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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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#जन्मना श्रेष्ठता भारतीय कांसेप्ट नहीं है।
कैसे?
वस्तुत: श्रेष्ठता का कॉन्सेप्ट ही अभारतीय है।
यह कांसेप्ट है अब्राम्हमिक। नूह के श्राप से जुड़ा हुवा। आप पूछेंगे नूह कौन है। नूह है इस्लामिक चरित्र। और noah है बाइबल का चरित्र। पैगंबर। जिसने अपने एक बेटे को श्राप दिया था। गूगल कर लो curse of noah in bible.
उसी को भारतीय हिंदू समाज पर आरोपित करके जन्मना श्रेष्ठ होने की व्याख्या लूटेरों ने किया। और पढ़ा लिखा हिंदू उस औपनिवेशिक दासता से मुक्त नहीं हो पाया आज तक।
जन्मना तो कोई श्रेष्ठ हो नहीं सकता। कर्मणा ही होता है।
हमारे समस्त ऐतिहासिक ग्रंथ यही बात बताते हैं।
चाहे महाभारत हो या रामायण।
रावण जन्मना श्रेष्ठ कुल में पैदा हुवा था परंतु क्या वह श्रेष्ठ था?
नहीं न।
और हम मानते भी नहीं।
एक ही कुल में पांडव पैदा हुए और कौरव भी। तो क्या कौरव जन्मना श्रेष्ठ थे?
नहीं न।
परंतु वर्ण व्यवस्था में जन्मना तो ब्राम्हण के कुल में ब्राम्हण और क्षत्रिय के कुल में क्षत्रिय पैदा होगा ऐसा विज्ञान का मानना है। भले ही वह कर्मणा आर्य निकले या अनार्य?
शूद्रों का तो नहीं, वैश्यों का उदाहरण आज भी दिया जा सकता है कि वे पैदायशी सफल व्यापारी होते हैं अन्य वर्णों की तुलना में।
विज्ञान कहता है कि माता पिता के गुण सूत्र उसकी संतानों में ट्रांसफर होगा ही होगा।
कृष्ण भी यही कह रहे थे:
चातुश्वर्ण मया श्रृष्टि गुण कर्म विभागश:।।
यह बहुत आंदोलित करने वाला वक्तव्य है, परंतु मॉडर्न साइंस और वैदिक साइंस इसे सपोर्ट करता है।
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रिपोस्ट
© त्रिभुवन सिंह
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