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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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।।ॐ।।
** - १
-डॉ. नितिन सहारिया ,महाकौशल
यूं तो भूकंप की कहानी पृथ्वी के जन्म के साथ ही जुड़ी हुई है। जापानी साहित्य में वहां के प्राचीन सभ्यता में भूकंप देवता की पूजा उपासना का उल्लेख मिलता है। उस मान्यता के अनुसार मनुष्य के उच्चंखलतापूर्ण व्यवहार से कुपित होकर भूकंप देवता अपना ध्वंसात्म्क स्वरूप प्रकट करते हैं और मनुष्य सहित समूचे प्राणी समुदाय को दंडित करते हैं। विश्व के विभिन्न राष्ट्रों में भी इस संबंध में अलग-अलग तरह की मान्यताएं एवं धारणाएं प्रचलित हैं, लेकिन उनके वैज्ञानिक कारण उपलब्ध न होने से उन्हें प्रमाणित नहीं माना गया। प्रख्यात ग्रीक दार्शनिक अरस्तु का कहना है की प्रकृति के साथ जब कभी मनुष्य का व्यवहार असहनीय हो जाता है तो वह पृथ्वी के भीतर भरी वाष्प को बाहर निकाल कर दुर्बल स्थानों पर विस्फोट कर देती है ।
भूकंप के संदर्भ में गायत्री परिवार के प्रमुख *डॉ. प्रणव पंड्या जी* का कहना है कि-" *पृथ्वी पर जब बहुत अधिक मात्रा में जीव हत्या -गौ हत्या होती है, उससे तड़पते/ करुँण कृंद्न करते हुए जीव के शरीर से भयानक तरंगे निकलती हैं; जिससे पृथ्वी माता दु:खी होकर कंपन- दु:ख व्यक्त (भूकंप ) करती है।* " यह बात स्वभाविक भी लगती है ,जब-जब धरती पर पापाचार- अनाचार अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाता है तो पृथ्वी माता दु:खी होती है, इसका वर्णन पुराणों में भी आता है।
चीन की पौराणिक गाथाओं के अनुसार पृथ्वी भी मनुष्य की तरह सांस लेती है। मनुष्य की स्वास -प्रस्वास प्रक्रिया में व्यवधान पड़ने पर जिस प्रकार से उसका दम घुटने लगता है और प्राणों पर बन आती है, ठीक उसी तरह धरती की श्वसन प्रक्रिया में भी व्यतिक्रम उत्पन्न होने पर भूकंप आने लगते हैं। सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक चार्ल्स एफ. रिक्टर ने भूकंप मापी यंत्र की खोज इसी आधार पर की है, जिसे 'रिक्टर स्केल' के नाम से जाना जाता है। *पृथ्वी में प्रतिवर्ष 14 लाख कंपन होते हैं, पर उनमें से मात्र 6000 कंपनो को ही मापा जा सकता है।* अब इन कंपनो की संख्या में तीव्रता आती जा रही है और हर वर्ष आने वाले कुल भूकंपों की संख्या में अभिवृद्धि होती जा रही है। इनकी तीव्रता भी बढ़ रही है, जो जन-धन की असाधारण हानि का कारण बनती है।
पृथ्वी के निर्माण से अब तक करोड़ों भूकंप आए हैं। अगले दिनों सूर्य की सीध में नौ ग्रहों के एक ओर इकट्ठा हो जाने की घटना संभवत: अब तक के इतिहास में अपने ढंग की एकमात्र ऐसी घटना है जो अन्य सौर घटनाओं के साथ घट रही है, यथा - *पूर्ण सूर्यग्रहण ,सौर कलंकों की अभिवृद्धि का चरम वर्ष ,चंद्र ग्रहण, धूमकेतु का उदय आदि- आदि इन सब घटनाओं का प्रभाव पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को असामान्य रूप से प्रभावित करेगा। इसलिए ऐसे भूकंपों के आने की संभावना व्यक्त की जा रही है, जो अब तक कभी नहीं आए होंगे।*
आने वाले भूकंपों की विध्वंसकता का अनुमान लगाने के लिए अब तक आए उन भूकंपों का विवरण जान लेना उपयुक्त रहेगा, जिन्होने सर्वाधिक विनाश किया है और जहां भी आए हैं, वहां प्रलय का - सा दृस्य उपस्थित किया है। प्राकृतिक विपदाओं में यदि सबसे अधिक विनाशकारी और सर्वाधिक हानि पहुंचाने वाली विपत्ति यदि कोई है तो वह भूकंप ही है। किन्हीं भी प्राकृतिक विपत्तियां ने इतनी हानि नहीं पहुंचाई और न उतना विनाश किया जितना की भूकंपों के कारण हुआ है। भूकंप क्यों आते हैं ? उनके रोकथाम का क्या उपाय है? आदि बातें जानने के लिए वर्षों से प्रयास किये जा रहे हैं परंतु अभी तक भूकंप के किसी एक निश्चित कारण का पता नहीं चला है। जब कारण का ही पता नहीं चला है तो उनकी रोकथाम का तो प्रश्न ही नहीं उठता । अधिक से अधिक इतना संभव है कि भूकंप आने के कुछ क्षणों पहले पता चल जाए की धरती कांपने वाली है ,परंतु वह पता इतने थोड़े से समय पहले चल पाता है कि बचाव के लिए तथा जहां भूकंप आने वाला है वहां से जान माल हटाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए कोई समय नहीं मिल पाता । इस स्थिति में भूकंप की संभावना का पता लग जाना और नहीं लग जाना बराबर ही है।
*पृथ्वी पर कुछ क्षेत्र ऐसे हैं, जहां प्राय: भूकंप आते रहते हैं। इनमें जापान द्वीप समूह, चीन, एंडीज पर्वतमाला ,पूर्वी अनातोलिया तथा अमेरिका का पश्चिमी तट प्रमुख है।* वैसे भूकंप को किसी सीमा विशेष में बाँध पाना संभव नहीं है। वह कभी भी और कहीं भी आ सकता है। फिर भी उक्त क्षेत्र में भूकंप की संभावना और स्थानो की अपेक्षा अधिक रहती है।
पिछले दिनों महाराष्ट्र, नेपाल, गुजरात, बिहार, उत्तराखंड इत्यादि में आए भूकंप अब तक आए सभी भूकंपों का रिकॉर्ड तोड़ चुके हैं। उनकी विभिषिका का अनुमान लगाने के लिए अब तक आए भूकंपों की विवेचना को आधार बनाया जा सकता है। *एक अनुमान के अनुसार प्रतिवर्ष 15000 व्यक्ति भूकंपों के कारण मृत्यु का ग्रास बनते हैं।* धन संपत्ति की होने वाली छति का अनुमान लगाना तो लगभग असंभव है । सन 1960 में मोरक्को,ईरान तथा चिली में भूकंप के कारण 17000 लोग मर गए थे और करीब 5 अरब रूपयों की संपत्ति नष्ट हुई थी।
जुलाई ,1976 में चीन के तंगशान इलाके में आया भूकंप बीसबी शताब्दी का सबसे भयंकर भूकंप माना जाता है। उस भूकंप में अकेले तंगशान नगर में 8 लाख व्यक्ति मारे गए थे ;जबकि इस नगर की संख्या कुल 10 लाख है। किसी की आंखें फूट गई तो कोई इमारत के गिर जाने से गिरने वाले मलबे की चोट के कारण अपना चेहरा ही विकृत कर बैठा। प्रत्यक्ष दर्शन के अनुसार भूकंप आने के पूर्व इस क्षेत्र के ऊपर आकाश में एक तेज चौंधिया देने वाला प्रकाश फैल गया था। इस प्रकाश को लगभग 300 किलोमीटर दूर रहने वाले उन लोगों ने भी देखा, जहां भूकंप नहीं आया था। कुछ सेकंड़ो तक थरथर उठी धरती के कारण होने वाला धमाका इतना जोर का था कि कई एकड़ क्षेत्र में लगी हुई फसल अपनी सतह के साथ उखाड़कर इस प्रकार दूर जागीरी जैसे किसी ने दूध पर से मलाई उतार कर दूसरे बर्तन में बिछा दी हो। तांगशान नगर इस भूकंप का केंद्र था और वहां के नगर के बीचों -बीच की जमीन फट गई तथा बहुत चौड़ी और कई किलोमीटर लंबी दरार बन गई । इस दरार में लाखों मनुष्य, मकान, इमारतें ,सड़के और सड़कों पर चलते हुये लोग समा गए। भूकंप के धक्के से राह चलते, बैठे और सोए तथा लेते हुए लोग भी कई मीटर ऊंचे उड़ गए। इस स्थिति में पेड़ों का उखड़ कर दूर जाकर गिरना तो स्वाभाविक था। रेल की पटरिया और जमीन के भीतर लगाए गए पाइप भी इस प्रकार मुड- तुड़ गए जैसे किसी ने धागे को गुडीमुड़ी करके लपेट दिया हो।
सितंबर, 1923 में जापान के टोक्यो याकोहामा क्षेत्र में भी ऐसा विनाशकारी भूकंप आया था कि पूरे क्षेत्र की जमीन एक दिशा में इस प्रकार झुक गई ,जैसे किसी ने तराश दिया हो। इस भूकंप में 5 लाख मकान गिर गए थे और करीब 12 लाख व्यक्ति मारे गए थे। निकटवर्ती सन्गामी खाड़ी में 10 मीटर चौड़ी दरार उत्पन्न हो गई तथा आबादी वाले क्षेत्रों में ऐसी भयंकर आग लगी कि उस क्षेत्र में तीन दिन तक मकान ,इमारतें और वृक्ष -वनस्पति धू-धू करके जलते रहे। इसके 3 वर्ष पहले चीन और तिब्बत की सीमा पर स्थित कन्सू क्षेत्र में भी ऐसा ही भूकंप आया था, जिसमें कुछ ही सेकंड़ो के भीतर लगभग 2 लाख व्यक्ति मारे गए। इसी क्षेत्र में दिसंबर, 1932 में आए भूकंप की विनाश लीला देखने वाले कई लोग तो अभी भी जीवित हैं, जिसमें करीब 70,000 व्यक्ति मारे गए थे।
क्रमशः .....
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