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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
नीब करौरी बाबा : प्रेम, सेवा और हनुमान कृपा की दिव्य गाथा | कैंची धाम से विश्व तक महाराज जी के चमत्कार
प्रस्तुतकर्ता
महेन्द्र सिंह भदौरिया
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नीब करौरी बाबा : प्रेम, सेवा और हनुमान कृपा की दिव्य गाथा | कैंची धाम से विश्व तक महाराज जी के चमत्कार
जब संसार के सभी सहारे टूट जाते हैं, जब मनुष्य दुःख, भय, निराशा और अकेलेपन में डूब जाता है, तब कहीं न कहीं ईश्वर किसी करुणामयी शक्ति के रूप में अपने भक्तों का हाथ थाम लेते हैं, सनातन धर्म की पवित्र भूमि भारत में ऐसे अनेक संत हुए जिन्होंने मानवता को प्रेम और भक्ति का मार्ग दिखाया, लेकिन कलियुग में करोड़ों हृदयों के लिए जो नाम स्वयं आस्था, करुणा और चमत्कार का पर्याय बन गया, वह नाम है
परम पूज्य गुरुदेव श्री नीब करोरी महाराज जी
महाराज जी केवल एक संत नहीं थे, वे प्रेम की जीवित मूर्ति थे। साधारण कंबल ओढ़े, मुख पर दिव्य तेज, होंठों पर “राम-राम” और हृदय में सम्पूर्ण सृष्टि के लिए अथाह करुणा लिए वे जहाँ भी गए, वहाँ सूखे हृदयों में भक्ति की गंगा बहने लगी,कोई उनके पास धन माँगने नहीं आता था, लोग उनके पास शांति माँगने आते थे… और लौटते समय उन्हें केवल शांति ही नहीं, बल्कि जीवन जीने का नया प्रकाश मिल जाता था
“गुरु कृपा जहाँ बरसती है, वहाँ असंभव भी संभव हो जाता है…” यह केवल एक पंक्ति नहीं, बल्कि लाखों भक्तों का जीवन अनुभव है,कितने ही लोग ऐसे थे जिनके जीवन में चारों ओर अंधकार था, लेकिन जैसे ही उन्होंने बाबा को पुकारा, सब बदलने लगा,किसी को असाध्य रोग से मुक्ति मिली, किसी का टूटा परिवार जुड़ गया, किसी को जीवन का उद्देश्य मिला और किसी को भीतर बैठे ईश्वर का अनुभव हुआ, भक्त कहते हैं कि महाराज जी केवल शरीर नहीं थे, वे स्वयं हनुमान जी की कृपा का दिव्य माध्यम थे
उत्तराखण्ड की पावन वादियों में स्थित आज भी करोड़ों भक्तों की आस्था का धड़कता हुआ हृदय है, वहाँ पहुँचते ही मन स्वयं शांत होने लगता है, जैसे कोई अदृश्य शक्ति भीतर के दुःख को अपने भीतर समेट रही हो,बाबा ने इस धाम को केवल आश्रम नहीं बनाया, बल्कि प्रेम, सेवा और भक्ति का जीवित तीर्थ बना दिया वहाँ आने वाला हर व्यक्ति अनुभव करता है कि “जो बाबा के दर पर झुक गया, उसका जीवन राममय हो गया…”
महाराज जी कहते थे — “बस राम जपो…” उनके लिए भक्ति का सबसे सरल मार्ग था भगवान का नाम,वे कहते थे कि इस कलियुग में यदि कोई सच्चे मन से “राम” का स्मरण करे, तो उसका जीवन बदल सकता है, बाबा के पास आने वाले लोगों को बड़े-बड़े कठिन मंत्र नहीं दिए जाते थे,वे केवल कहते — “राम कहो… सब ठीक हो जाएगा…” और सचमुच लाखों लोगों ने अनुभव किया कि जहाँ संसार के उपाय समाप्त हो जाते हैं, वहाँ से बाबा की कृपा प्रारम्भ होती है
काकड़ी घाट में आज भी हनुमान भक्ति की वह दिव्य ऊर्जा अनुभव होती है जिसे शब्दों में बाँधना कठिन है, महाराज जी का हनुमान जी के प्रति प्रेम अलौकिक था, वे हर कार्य का श्रेय हनुमान जी को देते थे,जब कोई उनके चमत्कारों की चर्चा करता, तो वे मुस्कुराकर केवल इतना कहते — “सब हनुमान जी कर रहे हैं…” यही उनकी विनम्रता थी, यही उनकी महानता थी
हनुमान गढ़ी की शांत वादियाँ आज भी साधकों के लिए आध्यात्मिक चेतना का केंद्र मानी जाती हैं ,भक्त बताते हैं कि वहाँ बैठकर ध्यान करने से भीतर स्वतः “राम-राम” की ध्वनि गूंजने लगती है, ऐसा लगता है मानो स्वयं महाराज जी अदृश्य रूप से अपने भक्तों को आशीर्वाद दे रहे हों, आज भी अनगिनत लोगों ने अनुभव किया है कि कठिन समय में अचानक कोई अदृश्य शक्ति उनकी रक्षा कर रही है, मार्ग दिखा रही है, संकट टाल रही है, भक्त इसे बाबा की कृपा मानते हैं
“प्रेम ही बाबा का धर्म था, सेवा ही उनकी साधना थी…” महाराज जी ने धर्म को केवल मंदिरों और ग्रंथों तक सीमित नहीं रखा, उन्होंने भूखे को भोजन देकर धर्म सिखाया, रोते हुए को गले लगाकर अध्यात्म सिखाया और हर जीव में भगवान को देखकर सनातन का वास्तविक स्वरूप समझाया, उनका संदेश अत्यंत सरल था — “सबसे प्रेम करो, सबको भोजन दो, सबकी सेवा करो…” यही सच्चा धर्म है, यही सच्ची भक्ति है
“जहाँ भूखे को भोजन मिलता है, वहीं महाराज जी का सच्चा आश्रम बसता है…” यही कारण है कि आज भी उनके भक्त सेवा को सबसे बड़ी साधना मानते हैं, कोई गरीबों को भोजन करा रहा है, कोई गौसेवा कर रहा है, कोई घायल पशुओं की रक्षा कर रहा है, कोई दुखी लोगों को सहारा दे रहा है, भक्त जानते हैं कि सेवा केवल दान नहीं, बल्कि ईश्वर तक पहुँचने का सबसे पवित्र मार्ग है। जब किसी रोते हुए चेहरे पर मुस्कान आती है, तब कहीं न कहीं बाबा मुस्कुरा रहे होते हैं
महाराज जी ने कभी स्वयं को चमत्कारी सिद्ध करने का प्रयास नहीं किया “बाबा चमत्कार से नहीं, अपने निष्काम प्रेम से हृदय जीतते हैं…” उनका प्रेम किसी सीमा में बंधा नहीं था ,उनके लिए हर जीव भगवान का अंश था, “हर दुखी में राम को देखना ही, महाराज जी की सच्ची भक्ति है…” यही उनका जीवन दर्शन था
आज भी वृंदावन स्थित समाधि मंदिर पर करोड़ों भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र स्थान है,यही वह भूमि है जहाँ महाराज जी ने अपने नश्वर शरीर का त्याग कर सूक्ष्म रूप में प्रवेश किया, भक्त मानते हैं कि बाबा शरीर से भले अदृश्य हो गए हों, लेकिन उनकी कृपा आज भी उतनी ही जीवित है आज भी वहाँ पहुँचने वाले अनगिनत भक्तों की आँखें नम हो जाती हैं, क्योंकि उन्हें अनुभव होता है कि बाबा कहीं गए नहीं… वे आज भी अपने भक्तों के साथ हैं
समय बदल रहा है, संसार बदल रहा है, लेकिन बाबा का प्रेम आज भी उतना ही जीवित है, आज भी कोई सच्चे मन से “राम” का नाम लेकर महाराज जी को पुकारे, तो भीतर कहीं न कहीं आशा की लौ जल उठती है, यही कारण है कि केवल एक नाम नहीं, बल्कि करोड़ों भक्तों की साँसों में बसने वाली अनुभूति बन चुके हैं, क्योंकि बाबा आज भी वहीं हैं… जहाँ प्रेम है, जहाँ सेवा है, जहाँ करुणा है, जहाँ किसी भूखे को भोजन मिल रहा है, जहाँ किसी टूटे हुए हृदय को सहारा मिल रहा है… वहीं महाराज जी का सच्चा धाम बसता है
महाराज जी की कृपा आप सभी गुरु भाई बहनों पर भक्तों पर बनी रहे
आपका गुरुभाई
महेंद्र सिंह भदौरिया (महादेव दास)
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