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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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*....*
( The One Millennium satyayuga is coming, beware! The era is changing.... )
भाग-२
-डॉ. नितिन सहारिया, महाकौशल
*भारत व विश्व के भविष्य के बारे में महर्षि अरविंद कहते हैं* कि - " भारत का अभ्युदय निकट है, धर्म और संस्कृति की धारा सारे विश्व में प्रवाहित करने का श्रेय उसे एक बार फिर मिलेगा। मेरे अंतःकरण में दैवी स्फुर्णाए हिलोरें मार रही हैं और कह रही हैं कि भारत का अभ्युदय बहुत निकट है, कुछ लोग इसे पश्चिमी सभ्यता का अनुयायी बनाने का प्रयास करेंगे, पर मेरा विश्वास है कि भारतवर्ष में एक अभियान प्रारंभ होगा, जो यहां की असुरता को नष्ट करके फिर से सबको एक नई दिशा देगा और इस देश की प्रतिष्ठा को, यहां के गौरव को बढ़ाएगा। यह आंदोलन संसार में फिर से सतयुग कीसी सुख- सौम्यता लायेगा।"
इसी संदर्भ में भारत के विषय में *भविष्यवक्ता एंडरसन* कहते हैं कि - " भारतवर्ष में एक छोटी देहात में जन्मे व्यक्ति का धार्मिक प्रभाव न केवल भारतवर्ष, वरन दूसरे देशों में भी बढ़ने लगेगा। यह व्यक्ति इतिहास का सर्वश्रेष्ठ मसीहा बनेगा। उसके पास अकेले इतनी संगठन शक्ति होगी, जितनी विश्व के किसी भी राष्ट्र की सरकार के पास नहीं होगी। यह संसार के तमाम संविधान के समानांतर एक 'मानवीय संविधान' का निर्माण करेगा, जिसमें सारे संसार की एक भाषा, एक संघीय राज्य, एक सर्वोच्च न्यायपालिका, एक झंडा की रूपरेखा होगी। इस प्रयत्न के प्रभाव से मनुष्य में संयम, सदाचार, न्याय, नीति, त्याग और उदारता की होड़ लगेगी।"
इसी परिपेक्ष में *युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य* का 1986 में शांतिकुन्ज परिसर, हरिद्वार में उद्बोधन - *" वर्तमान संकट और उसके बाद एक नए युग का सूत्रपात "* शीर्षक पर हुआ जिसमें वह कहते हैं कि - " इस समय की परिस्थितियां जिसमें आप इन दिनों हैं , ये अगले दिनों रहेंगी नहीं, इसमें काफी हेर- फेर पड़ने वाला है। एक पक्ष विनाश का पक्ष है। विनाश का पक्ष चारों ओर चलेगा देख लेना आप तो जिंदा रहेंगे, जिंदा तो हमको भी रहना है, स्थूल शरीर से नहीं रहेंगे तो सूक्ष्म शरीर से। हम बराबर काम करते रहेंगे और आपके साथ-साथ रहेंगे। इस समय में क्या होगा? इस समय में बड़ी मुसीबतें आएंगी और मुसीबत से आप भी बच नहीं सकेंगे। चारों दिशाओं में जब आंधियां आती हैं, तूफान आते हैं, बरसात आती है तब कोई आदमी सुरक्षित नहीं रह सकता। अगले दिनों बहुत भयंकर आने वाले हैं इसमें क्या होने वाला है? नेचर- प्रकृति हमसे नाराज हो गई है, बीमारियां फैलती हैं तो ऐसी फैलती हैं कि डॉक्टर लोग कहते हैं हमने तो इनका नाम भी नहीं सुना,कभी देखा नहीं, हमारी किसी किताब में पढ़ाया ही नहीं गया। हम क्या दवाई दें इसकी? और डॉक्टर कहते हैं क्या सुई लगाये? क्या दबा दें ? पता तो है नहीं, ऐसा मरीज कोई देखा नहीं, ऐसी बीमारियों पर बीमारियां चली आ रही हैं। हम प्रकृति के प्रकोप से घिरे हुए हैं । हम जहर से घिरे हुए हैं, हम वस्तुओं के अभाव से घिरे हुए हैं, हम महंगाईयों से घिरे हुए हैं और लोगों के खिलवाड़ से घिरे हुए हैं। आपका हम काम करेंगे और सारी दुनिया का हम काम करेंगे। विद्वान नहीं है हम, हम तपस्वी हैं। जब से हमने जन्म धारण किया है 1911 तब से लेकर के और इस समय तक हमारी पूरी की पूरी जिंदगी एक तपस्वी का जीवन व्यतीत करने में हुई है। इसलिए तपस्वी के पास जो शक्ति होनी चाहिए, वह हमारे पास है।
यह दुनिया बड़ी तहस - नहस हो रही है, तो आप इसका क्या करोगे ? *इसको हम एक धुरी पर इकट्ठी करेंगे। एक धर्म सारी दुनिया का होगा और एक राष्ट्र सारी दुनिया का होगा और एक मैनेजमेंट, एक व्यवस्था दुनिया में होगी। ऐसी व्यवस्था होगी कि कोई आदमी छोटा-बड़ा नहीं होगा। समानता के अधिकार हर एक को मिलेंगे। विषमता लोगों के बीच में रहेगी नहीं और सब आदमी एकता से रहेंगे।* विषम काल जो आ रहा है, इससे बड़ा विषम काल कभी न आया।
दुनिया को हम शानदार बनायेंगे लड़ोगे! पहले हम लड़ेंगे, *नीब खोदनी पड़ती है और उसके बाद महल बनाया जाता है। नीब खोदने में एक बड़ा संघर्ष होने वाला है।* अब इस समय जो लोग हैं, उनसे हम कहें! जैसे अभी आपके सामने कह रहे हैं, तो कोई मान जाएगा क्या ? नहीं कोई नहीं मानेगा, *तो फिर क्या करना पड़ेगा? जो जिस भाषा को समझता है, उसको उसी भाषा में समझाना पड़ेगा। दुनिया का एकीकरण करना है। सारे विश्व में फैले हुए राज्यों का, देशो का एकीकरण करना है। सबको समानता का हिस्सा होगा, सब आदमी मिल बांट के खाएंगे और हंसते-हंसाते हुए रहेंगे।* तोड़ने में भी शक्ति लगाएंगे और बनाने में भी शक्ति लगाएंगे। आपको दु:खी हम नहीं रहने देंगे, आपको कठिनाइयों में घिरा हुआ हम नहीं रहने देंगे। आपको हम ऊंचा उठाएंगे, सभी दृष्टि से,पैसे की दृष्टि से। पैसा तो बेटा अगले दिन ऐसे आएंगे कोई सोने की सलाखें घर में जमा करेगा नहीं । मालदार नहीं बनाओगे? नहीं मालदार नहीं बनाएंगे, आपको हम भावनाशील बनाएंगे ,आपको हम विचारशील मनाएंगे ,सारे संसार को बहुत शानदार बनाएंगे, ऊंचा उठा हुआ बनाएंगे, समुन्नत बनाएंगे, सुखी बनाएंगे और इस तरह का बनाएंगे जिस तरह का स्वर्ग, धरती पर स्वर्ग दिखे। अगली हमारी यही योजना है। "
( उपरोक्त बातें, तथ्य भविष्य के विषय में किसी को आश्चर्यजनक अथवा अटपटे भी लग सकते हैं किंतु इस लेख का लेखक अपने अनुभव ,अध्ययन, विश्वास, चिंतन- मनन, विवेक के आधार पर 'भारत व विश्व की भवितव्य्ता' के बारे मे लिखता है। यह पूर्ण सत्य है व निकट भविष्य में हम सभी इसके दर्शन-अनुभव/ अनुभूति प्रत्यक्ष रुप से करेंगे । यह सब लिखने के पीछे आशय मात्र इतना है की आने वाले भविष्य के प्रति समाज- राष्ट्र के वन्धुओं को अविज्ञात- भविष्य का संकेत कर सकें ताकि वह सभी अपने को इसके अनुरूप ढाल/ तैयार कर सकें । )
क्रमशः .......
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