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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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भाग-3
-डॉ नितिन सहारिया, महाकौशल
8720857296
भारत व विश्व के भविष्य के संदर्भ में *स्वामी विवेकानंद जी* कहते हैं कि - " फिर से कालचक्र घूम रहा है, एक बार फिर भारत से वही शक्ति प्रवाह नि:सृत हो रहा है, जो शीघ्र ही समस्त जगत को प्लावित कर देगा। विश्वास रखो, विश्वास रखो प्रभु की आज्ञा है कि भारत की उन्नति अवश्य ही होगी और साधारण तथा गरीब लोग सुखी होंगे।
भारत का पुनरुद्धार होगा, पर वह जड़ की शक्ति से नहीं वरन् आत्मा की शक्ति द्वारा। वह उत्थान- विनाश की ध्वजा लेकर नहीं वरन् शांति और प्रेम की ध्वजा से ,सन्यासियों के वेश से; धन की शक्ति से नहीं बल्कि भिक्षापात्र की शक्ति से संपादित होगा। "
फ्रांस के *भविष्यवक्ता रोम्या रोला* कहते हैं कि - " मुझे विश्वास है कि श्वेत सभ्यता का एक बड़ा भाग अपने गुणौ- अवगुणों सहित नष्ट हो जाएगा, फिर एक नई सभ्यता उदित होगी। आगे भारतीय संस्कृति और दर्शन ही विश्व धर्म, विश्व संस्कृति के रूप में प्रतिष्ठित होंगे। एक नए समाज की रचना होगी।"
उपरोक्त भविष्यवक्ताओं, महान आत्माओं के वचन की पुष्टि करते हुए *युगऋषि, युगदृष्टा पं .श्रीराम शर्मा आचार्य सन 1985 शांतिकुंज- हरिद्धार परिसर में अपने उद्बोधन में कहते हैं* कि - " *भारतवर्ष में अगले दोनों बड़ी-बड़ी क्रांतियां खड़ी होगी और उनका किसी को नेतृत्व करना चाहिए। राजनीतिक क्रांति में प्रजातंत्र का ढांचा तो यही रहेगा, पर व्यक्ति ऐसे आएंगे जिनके बारे में आपको शिकायत नहीं करनी पड़ेगी।* फिर आपको यह नहीं कहना पड़ेगा की, अमुख जी नहीं रहते तो हिंदुस्तान का यह हाल नहीं हुआ होता। आपको यह नहीं कहना पड़ेगा की हिंदुस्तान में जवाहरलाल नहीं होते तो यह हाल नहीं होता। आपके सरदार पटेल नहीं होते तो देश की हालत यह नहीं होती, यह नहीं कहना पड़ेगा। यह राजनीतिक भविष्यवाणी या आने वाले समय में यह *हमारा राजनीतिक ढांचा भी ऐसा बनेगा,* *ऐसा सुंदर ढांचा बनेगा जिसे देखकर दुनिया यह कहेगी कि ऐसा ढांचा तो भारत के अलावा, ऐसा कहीं भी नहीं है। किसी भी देश में नहीं है ।* और क्या करना है, सारी की सारी कमजोरी हमारी सामाजिक हैं। हम 2000 वर्षों तक गुलाम रहे। हमारे 2000 वर्षों तक गुलाम होने की वजह यह नहीं थी कि हमारे सिपाही कम थे, सेना कम थी, हमारे पास लड़ने वाले कम थे, या हमारे देश पर हमला करने वालों की तादाद ज्यादा थी, नहीं इनमें से कोई बात नहीं थी। बात केवल एक इतनी सी एक बात थी कि हमारा सामाजिक ढांचा इतना कमजोर था जिसकी वजह से हम ज्यादा होते हुए भी कम होने वाले से गैरतर निकले और 2000 वर्षों तक हम गुलाम रहे और 2000 वर्षों तक कोई भी मुल्क गुलाम नहीं रहा। जापान गुलाम हुआ, इटली गुलाम हुआ, जर्मनी गुलाम हुआ। कई को पिछले विश्व युद्ध में गुलाम होना पड़ा हो, पर इतनी लंबे समय तक 2000 वर्ष तक कौन गुलाम रहा? कोई गुलाम नहीं रहा। तो क्या कारण था इसका? केवल एक कारण था कि हमारी सामाजिक परिस्थितियों बड़ी कमजोरी थी। सामाजिक दृष्टि से हम बड़े छिन्न-भिन्न थे ,अस्त व्यस्त थे। *सामाजिक क्रांति होगी 100 फीसदी आगे सामाजिक क्रांति होगी। आप विश्वास रखिए, यकीन मानिए कि जिन-जिन कमजोरी के कारण हिंदुस्तान दुर्बल हुआ था, वह सारी की सारी कमजोरी दूर होकर के रहेगी।* हमारे यहां स्त्रियों को घूंघट में, पर्दों में बंद रखा जाता है, तो 70 करोड़ में से 35 करोड़ कर रह गई और 35 करोड़ में से भी ऐसी हैं जो डीव्बो में चिड़िया जैसी बैठी रही हैं जैसे बकरी बाड़े में बंधी रहती है, ऐसी स्थिति है। यह स्तिथी बदल जाएगी, हां बदल कर रहेगी। *आने वाले समय में स्त्रियां पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर काम करेंगी और देश को ऊंचा उठाने में पूरा योगदान देंगी ,यह क्रांति होगी* *हमारी सामाजिक क्रांति।* भविष्य की बड़ी भविष्यवाणियां और छुआछूत। यह वंश की वजह से बड़े आदमी होते हैं, नहीं भविष्य में *वंश की वजह से बड़े आदमी नहीं होंगे, यह क्रांति होगी।* वेशभूषा की वजह से महात्मा बनेंगे, *नहीं वेशभूषा की वजह से महात्मा नहीं बनेंगे ,इसकी भी एक क्रांति होगी।* भिक्षा जो है व्यवसाय रहेगा जैसे लोगों ने 60 करोड लोगों ने व्यवसाय बना लिया है। अपनी और रंगीन कपड़े पहन लेते हैं रंगीन कपड़े पहन लेते हैं और क्या पहन लेते हैं कोई ना कोई पाखंड खड़ा कर लेते हैं, और लोगों को ठगते रहते हैं, अपना पेट भरते रहते हैं। यह परिस्थितियों रहेगी नहीं, इसमें भी क्रांति होगी। *हमारे जाति, वंश परंपरा में समानता आएगी। हमारे स्त्री और पुरुषों के बीच में समानता आएगी। हमारे देश में संत तो होंगे पर कोई यह आवश्यक नहीं कि वह पेशेवर होंगे,* दीक्षा व्यवसाय करें तभी संत होंगे। जैसे आप में से भी कोई संत हो सकते हैं। आप में से भी महात्मा हो सकते हैं *और कौन-कौन सी क्रांतियां होगी? समाचार पत्रों की क्रांति होगी, फिल्मों में क्रांति होगी, साहित्य में क्रांति होगी, शिक्षा में क्रांति होगी और मजदूरी में भी क्रांति होगी, बेरोजगारी में भी क्रांति होगी।* आज तो बड़े-बड़े मिल और बड़े-बड़े उद्योग सारा का सारा पैसा अपनी जेब में रखे हुए हैं और लाखों आदमी, करोडौ आदमी बीमार पड़ रहे हैं। *अगले दिनों उद्योग धंधों की भी ऐसी क्रांति होगी कि बड़े शहर कस्बों में बदल जाएंगे और गांव कस्बा में बदल जाएंगे* बीच की इकाई कस्बों के रूप में होगी। यह बात हो जाएगी बिल्कुल होगी, आप यकीन रखिए। मैं कहता हूं तो आपसे बताता हूं आपको नहीं *नहीँ बकता नहीं हूं ,जो मुझे प्रत्यक्ष आंख से दिखाई पड़ रहा है, केवल उसी का जिक्र कर रहा हूं आपसे और कोई बात नहीं कह रहा हूं।"*
कुल मिलाकर यही निष्कर्ष निकलता है कि पूर्व के भविष्यवक्ताओं ने 'भारत व विश्व' के बारे में जो भविष्यवाणी की थी उनकी पुष्टि युगऋषि, युगदृस्टा पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी अपने उद्बोधन में करते हैं। अत: यही भारत की नियति -भवितव्यता है, जिसमें किसी को भी संशय नहीं होना चाहिए और फिर निकट भविष्य में हम सभी इसकी प्रत्यक्ष अनुभूति करेंगे क्योंकि 20 वर्षीय संग्राम जो आरंभ होने जा रहा है 2026 से।
क्रमशः .......
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