सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

भारत की मेधा और सूचना क्रांति : शून्य से गूगल न्यूज़ तक की यात्रा"

भारत की सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) रणनीति हजारों साल पहले शुरू हुई थी जब एक भारतीय वैज्ञानिक आर्यभट्ट ने शून्य अंक का आविष्कार किया था। दशमलव प्रणाली में स्थिति संकेतन के लिए इस अंक का उपयोग, शून्य के निरंतर उपयोग के साथ, एक महत्वपूर्ण कम्प्यूटेशनल कठिनाई का अंतिम समाधान साबित हुआ, और तब से दुनिया भर में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। अगर भारत ने इस खोज का कॉपीराइट ले लिया होता, तो कंप्यूटर उद्योग में लगभग 50 प्रतिशत आविष्कार भारतीय होते। हालाँकि, भारतीय दर्शन यह उपदेश देता है कि ज्ञान साझा करने से स्वयं का ज्ञान बढ़ता है। यह आज के ज्ञान-आधारित समाज में सच साबित हो रहा है। 

इस पैरा को पढ़ने के बाद सूचना क्रांति में भारतीयों द्वारा की गई खोजों की चर्चा कर लेते हैं। ईमेल और ऑप्टिकल फाइबर के अलावा सूचना तकनीक में एक महत्वपूर्ण पड़ाव यूएसबी की खोज था। जिस यूएसबी केबल का इस्तेमाल मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर में इस्तेमाल करते हैं, उसे इंटेल कंपनी ने बनाया था लेकिन इस आविष्कार का श्रेय एक भारतीय व्यक्ति को जाता है जिसका नाम अजय वी. भट्ट था। अजय भट्ट भारतीय मूल के कंप्यूटर आर्किटेक्ट थे, जिन्हें यूएसबी को बनाया था, जिसे आज पूरी दुनिया इस्तेमाल करती है।

आज इंजीनियर दिवस है, आज के इंटरनेट युग में अधिकांश तकनीक का संबध भारत के वैज्ञानिकों या भारतीय मूल के वैज्ञानिकों से है।  

भारत के ज्ञान से प्रकाशित दुनिया को देखने वाले हम लोग स्वयं को नहीं देख पा रहे हैं।

जो लोग कहते हैं भारत की मेधा एक बल्ब नही बना पाई वे अज्ञान के कूप में मंडूक हैं। जिस नॉइज कैंसिलेशन हेडफोन का प्रयोग कर भीड़ में भी आसानी से संवाद/सुनना सुगम हुआ उसके जनक अमर बोस थे। 1978 में इस प्रोजेक्ट पर काम करके उन्होंने पहली शुद्ध डिवाइस बनाई।

शिवा अयादुराई ने ईमेल बनाया तो पूरा पश्चिमी जगत हतप्रभ रह गया और जगदीश चंद्र बोस की तरह उन्हें इसका क्रेडिट देने में सौ विवाद पैदा किए। नरेंद्र कापनी को शायद ही कोई जानता है। कुछ और महत्वपूर्ण नाम का उल्लेख करता हूं जिन्हे आपको जानना चाहिए।

विनोद धाम को फादर ऑफ पेंटियम टेक्नोलॉजी कहा है। विरोध धाम ने फ्लैश मेमोरी टेक्नोलॉजी का आविष्कार किया। इसी क्रम में एक महत्वपूर्ण नाम कृष्णा भारत का है जिन्होंने विश्व का पहला ऑटोमेटेड न्यूज सर्विस विकसित किया जिसे हम गूगल न्यूज के नाम से जानते हैं। सूचना क्षेत्र के अलावा एक नाम नीतीश जांगिड़ का है जिन्होंने नियोनटाल ब्रेथिंग डिवाइस बनाया जिससे समय से पहले जन्मे बच्चे की जान बचाई जाती है।

मेहनत और मेधा के पर्याय हमारे अभियंता हैं, महान विश्वेश्वरय्या को उनकी जयंती पर कृतज्ञ श्रद्धांजलि 🙏

टिप्पणियाँ