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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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।। ॐ।।
भाग-८
डॉ. नितिन सहारिया ,महाकौशल
युग परिवर्तन एवं भारत व विश्व की भवितव्यता के बारे में अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख *डॉ. प्रणव पंड्या* अपने ग्रंथ ' *क्रांति की करवट'* में पृष्ठ क्र.9 पर लेख - "महेश्वर महाकाल स्वयं है नियंता" में लिखते हैं कि-
" नया युग तेजी से बढ़ता चला आ रहा है। उसे कोई रोक न सकेगा । प्राचीन काल की महान परंपराओं को अब पुनः प्रतिष्ठित किया जाना है और मध्यकालीन दुष्ट विषमताओं का तिरोधान होना है। महाकाल उसके लिए आवश्यक व्यवस्था बना रहे हैं और तदनुकूल आधार उत्पन्न कर रहे हैं। युग का परिवर्तन आवश्यम्भावी है। हमारा छोटा सा जीवन इसी की घोषणा करने -सूचना देने के लिए है।"
- परम पूज्य गुरुदेव : पं. श्रीराम शर्मा आचार्य वान्ग्ड़मय 29,
( सूक्ष्मीकरण एवं उज्जवल भविष्य का अवतरण, पृष्ठ 1.68 )
युग परिवर्तन की चर्चा चलने पर परम पूज्य गुरुदेव ने कहा- " कि युग क्रांति एवं युग परिवर्तन का संकल्प तो भगवान महाकाल का है। मैंने तो केवल इसकी जानकारी देने एवं इससे संबंधित व्यवस्था जुटाने का काम किया है। "
( पूर्ववत, पृष्ठ -13 )
" अभी भारत में हिंदू धर्म में धर्म मंच से, 'युग निर्माण मिशन' का यह मानव जाति का भाग्य निर्माण करने वाला अभियान केंद्रित दिखाई पड़ता है। पर अगले दिनों उसकी वर्तमान सीमाएं अत्यंत विस्तृत होकर असीम हो जाएंगी। तब किसी संस्था- संगठन का नियंत्रण निर्देश नहीं चलेगा, वरन कोटि-कोटि घटकों से विभिन्न स्तर पर ऐसे ज्योति पुंज फूटते दिखाई पड़ेंगे, जिनकी अकूत शक्ति द्वारा संपन्न होने वाले क्रांतिकारी घटनाक्रम अनुपम और अद्भुत ही कहे- समझे जा सकेंगे। और वही समयानुसार अपनी आज की मंगलाचरण थिरकन को क्रमशः तीव्र से तीव्रतर करते चले जाएंगे। तांडव नृत्य से उत्पन्न गगनचुंम्बी जाज्वल्यमान आग्नेय लपटों द्वारा पुरातन को नूतन में परिवर्तन करने की भूमिका किस प्रकार किस रूप में अगले दिनों संपन्न होने जा रही है, आज उस सबको सोचना, कल्पना परिधि में ला सकना प्राय: असंभव ही है। बात इतनी सी है कि युग निर्माण मिशन के क्रांति प्रवाह से आज की निविड़ निशा का कल के प्रभात कालीन अरुणोदय में परिवर्तन होकर ही रहेगा। "
(- परम पूज्य गुरुदेव : पं. श्रीराम शर्मा आचार्य , वान्ग्ड़मय क्रमांक -66 , युग निर्माण योजना दर्शन, स्वरूप व कार्यक्रम, पृष्ठ 3.40 )
( क्रांति की करवट ,पूर्ववत पृष्ठ- 14 )
क्रमशः .....
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