सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

भारत के शिया लोगों की लॉयल्टी : अब एक पुरानी कहानी सुनाता हूं। – कालखंड था पानीपत का तीसरा युद्ध, 1761.

अब एक पुरानी कहानी सुनाता हूं। – कालखंड था #पानीपत का तीसरा युद्ध, 1761.

लखनऊ का नवाब शुजा-उद-दौला, जो शिया था, दिल्ली सल्तनत, रोहिल्ला, पठानों (जो सुन्नी थे) से बचने के लिए मराठों के साथ संधि करके उन्हें #चौथ (टैक्स दिया करता था। मराठा सेना मजबूत थी, दिल्ली पर उनका दबदबा था। मुगल बादशाह #पेशवा_नाना_साहब का प्यादा था और पुणे को टैक्स भी देता था। लेकिन मुगल सुल्तान का सहयोगी रोहिल्ला नजीबुद्दौला और कुछ राजपूत राजा अहमद शाह अब्दाली को दिल्ली जीतने के लिए न्योता भेजे और एक संयुक्त फ्रंट बना कर हिंदवी स्वराज की सेना से लड़ने को पानीपत के खड़े हो गए.

अवध के #शिया नवाब शुजा ने आखिरी घड़ी में हिंदवी स्वराज की सेना से गद्दारी कर दी। 

क्यों? 

क्योंकि नजीबुद्दौला और अहमद शाह अब्दाली के मंत्रियों ने शुजा को भड़काया – कहा, "मुस्लिम भाईचारा पहले", मराठों का साथ दोगे तो हिंदू राज आएगा!" और अब्दाली का साथ दोगे, तो "इल्जाम की सत्ता" जीतेगी। 

शुजा ने सोचा, "हाँ यार, सही है!" और पलटी मारकर #गद्दारी कर दी। विचार कीजिय हजार वर्षों से कुत्ते बिल्लियों की तरह लड़ने वाले "शिया और सुन्नी" उम्मम्मा के नाम पर एक #परचम के तले आ कर लड़े और अब्दाली के साथ मिलकर मराठों पर हमला किया। 

एक ही दिन में एक लाख हिंदू सैनिक मारे गए,। दिल्ली जल गई। लाखों करोड़ों की संपत्ति लुट गई। स्त्रियां और बच्चे गुलाम बनकर बेचे गए। लगभग पूरा #हिंदू_नेतृत्व इस युद्ध मे बलिदान हो गया। 

परिणामस्वरूप #हिंदवी_स्वराज का विजयरथ रुक गया. इस युद्ध के बाद देश में हिंदुओं का शासन इतना कमजोर हो गया कि अगले पचास वर्षों में ही अंग्रेज धीरे धीरे देश के शासक बन गए। 

शुजाउद्दौला और कुछ राजपूत राजाओं की गद्दारी से पूरा देश बर्बाद हो गया था!

इस घटना के 100 साल पहले बंगाल में भी यही स्टाइल और यही स्थिति थी !!

मुर्शिद कुली खान – इसका जन्म तो हिंदू परिवार में हुआ था लेकिन बचपन में ही इब्राहिम खान नाम के मुगल अफसर ने उसे अपहरण करके मुसलमान कन्वर्ट किया। फिर मुर्शीद शिया बन गया,कालान्तर में यह बंगाल का #नवाब बन गया। 

उसने हिंदुओं पर इतना दमन किया कि बड़ी संख्या में लोग डर के मारे धर्म बदलने लगे। हजारों मंदिर तोड़वाए, जमीन छीन ली, टैक्स इतना लगाया कि जो हिंदू टैक्स ना दे पाएं, उन्हें कन्वर्ट या सजा मिलती थी। प्रतिकार करने पर मौत..

कोई हिंदू बैलगाड़ी या घोड़ागाड़ी में बैठकर बाजार भी नहीं जा पाते थे। 

मुर्शीद कुलीखां कहता था, "इस्लाम में आ जाओ, वरना जेल या मौत!"

 लड़कियों-बच्चों को उठाकर जबरदस्ती कन्वर्ट करवाता। ऐसा ही। एक दुष्ट अलीवर्दी खान था। उसने भी वही किया – शिया राज में हिंदू दबे रहे।

और ये पैटर्न हर जगह एक जैसा था – चाहे लखनऊ हो, हैदराबाद हो या कश्मीर। अवध के नवाब इमामबाड़े बनवाते, मुहर्रम मनाते, ईरान से उलेमा बुलाते। हैदराबाद में कुतुब शाही टाइम से शिया कल्चर। कश्मीर में भी यही – हिंदुओं पर टैक्स, जमीन छीनना, जबरन धर्म बदलवाना। जैसे कोई गुलामी का खेल चल रहा हो। 

सब जगह एक ही तरीका: शिया राज, हिंदू दबाव, और ईरान जैसा कल्चर लाने की कोशिश।

अब ये भी सुनो – अवध के नवाबों ने ईरान और इराक के शिया मजारों, मौलानाओं को सतत पैसा भेजते थे। अंग्रेजों की मदद से! 1820s में लखनऊ का नवाब गाजी-उद-दीन हैदर ने अपनी नवाबी कायम रखने के लिए ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपन ये को बड़ा लोन दिया था। 

ब्रिटिश ने ब्याज वापस नहीं दिया – बल्कि उस ब्याज से हर साल करोड़ों (आज के हिसाब से) नजफ और करबला भेजे गए। 

ये पैसा कहां खर्च होता होगा - जी सही समझा ! दिन की सेवा में। शिया उलेमा को सैलरी, गरीबों को मदद, मजारों की देखभाल में। ये "अवध बेक्वेस्ट" कहलाया। मतलब, ब्रिटिश को खुश रखो, सत्ता बनी रहे। जनता का खून चूसो और फिर पैसा बाहर ईरान में दीन की सेवा में भेजो – दुनिया में शिया_भाईचारा मजबूत करने के लिए !

तो आज भी वही पुराना खेल – ईरान में शियाओं का कुछ नुकसान हो, भारत में मातम मनना आरम्भ हो जाता है! ईरान में खामेनी की मौत के बाद भारत में लखनऊ, कश्मीर, हैदराबाद, कर्नाटक – हर जगह शिया लोग सड़कों पर उतर आए। मातम मनाया, फुट फूट कर रोये, प्रदर्शन किए। 

नारे भी सुनने को मिला - "तुम कितने खामनेई मारोगे; हर घर से ख़ामनेई निकलेगा" !!

अरे भाई !! ईरान पर भारत ने तो हमला किया नहीं, फिर इतना दर्द क्यों? अपने घर से ख़ामनेई निकलोगे, तो बोलना शांति से निकले नहीं तो योगी बाबा का #बुलडोजर तैयार खड़ा है। 

वैसे आपको ये जानना आवश्यक है - हमारे देश में शिया कम्युनिटी दुनिया में नंबर 2 पर है! ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड और विकिशिया जैसे सोर्स बताते हैं कि भारत में 7-8 करोड़ शिया हैं – कुल मुसलमानों का 25-30% या उससे ज्यादा। इसलिए सबसे अधिक ओवैसी दुखी है।

अंत में हम तो सदैव यही कहेंगे :

धर्म की जय हो 🚩 
अधर्म का नाश हो ⚔️
प्राणियों में सद्भावना हो 🧡
संपूर्ण विश्व का कल्याण हो 🤗

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