वतन ।।
रक्त से भी अगर ,सींचना पड़ गया।
 बेहिचक सींच देंगे,वतन का चमन।।
            वन्देमातरम् !

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