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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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प्रश्न 1: 'कुल' किसे कहते हैं और सनातन वैदिक परंपरा में 'कुटुंब' (परिवार) की अवधारणा क्या है? स्पष्ट कीजिए।
प्रश्न 2: हमारे कुलदेवता से लेकर इस अखिल ब्रह्मांड तक हमारा संबंध क्या है? इसे उदाहरण के साथ समझाएं।
प्रश्न 3: ग्लोबल मार्केट फोर्सेज (वैश्विक बाजारवाद की ताकतें) हिंदू परिवार व्यवस्था पर लगातार हमले क्यों कर रही हैं? बाजारवाद चाहता है कि आप अपनी मर्यादा और संस्कार भूलकर सिर्फ एक 'अकेले उपभोक्ता' (Consumer) बनकर रह जाएं, ताकि उनका अरबों का व्यापार चल सके; इस खेल को उदाहरण के साथ समझाएं।
प्रश्न 4: आज की आधुनिक शिक्षा और समाजशास्त्र में हमारी इस खूबसूरत पारिवारिक व्यवस्था को अंदर से खोखला करने और उसे जानबूझकर एक 'शोषक ढांचा' सिद्ध करने के लिए क्या-क्या खतरनाक विचार पढ़ाए जा रहे हैं?
प्रश्न 5: धर्म और रिलिजन में क्या अंतर है? क्या सभी धर्म एक समान हैं?
प्रश्न 6: रिलिजन, मज़हब, मत, पंथ और संप्रदाय में क्या अंतर होता है? क्या क्रिश्चियनिटी और इस्लाम 'धर्म' की परिभाषा में आते हैं या ये केवल राजनीतिक-सामाजिक व्यवस्थाएं हैं?
प्रश्न 7: सनातन परंपरा में बताए गए सोलह संस्कार क्या हैं और मानव जीवन में उनका क्या महत्व है?
प्रश्न 8: आज के युवाओं को नैतिक और चारित्रिक रूप से सशक्त होने की आवश्यकता क्यों है?
प्रश्न 9: मर्यादा क्या है और हमें हमारे घरों में मर्यादा के भीतर रहने की सीख क्यों दी जाती है?
प्रश्न 10: धर्म का दूसरा अर्थ 'कर्तव्य' क्यों कहा जाता है? हमारे कर्तव्य और 'कर्मफल का सिद्धांत' आपस में कैसे जुड़े हैं?
प्रश्न 11: पश्चिमी विचारों में हमेशा केवल 'अधिकारों' की बात करके समाज को शोषक और शोषित की श्रेणियों में बांटने और एक कृत्रिम वर्ग संघर्ष (Class War) पैदा करने की कोशिश क्यों की जाती है?
प्रश्न 12: आज संविधान से लेकर सामाजिक जीवन तक हर जगह सिर्फ अधिकारों की बात होती है, लेकिन कर्तव्यों की बात क्यों नहीं होती? इससे समाज का क्या नुकसान हो रहा है?
प्रश्न 13: क्या व्यावहारिक रूप से सब कुछ समान होना संभव है? क्या इस अखिल ब्रह्मांड में कुछ भी एक समान है? फिर स्टेट (सरकार) और एक बड़ा वैश्विक बौद्धिक वर्ग हर बात में सबको जबरन एक समान (Absolute Equality) क्यों बनाना चाहता है?
प्रश्न 14: जब सृष्टि त्रिगुणात्मक है और इसके तीन आयाम (आधिदैविक, आधिभौतिक, आध्यात्मिक) हैं, तो भारतीय दृष्टि में समानता का असली मतलब क्या है?
प्रश्न 15: हमारा यह शरीर पंचमहाभूतों और दर्शन के 25 तत्वों से मिलकर बना है; जब हमारे शरीर के ही अलग-अलग अंगों के अलग-अलग कार्य हैं और उनमें समानता नहीं है, तो समाज की प्राकृतिक विविधताओं को नष्ट करके सबको एक लाठी से हांकना कहाँ तक उचित है?
प्रश्न 16: कुटुंब (परिवारों) के समूह से समाज बनता है और अलग-अलग समाजों के सहयोग से राष्ट्र बनता है; राष्ट्र की सही अवधारणा क्या है?
प्रश्न 17: भारतीय 'राष्ट्र' और यूरोपियन 'नेशन-स्टेट' के प्रारूप (Model) में क्या बुनियादी अंतर है?
प्रश्न 18: जीवन क्या है? क्या जीवन सिर्फ एक बार मिलता है, जैसा कि पश्चिम की फिलासफी कहती है?
प्रश्न 19: सनातन के पुरुषार्थ चतुष्टय—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए।
प्रश्न 20: पश्चिम कहता है कि जीवन एक बार मिला है, इसलिए जितना हो सके भोग करो और धरती मां के संसाधनों को दानवों की तरह खा जाओ; वहीं भारत का दर्शन 'पुनर्जन्म, आत्मा, ब्रह्म और मोक्ष' की बात करता है कि जब तक मोक्ष न हो, जन्म-पुनर्जन्म चलता रहता है। इसका वास्तविक अर्थ समझाएं।
प्रश्न 21: बहुत से लोग कहते हैं कि यूरोप ने विज्ञान दिया, टेक्नोलॉजी दी, ट्रेन और हवाई जहाज बनाए और उनका समाज विज्ञान पर आधारित है, हमने कुछ नहीं किया; क्या यह सच है?
प्रश्न 22: अगर यूरोप इतना ही वैज्ञानिक और सभ्य था, तो उनकी काल-गणना आज भी बाइबिल के आधार पर सिर्फ 6 हजार वर्ष के आसपास क्यों चलती है? वे इसके आगे क्यों नहीं जा पाते?
प्रश्न 23: यूरोप में गैलीलियो और ब्रूनो जैसे वैज्ञानिकों को सिर्फ यह कहने पर जिंदा क्यों जलाया या प्रताड़ित किया गया कि 'धरती गोल है'? जबकि भारत में लाखों वर्ष पहले ऋषियों ने बिना किसी हिंसा के 'भूगोल' (धरती गोल है) की बात कह दी थी और किसी को नहीं मारा गया, ऐसा क्यों?
प्रश्न 24: आज के समय में हम सचमुच आधुनिक हो रहे हैं या सिर्फ पश्चिमी विचारों के गुलाम बन रहे हैं? भारतीय दर्शन के अनुसार 'आधुनिकता' की सही परिभाषा क्या है?
प्रश्न 25: आधुनिकता बनाम पुरातन के इस नरेटिव (विमर्श) का असली सच क्या है?
प्रश्न 26: अगर यूरोपियन और क्रिश्चियन इतने ही विज्ञानवादी और समानतावादी थे, तो वहां इतिहास में लाखों महिलाओं को 'डायन' (Witch-hunt) कहकर जिंदा क्यों जलाया गया?
प्रश्न 27: बाइबिल में ऐसा क्यों लिखा है कि स्त्री आदम की पसली (अंतड़ी) से निकली है, इसलिए वह शापित है और शैतान की साथी है? यूरोपीय समाज में लंबे समय तक स्त्री को मनुष्य क्यों नहीं माना जाता था? इसके उलट भारत की वैदिक परंपरा में स्त्री का वास्तविक स्थान क्या था?
प्रश्न 28: पश्चिमी नारीवाद (Western Feminism) से निकले 'माई लाइफ, My Body, माई चॉइस' जैसे नारों के पीछे पारंपरिक पारिवारिक ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त करने का क्या एजेंडा छिपा है?
प्रश्न 29: सनातन वैदिक धर्म में विवाह को एक पवित्र 'संस्कार' क्यों माना गया है? प्रेम की सही और वास्तविक परिभाषा क्या है?
प्रश्न 30: आज के समय में 'लिव-इन रिलेशनशिप' सही है या गलत? इसका भारतीय समाज और हमारी पारिवारिक व्यवस्था पर क्या गहरा प्रभाव पड़ रहा है?
प्रश्न 31: न्याय की भारतीय अवधारणा क्या है? पश्चिम से आयातित 'सोशल जस्टिस' (सामाजिक न्याय) की नई परिभाषा, जो समाज को जोड़ने के बजाय आपस में लड़ाती है, वह हमारे लिए क्यों खतरनाक है?
प्रश्न 32: 'पॉप कल्चर' (Pop Culture) और 'कैंसिल कल्चर' (Cancel Culture) क्या हैं? कैसे ये आधुनिक हथियार हमारी भाषा, पहनावे और सनातन संस्कृति को धीरे-धीरे नष्ट कर रहे हैं?
प्रश्न 33: राजनीति और समाजशास्त्र में ये जो राइट, लेफ्ट, सेंटर, सेकुलरिस्म, नेशनलिज्म, पूंजीवाद और समाजवाद जैसे शब्द हैं, ये समाज को हमेशा दो विरोधी हिस्सों (Binaries) में क्यों बांटते हैं? इसके मुख्य कारण क्या हैं?
प्रश्न 34: भारत में विचार, चिंतन, मंथन और विमर्श की जो पुरानी परंपरा है, वह पश्चिम की थोपी जाने वाली 'आइडियोलॉजी' (Ideology) से कितनी अलग है?
प्रश्न 35: आज के विमर्श में 'ब्राह्मण समाज' को ही क्यों निशाने पर लिया जाता है? हमारी सामाजिक व्यवस्था को तोड़ने के लिए 'ब्राह्मणवाद' और 'पितृसत्तात्मक' जैसे शब्द किसने और किस औपनिवेशिक षड़यंत्र के तहत स्थापित किए? क्या भारतीय समाज का इतिहास हमेशा केवल 'शोषक और शोषित' की कहानी रहा है?
प्रश्न 36: आसमान में बैठे 'गॉड' की सोच बनाम हमारे कण-कण में बसे 'ब्रह्म' की सोच में क्या अंतर है? इस 'ब्रह्म' शब्द से दुर्भावनापूर्वक 'ब्राह्मणवाद' शब्द का आविष्कार करके हिंदुओं में गृहयुद्ध कराने की साजिश कैसे रची गई?
प्रश्न 37: आज के समय में हमारे युवाओं के लिए शत्रु बोध, मित्र बोध और परिस्थिति बोध होना क्यों आवश्यक है? 'दर्शन' किसे कहते हैं?
प्रश्न 38: वर्ग संघर्ष और 'मानो या मरो' (Believer और Non-believer) की हिंसक थ्योरी पर आधारित मज़हब और आधुनिक विचार, सह-अस्तित्व पर आधारित हिंदू सभ्यता पर बार-बार हमले क्यों करते हैं? इस सभ्यतागत युद्ध (Civilizational War) से आप क्या समझते हैं?
प्रश्न 39,: हमारे विमर्श में विद्या व अविद्या किसे कहा गया हैं?
प्रश्न 40 : ब्रह्म की अवधारणा क्या हैं और यह किस प्रकार गॉड, अल्लाह से अलग हैं?
प्रश्न 41 : भगवान के छः गुण क्या हैं?
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