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मध्यप्रदेश गेहूं खरीदी 2026 : सरकार द्वारा गेहूं खरीदी में तिथि बढ़ाना घोर लापरवाही





मध्यप्रदेश में इस वर्ष किसान कल्याण वर्ष मनाया जा रहा है वहीं यह कितनी बड़ी विडंबना है कि अधिकांश किसानों का गेहूं करीब 15 दिन से सहकारी समितियों में बेचने के लिए तैयार है। भंडारण की समस्या के कारण अधिकांश किसान लंबे समय तक उपज को अपने पास रखने में सक्षम नहीं है। वहीं मध्यप्रदेश के बहुत से क्षेत्रों में मौसम किसानों को निरंतर परेशान कर रहा है। मध्यप्रदेश में सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए 19 लाख चार हजार किसानों ने पंजीयन कराया है। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में किसान खरीदी में देरी पर मजबूर है कि वह अपनी उपज मंडीयों में कम दाम में बेच रहा है। ऐसे में मंडी व्यापारियों व सरकार के बीच किसी तरह की साठगांठ की बू आती है ! आत्मनिर्भर भारत व विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर हम क्या अपने अन्नदाता को सक्षम बनाने के लिए बारदान की उचित व पर्याप्त मात्रा में सही समय पर व्यवस्था नहीं कर सकते ? सरकार व प्रशासन में जिम्मेदार बैठे अधिकारी इसके लिए कब जवाबदेह होगे। एक तरफ सरकार गेहूं खरीदी की तिथि बढ़ा रही है और वहीं सहकारिता कृषि ऋण की अंतिम तिथि 28 मार्च के समय को आगे नहीं बढ़ाती है! यह दोहरा चरित्र आखिर क्यों ? समय पर गेहूं खरीदी नहीं होने से किसानों को जो भारी नुकसान हो रहा है क्या उसके लिए जनप्रतिनिधि(विधायक-सांसदों, मंत्री) व प्रशासनिक अधिकारियों का वेतन काटकर इसकी क्षतिपूर्ति नहीं किया जाना चाहिए ? वहीं यदि जिस तरह से किसानों की उपज खरीदी में लापरवाही हुई है उसके लिए जिम्मेदार कृषि अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों व मंत्रियों का अप्रैल माह के वेतन में से इस लापरवाही पर क्षतिपूर्ति स्वरूप कुछ राशि काटकर अगले माह 10 मई बाद इन्हें वेतन मिलें ? तब ही अन्नदाता के साथ न्याय होगा। 

भूपेन्द्र भारतीय
सोनकच्छ,
मोब. 9926476410

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