सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

बंगाल फाइल का हासिल



कई दिनों से जो लोग बंगाल फाइल पर फिल्म को देखकर या बिना देखे प्रतिक्रिया लिख रहे उनका अवलोकन कर रहा था। 

आसान टारगेट गांधी हैं, शत प्रतिशत वॉल पर गांधी की अभद्र आलोचना की गई है, विवेक अग्निहोत्री ने अपने प्रत्येक इंटरव्यू में इस पक्ष पर विशेष ध्यान दिया है कि किस तरह दांत में जीभ दबा कर आत्महत्या करने वाला वक्तव्य उभर कर आए। गांधी के प्रति घृणा का मोबालाइजेशन कर के फिल्म सफल हो सकती है, अभी इस बात को स्थापित करने के लिए फिल्मकारों को और मेहनत करनी होगी। बहुत से स्नैपशॉट को संपूर्ण वृत्त बताना होगा।

दूसरा अवलोकन हिंदुओं को फट्टू कहकर अपने ही भाई बंधुओं को गाली देने वाली वॉल बहुतायत है। हिंदुओं के कायर होने को उनका मूल चरित्र मानकर तमाम तथाकथित राष्ट्रवादियों ने हिंदुओं खासकर बंगाली हिन्दुओं को निर्वीय सिद्ध कर डाला है।

मेरा मत है कि चर्चा के लिए उपर्युक्त  दोनों बातें निरर्थक हैं। गांधी से घृणा करने वाले अपने को संतुष्ट करने के लिए गाली दें, उससे कुछ होना मिलना नहीं है। आधे मेंड़ के लिए अपने भाई से मारपीट करने वाले विभाजन पर ज्ञान देते हैं तो हंसी आती है। जातिवादी लोग, पंथवादी लोग, क्षेत्रवादी लोग जब विभाजन रोकने की बात करते हैं तो हंसी आती है। दूसरी बात हिंदुओं को फट्टू कहने वाले उत्साही लोगों की बहादुरी केवल वॉल तक है यह मैं जानता हूं।  अब उस पर आते हैं जिस पर चर्चा होनी चाहिए।

फिल्म के उस पक्ष पर बहुत कम लिखा पाया जिसमें स्पष्ट रूप से यह दिखाया गया कि भारत विभाजन इस्लाम का हिंदुत्व के साथ सह अस्तित्व स्वीकार न करने की वजह से हुआ है। वास्तव में विश्व में जहां भी इस्लाम गया वह सह अस्तित्व की बजाय इस्लामिक अस्तित्व पर केंद्रित रहा। 

मेरा प्रस्ताव है कि विभाजन इस्लाम और सेक्युलरिज्म के बीच में हुआ न कि इस्लाम और हिंदुत्व के बीच में हुआ। हिंदू के साथ की समस्या तो बाद की है, इस्लाम की पहली समय सेक्युलर होना है। जितने भी इस्लामिक देश हैं वे सेक्युलर नहीं हैं। भारत विभाजन अब सच है, एक बर्बर विचारधारा वाला देश बन चुका है, भारत के अंदर बहुत से बर्बर विचारधारा वाले लोग हैं। गांधी जी द्वारा मुस्लिमों के हद तक तुष्ट करने के सभी प्रयास असफल होना हमारे पास वह साक्ष्य है जिसका प्रयोग सेक्युलरिज्म के मुखौटे को उतरने में किया जाना चाहिए।

फिल्म की चर्चा के गाली गलौज के लिए करना है या उससे कोई नरेटिव बनाना और उस पर विमर्श करना है यह मैं आप पर छोड़ता हूँ।

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