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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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-डॉ. नितिन सहारिया, महाकौशल
भविष्य में विविध रूप में होने वाली वैश्विक क्रांति के विषय में अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख *डॉ. प्रणव पंड्या जी* अपने ग्रंथ ' *क्रांति की करवट'* के पृस्ठ 36 - 39 ,शीर्षक " *होने जा रही है पारिवारिक क्रांति"* में लिखते हैं कि-
" परिवारों के टूटने- दरकने का दर्द व्यापक हो चला है। इसी दर्द की अनुभूति को लेकर *समाजशास्त्री 'ब्लूम कार्टर' ने दुनिया के 140 से भी अधिक देशों की यात्रा की।* वह अलग-अलग महाद्वीपों के भिन्न-भिन्न देश में गए। जहां उन्होंने परिवारों की स्थिति देखी उनके टूटने विघटित होने से जो पीड़ा पनपी है, उसे उन्होंने गहराई से महसूस किया। रिश्ते किस तरह बदले हैं, सहयोग- सहकार की कैसे उपेक्षा हुई है। लाचार बूढ़ों की लाचारी और बढी है। दूध मुहे बच्चे मां की गोद से अलग दिनभर किसी क्रेच में पड़े रहते हैं। संवेदना और सहचर्य के अभाव में मनोरोगों की बाढ़ सी आ गई है। हर कोई बच्चा हो या बूढ़ा, किशोर हो या नौजवान प्यार के लिए तरस रहा है।
अपने अध्ययन एवं भ्रमण के इसी क्रम में ' *ब्लूम कार्टर* ' भारत पहुंचे। उन्होंने भारत देश के प्राकृतिक सौंदर्य, यहां की प्राचीन संस्कृति के बारे में बहुत पढ़ रखा था। हालांकि वह यहां की वर्तमान स्थिति से भी सुपरचित थे। उन्हें यह अच्छी तरह से पता था कि *पश्चिमी रंग में काफी कुछ रंग जाने के कारण भारत की स्थिति भी बदली और बिगड़ी है।* *आधुनिक जीवन शैली एवं पारिवारिक भावना की कमी होने के कारण आत्महत्या की दर बढ़ी है।* तलाक के आंकड़े साल दर साल बढ़ते जा रहे हैं, फिर भी उन्हें लग रहा था कि गंगा की शीतल जलधार जहां प्रभावित होती है, जहां हिमालय अपनी छान्व बनाए हुए हैं। जिस देश में वेद व उपनिषदों का चिंतन जन्मा है, वहां इस युग में भी उन्हें कुछ सार्थक मिल पाने की उम्मीद थी।
अपनी इसी यात्रा में वह जा पहुंचे *अमृतसर। वहां एक परिवार ऐसा भी है जहां छोटे-बड़े मिलाकर 108 लोग रहते हैं । यहां आज भी बच्चों पर प्यार बरसता है और बुजुर्गों को भरपूर सम्मान मिलता है।* किसी भी परिवार की हसरत होती है कि उनके घर का कोई सदस्य डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, बिल्डर, बड़ा बिजनेसमैन, पुलिस अधिकारी ,टीचर, कंप्यूटर ,इंजीनियर बने लेकिन प्राय: ऐसा संभव हो पाना कठिन हो जाता है। लेकिन प्यार व स्वीकार के सूत्र में बंधे भाटिया परिवार की खुश किस्मती है कि जिनके सदस्यों में कई ऊपर लिखे विभागों में काम कर रहे हैं या रिटायर हो चुके हैं अपनी सफलता के बारे में इस परिवार के सदस्यों का कहना है , जिस घर- परिवार के सदस्यों में भरपूर प्यार होता है, उन पर भगवान का प्यार भी भरपूर बरसता है।
इसी परिवार के मुखिया सुदर्शन कुमार भाटिया की उम्र 83 साल है। वह पहले डाकघर में बड़े अधिकारी थे। परिवार के सदस्य अजय भाटिया व विनोद भाटिया बैंक मैनेजर है। प्रदीप भाटिया एवं नवदीप भाटिया डॉक्टर हैं। इसी के साथ परिवार में वकील, कंप्यूटर इंजीनियर, बिजनेसमैन ,टीचर व पुलिस अधिकारी भी है। महिलाएं भी टीचर, बैंक कर्मचारी, डॉक्टर होने के साथ कई प्राइवेट कंपनियों में ऊंची ओहदे पर हैं। परिवार के बच्चे या तो उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं अथवा आई . ए. एस. की तैयारी कर रहे हैं । पूरा परिवार शिक्षा एवं सफलता की मिसाल है।
घर में बच्चे का जन्मदिन हो या शादी परिवार का हर सदस्य अपने-अपने स्तर पर पूरा योगदान देता है । परिवार की तरफ से हर एक दो महीने बाद सभी रिश्तेदारों के साथ 'गेट टू गेदर' करने के लिए डिनर पार्टी का आयोजन किया जाता है। सब लोग मिलजुल कर इसका खर्चा उठाते हैं। इस पार्टी में बेटियों के ससुराल वालों से लेकर बहू के मायके वालों के साथ-साथ दादी के मायके, ननिहाल और बेटों के ससुराल वालों को भी बुलाया जाता है। इस अवसर पर घर के सभी बुजुर्ग विशेष सम्मान के हकदार होते हैं। इस घर के लोगों का कहना है कि *पार्टी भोजन तो सब एक बहाना है इसी कारण सबके बीच सुख- दुख की बातें हो जाती हैं। आज के दौर में प्यार और सरकार से भरा पूरा यह परिवार स्वर्ग की भांति है, जहां आज भी पांच पीढ़ियां मिल-जुलकर रहती हैं।*
ब्लूम कार्टर जब इस परिवार के सदस्यों से मिले जो उन्हें गहरी आश्वस्ति मिली। *अपनी सोच पर उन्हें बल मिला कि इस दौर में परिवारों का पुनर्गठन करने वाली क्रांति के सभी सूत्र आसानी से भारत देश में खोजे जा सकते हैं।* अपनी इस अध्ययन यात्रा में वह *बेंगलुरु से 50 किलोमीटर दूर 115 एकड़ भूमि में बसे 'नवदर्शनम्ं' गए। यह लार्जर फैमिली की सफलता के लिए किया गया अनूठा प्रयोग है।* गांधी पीस फाउंडेशन एवं आई. आई. टी. दिल्ली के कुछ प्रयोग धर्मी लोगों ने मिलकर 1970 एवं 1980 के बीच इसकी शुरुआत की थी।
एक वृहद परिवार की प्रेरक शक्ति आध्यात्मिक महापुरुषों का जीवन दर्शन है। विज्ञान की कसौटी पर खड़ी उतरती भारतीय आध्यात्मिक विरासत इनकी संबल है। यह वृह्त परिवार इस धारणा पर आधारित है कि *आधुनिक स्वार्थपूर्ण- भोगवादी जीवन शैली व्यक्ति को परिवारिकता से दूर ले जा रही है। इससे व्यक्ति अपने से ,अपनों से, प्रकृति से, परमात्मा से दूर हुआ है। इसी की परिणिति है कि समाज में अपराध, हिंसा को बढ़ावा मिला है।*
इस परिवार के सदस्यों का कहना है, जिसे प्यार मिले ,जिसमें आध्यात्मिक जीवन दृष्टि हो ,वह व्यक्ति कभी गलत रास्ते नहीं चल सकता। यही वजह है कि परिवारिकता को संवर्धित करने के अनेक प्रयोग यहां किए जाते हैं। विज्ञान- अध्यात्म दर्शन, जीवन जीने की कला पर यहां सत्संग विचार मंथन चलता है। पारिवारिक जीवन में स्वावलंबन के साथ आत्म परिष्कार एवं आध्यात्मिक विकास के लिए कई मौलिक प्रयोग यहां होते हैं। यहां आने पर ब्लूम कार्टर ने यह निष्कर्ष निकाला की 'नवदर्शनम्ं ' की सकारात्मक ऊर्जा एवं प्रेरणा भोगवाद की आंधी में भटक रही आधुनिकता एवं बिखरती परिवार व्यवस्था के संदर्भ में खासा महत्व रखते हैं।
उनका कहना है कि इस विकट स्थिति में भी ये और ऐसे अन्य *कई पारिवारिक व्यवस्था में हो रही और होने वाली क्रांति के नवांकुर हैं। आज के परिवारों का दर्द ही कल की पारिवारिक जीवन क्रांति बनने जा रहा है।* इस क्रांति के सभी सूत्र भारत की उर्वरा सांस्कृतिक भूमि में पहले से ही मौजूद हैं। अपनी इस भारत यात्रा में ब्लूम कार्टर भारत के प्राय: सभी तीर्थ स्थानों में गए। उन्होंने यहां के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक व प्राकृतिक सौंदर्य के दर्शन किए । इसी यात्रा में स्ंयोग से उन्हें किसी ने युग निर्माण मिशन द्वारा प्रकाशित एक पुस्तक का यह अंश पढ़कर सुनाया - " *परिवार वह उद्यान है, यहां छोटे-बड़े, कटीले ,कोमल ,सुरभित, गन्धहीन सभी प्रकार के पुष्प- पौधे लगे होते हैं और उन सबकी समग्र सत्ता ही उद्यान को एक इकाई बनती है। इस उद्यान की शोभा- सुषमा इसी में है कि उसके सभी पौधे सुरक्षित रहें, उन्हें कोई काटे -उखाड़े नहीं।* इसे सुनकर उन्होंने कहा- *यह विचार पारिवारिक क्रांति का आधार है।* इस पर संचालित होने वाली व्यवस्था भविष्य में सुखमय पारिवारिक जीवन के साथ घर-परिवार की संचालिका जननी को नया जन्म- नया जीवन प्रदान कर सकती है। "
*" व्यक्ति और समाज की स्थिति उच्चस्तरीय बनाने का व्यवहारिक उपाय एक ही है कि परिवारों का पुनर्गठन किया जाए ।"*
- पं श्रीराम शर्मा आचार्य, वान्गड्मय ,खण्ड-४८ ,पृस्ठ-४.७०
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