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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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युद्ध भी कुछ ऐसे ही होते हैं। शुरू करना सरल होता है परन्तु उसे रोकना मुश्किल! इज़राइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए आक्रमण के पश्चात आज हम जैसे सामान्य व्यक्ति को दिखाई दे रहा है कि अमेरिका युद्ध रोकना चाह रहा है परन्तु ईरान इसके लिए सहमत नहीं है।
परन्तु इस सम्बंध में कोई संदेह नहीं है कि खाड़ी देशों में जबरदस्त तबाही हो रही है। ईरान पर जिस तादाद में मिसाइलें और बम बरसाए जा रहे हैं, निश्चित ही वहां बड़ी संख्या में लोग मारे जा रहे हैं। जान और माल दोनों की ही भयंकर हानि हो रही है। कम ज्यादा मात्रा में खाड़ी के अन्य देश भी प्रभावित हो रहे हैं। इज़राइल पर भी लगातार हमले जारी है और वहां भी नुकसान हो रहे हैं। युद्ध कभी किसी नेता के अहंकार या पागलपन की वजह से लड़े जाते हैं, कभी धर्मांधता की वजह से, कभी व्यापारिक हितों के लिए तो कभी वर्चस्व स्थापित करने के लिए। परिणाम जिसके भी पक्ष में निकले, आम जनता को इसकी भारी कीमत चुकानी ही पड़ती है। कभी जनता भी युद्ध को आवश्यक मान कर आगे रह कर अपने नेतृत्व का समर्थन करती है तो कभी उसे मजबूरन इस आग से गुजरना पड़ता है। युद्ध, विशेषतः लम्बे युद्धों के दौरान जनता को जो अपरिमित कष्ट सहने पड़ते हैं उनसे युद्ध इतिहास की पुस्तकें पटी पड़ी हैं। संपन्न देश भी दाने दाने को मोहताज हो जाते हैं। शहर मलबे का ढेर बन जाते हैं और सर्वत्र हाहाकार मचा रहता है, न कोई व्यवस्था न कोई भरोसा। क्या विद्यालय, क्या चिकित्सालय, क्या खाद्य सामग्री, क्या दवाइयां किसी की भी उपलब्धता निश्चित नहीं रहती। दोनों विश्वयुद्ध, वियतनाम युद्ध, ईरान - इराक युद्ध आदि ऐसे युद्ध रहे हैं जो कईं वर्ष चले हैं। सेनाएं तो सीमा पर लड़ती ही हैं, आम जनता को भी विकट संघर्ष का सामना करना पड़ता है।
भारत के सौभाग्य से स्वतंत्रता के बाद से अब तक कोई लम्बा युद्ध नहीं लड़ना पड़ा है। ईश्वर करे लड़ना भी न पड़े। 2014 के पूर्व तक तो युद्ध सदैव आत्मरक्षा में ही लड़े गए। परन्तु 2014 के पश्चात तीन बार हमने पाकिस्तान में घुस कर आक्रमण किए। तीनों ही बार सेना द्वारा जबरदस्त योजना बना कर सटीक प्रहार कर वांछित प्रणाम हासिल कर लिए गए। लक्ष स्पष्ट थे, पूर्वनिर्धारित थे, योजना निर्दोष थी और प्रभाव अपेक्षित रहे। तीनों हमलों में गतिविधि सीमा पर अत्यन्त छोटे क्षेत्र में रही। ऑपरेशन सिन्दूर के समय कार्यवाही और जवाबी कार्यवाही 6-7 दिन चले परन्तु शीर्ष नेतृत्व द्वारा, समर्थकों की भावना के विरुद्ध, सही समय पर कार्यवाही को रोक लिया गया। यह निर्णय अत्यन्त अहम था। इस वजह से दुश्मन की अधिकतम हानि कर हम पूरी तरह सुरक्षित रहे। न कोई सैनिक हताहत हुआ और न ही कोई आम आदमी।
कुछ हद तक इन सफलताओं ने हमारी जनता की अपेक्षाओं को बहुत बढ़ा दिया है। ऑपरेशन सिंदूर में ये संभावना बताई गई कि संभवतः कोई युद्धक विमान नष्ट हुआ हो। उस पर भी राजनीति होने लगी, सोशल मीडिया पर तंज कसे जाने लगे। अभी खाड़ी संकट के चलते गैस आपूर्ति में थोड़ी बहुत समस्या आ रही है। उसके चलते विपक्ष सड़क पर आ गया और समर्थक भी सरकार को गरिया रहे हैं। आज डीजल पेट्रोल की कीमतें स्थिर हैं। कल बढ़ेंगी। फिर मोदी को गाली।
भाई युद्ध काल है। कष्ट उठाने पड़ेंगे। यदि सीमा पर गतिविधि बढ़ी तो जानें भी जाएंगी। ये जो “युद्ध लड़ो और जीतो भी पर मेरा बाल भी बांका नहीं होना चाहिए” वाली जो प्रवृत्ति है उस पर काबू पाना होगा। अब तक नेतृत्व की सूझ बूझ से आप बहुत आरामदायक स्थिति में हैं। और जिस नेतृत्व की वजह से सुरक्षित और चैन की स्थिति में हैं उसे ही गारिया रहे हैं। लेकिन यदि वैश्विक परिस्थितियां बिगड़ती रही तो नेतृत्व भी क्या ही कर पाएगा! जब परिस्थितियां नियंत्रण के बाहर होगी तब नेतृत्व को कोसने का भी समय नहीं मिलेगा। आज अमेरिका में पेट्रोल $2.5 से बढ़ कर $4 हो चुका है। तमाम वस्तुओं के दाम बढ़े हुए हैं। दुबई, मस्कट, आबुधाबी जैसे शहरों में हड़कंप मचा हुआ है। ईरान तो मलबे का ढेर बन हुआ है। परन्तु वहां की जनता आज भी अपने नेतृत्व के साथ खड़ी है। जब खाने पीने के लाले पड़े हो तब भी!
हमारी जनता चाहती है पाकिस्तान को ध्वस्त कर दिया जाय, बांग्लादेश को निपटा दिया जाय, POK पर कब्जा हो जाए……पर ये सब होने के दौरान मेरे जीवन पर कोई आंच न आए! थोड़ा इतिहास पढ़िए। जब राष्ट्र युद्ध लड़ते हैं तो जनता को भारी कीमत चुकानी पड़ती है। उसकी तैयारी रखनी पड़ती है। द्वितीय विश्व युद्ध में जब इंग्लैंड की सत्ता के सूत्र विंस्टन चर्चिल को सौंपे गए थे तब उन्होंने अपने पहले ही भाषण में बड़े सपाट शब्दों में इंग्लैंड की जनता को आगाह कर दिया था “ I have nothing to offer but blood, toil, tears and sweat” (मैं आपको सिर्फ खून, परिश्रम, अश्रु और पसीना ही दे सकता हूं”)।
आज आप जिस स्थिति में है उसके लिए नेतृत्व को धन्यवाद दीजिए और ये प्रार्थना करिए कि स्थितियां और न बिगड़े। धैर्य रखें और समझदारी का परिचय दें।
श्रीरंग वासुदेव पेंढारकर
19/03/2026
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