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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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✍️कैलाश चन्द्र
👉कुछ लोग आज भी इस भ्रम में जी रहे हैं कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सत्ता-यात्रा चुनाव आयोग द्वारा सजाई हुई थाली में परोसी गई थी। उनके अनुसार ईवीएम, केंद्रीय बल या दिल्ली का दखल ही भाजपा की विजय का आधार रहा। किंतु यह दावा न केवल सतही है, बल्कि बंगाल की वास्तविकता से कोसों दूर भी।
दरअसल, बंगाल का कमल बैलेट से पहले खून से सींचा गया था। इस राज्य में भाजपा की वृद्धि किसी राजनीतिक चाल या प्रशासनिक सहूलियत का परिणाम नहीं, बल्कि हिंसा, प्रताड़ना और अदम्य मनोबल के वर्षोँ तक चले संघर्ष का प्रस्फुटन है।
💥सैकड़ों लाशें, हजारों उजड़े घर — संघर्ष का भूगोल
2011 से 2025 के बीच बंगाल की धरती पर भाजपा के सैकड़ों कार्यकर्ता मारे गए। कहीं बम से उड़ाए गए, कहीं पेड़ से लटका दिए गए, कहीं नदी में तैरती लाशें मिलीं।
हजारों घरों को आग के हवाले किया गया। नंदीग्राम, बीरभूम, कूचबिहार, बशीरहाट—कौन-सा इलाका ऐसा था जहाँ चुनाव के बाद “बदले” के नाम पर गाँव खाली न करवाए गए हों? तमाम परिवार सिर्फ इसलिए उजड़ गए क्योंकि उन्होंने भाजपा को वोट देने का साहस किया था।
महिला मोर्चा तक को नहीं बख्शा गया। बलात्कार को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया, ताकि भय का स्थायी वातावरण बने। 2021 की चुनाव-उत्तर हिंसा की भयावहता इतनी थी कि हाईकोर्ट को CBI जांच का आदेश देना पड़ा।
💥मगर मनोबल नहीं टूटा—यही बंगाल की भाजपा की असली शक्ति है
इस संघर्ष को समझने के लिए एक दृश्य पर्याप्त है— सुबह बूथ अध्यक्ष की लाश पेड़ से लटकी मिले, और उसी शाम उसका बेटा उसी बूथ पर एजेंट बनकर बैठ जाए।
या वह महिला जिसे हिंसा में घर खोना पड़ा, और अगले ही चुनाव में वही झंडा लेकर गली-गली घूमती दिखे।
यह मनोबल किसी मशीन से नहीं आता। यह साहस चुनाव आयोग नहीं देता। यह संकल्प वर्षों से स्थापित उस भय-आतंक को चुनौती देता है जिसने पहले 34 वर्ष वाम शासन और फिर 15 वर्ष TMC शासन के दौरान बंगाल को एक अदृश्य सलाखों के भीतर कैद कर रखा था। मुकदमे, जेल, सामाजिक बहिष्कार, रोज़गार छिनना—भाजपा कार्यकर्ताओं ने यह सब झेला, लेकिन संघर्ष की लौ को बुझने नहीं दिया।
💥पंद्रह वर्षों की यात्रा — राजनीतिक ग्राफ का मौन गवाह
यह यात्रा संयोग की नहीं, निरंतर तप की यात्रा है—
2011: 1 विधायक
2016: 3 विधायक
2019 लोकसभा: 18 सांसद — जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा
2021 विधानसभा: 77 विधायक — मुख्य विपक्ष
2024 लोकसभा: 12 सीटें
2026 विधानसभा: सत्ता
यह आँकड़े केवल चुनावी परिणाम नहीं, बल्कि उन माँओं के आँसू और संकल्प का प्रमाण हैं जिन्होंने बेटों की तेरहवीं पर लड़ाई जारी रखने की कसम खाई। यह उन बस्तियों का धैर्य है जो एक दशक तक राहत शिविरों में रहीं, पर पीछे नहीं हटीं।
💥इसलिए गलतफहमियों का अंत होना चाहिए
जब कोई कहता है कि “चुनाव आयोग ने भाजपा को जिता दिया”, तो यह कथन उन सभी शहीद कार्यकर्ताओं का अपमान बन जाता है जो पार्टी का झंडा ओढ़कर इस धरती में सो गए।
💥 उन जले हुए घरों की राख अब भी गवाही देती है।
उन महिलाओं की आँखों में आज भी संघर्ष की आग दिखती है जिन्होंने सबकुछ खोकर भी संगठन नहीं छोड़ा।
पश्चिम बंगाल में सत्ता किसी मशीन का परिणाम नहीं थी।
💥 यहाँ एक-एक वोट के पीछे एक-एक कुर्बानी दर्ज है।
पंद्रह वर्षों तक खून-पसीना बहाने, हिंसा की यातना सहने, और लोकतंत्र के अधिकार को बचाए रखने की अदम्य जिद के बाद यह कमल खिला है।
🌹यह विजय दिल्ली से नहीं; बंगाल की गलियों, गाँवों और बलिदानों से निकली है। इसलिए इसे यदि कोई “गिफ्ट” कह दे, तो यह उन अमर कार्यकर्ताओं के बलिदान का अनादर होगा जिन्होंने लोकतंत्र की रक्षा अपने प्राण देकर की।🌹🙏
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