सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

लव जिहाद का असली चेहरा – एक षड्यंत्र का दस्तावेज़

लव जिहाद का असली चेहरा – एक षड्यंत्र का दस्तावेज़


लव जिहाद कोई कल्पना या अफवाह नहीं, बल्कि एक योजनाबद्ध धार्मिक युद्ध है जिसका उद्देश्य हिंदू और अन्य गैर-मुस्लिम समाज की बेटियों को छल, प्रलोभन, झूठी पहचान और फरेब से अपने जाल में फँसाकर उनका धर्मांतरण कराना है। यह रणनीति केवल व्यक्तिगत प्रेम संबंधों का मामला नहीं, बल्कि इसे वैचारिक और संगठित रूप से संचालित किया जाता है। इसका आधार कट्टरपंथी इस्लामी सोच में निहित है, जहाँ गैर-मुस्लिम महिलाओं से विवाह को धर्म-प्रसार का माध्यम माना गया है। भारत में पिछले दो दशकों में ऐसे हजारों मामले पुलिस और अदालतों में सामने आए हैं, जिनमें आरोपी युवक ने अपना नाम, धर्म और पहचान छिपाकर हिंदू या सिख लड़की से संबंध बनाए, शादी के बाद अपनी असलियत बताई और फिर धर्मांतरण का दबाव डाला।

केरल में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने 2016 में हदिया मामले की जाँच की, जिसमें साफ़ हुआ कि एक पूरी नेटवर्किंग टीम थी जो हिंदू लड़कियों को निशाना बनाकर उन्हें इस्लाम में परिवर्तित करती थी और कई मामलों में उन्हें विदेश, खासकर ISIS नियंत्रित क्षेत्रों में भेजा जाता था। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और झारखंड में पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि एक ही गिरोह से जुड़े कई युवक अलग-अलग नामों से अलग-अलग जगह पर यही खेल खेल रहे थे। 2020 में उत्तर प्रदेश सरकार ने लव जिहाद रोकने के लिए विशेष कानून बनाया — उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम — जिसके तहत अब तक दर्जनों आरोपियों को गिरफ़्तार किया गया है।

लव जिहाद का मकसद केवल एक लड़की का धर्म बदलना नहीं, बल्कि समाज में असंतुलन पैदा करना, हिंदू जनसंख्या को घटाना और धार्मिक असुरक्षा को बढ़ाना है। इसके पीछे का विचार यह है कि एक मुस्लिम युवक और गैर-मुस्लिम लड़की के विवाह से अगली पीढ़ी इस्लामी पहचान में आएगी और इस तरह धीरे-धीरे सांस्कृतिक व धार्मिक संतुलन बदल जाएगा। कट्टरपंथी इस्लामी संगठन इस कार्य को "धर्म की सेवा" मानते हैं और इसे प्रोत्साहित करने के लिए फंडिंग, लॉजिस्टिक सपोर्ट और प्रशिक्षण तक उपलब्ध कराते हैं। सोशल मीडिया पर फेक प्रोफाइल बनाकर, कॉलेज-कैंपस में सुनियोजित ढंग से दोस्ती करके, और फिल्मों, वेब सीरीज़ के जरिए "इंटरफेथ रोमांस" का रोमानीकरण करके यह मानसिक वातावरण तैयार किया जाता है जिसमें लक्षित लड़की खुद को सुरक्षित और प्रेम में पड़ी हुई महसूस करे, जबकि असलियत कहीं और होती है।

कई मामलों में, शादी के बाद न सिर्फ़ धर्मांतरण का दबाव डाला जाता है, बल्कि लड़की को उसके मायके और पुराने रिश्तों से पूरी तरह काट दिया जाता है। कई पीड़िताओं ने अदालत और पुलिस में बयान दिया है कि उन्हें शारीरिक हिंसा, यौन उत्पीड़न और मानसिक यातना सहनी पड़ी, और कई मामलों में हत्या तक कर दी गई। राजस्थान के करौली, मध्य प्रदेश के खंडवा, झारखंड के सिमडेगा और उत्तर प्रदेश के मेरठ जैसे शहरों से आई घटनाएं इसका भयावह स्वरूप दिखाती हैं।

मीडिया का एक बड़ा हिस्सा, जो कथित सेकुलरिज़्म की आड़ में इस खतरे को नज़रअंदाज़ करता है, इसे "दो लोगों का व्यक्तिगत मामला" कहकर पेश करता है, जबकि हर बार पीड़ित का पैटर्न और आरोपी के तौर-तरीके एक जैसे होते हैं। यह संयोग नहीं, बल्कि एक संगठित रणनीति का सबूत है। केरल उच्च न्यायालय, इलाहाबाद उच्च न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय के कई निर्णयों में यह मान्यता दी गई है कि शादी और धर्मांतरण में अगर छल, दबाव या धोखाधड़ी हो, तो वह पूरी तरह गैर-कानूनी है।

हिंदू समाज को यह समझना होगा कि यह केवल व्यक्तिगत स्तर का प्रेम-प्रसंग नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और धार्मिक युद्ध का हथियार है। बेटियों को जागरूक करना, परिवार में संवाद बनाए रखना, बच्चों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करना, और सामूहिक स्तर पर इस मुद्दे पर आवाज उठाना अनिवार्य है। जब तक हम अपनी बेटियों को इस छल और हिंसा से बचाने के लिए संगठित नहीं होंगे, तब तक यह षड्यंत्र जारी रहेगा। समय आ गया है कि हम बिना झिझक यह कहें कि प्रेम पवित्र है, लेकिन प्रेम के नाम पर किया गया छल एक अपराध है और जब यह छल धर्मांतरण और सांस्कृतिक विनाश के एजेंडे से जुड़ जाए तो यह राष्ट्र और धर्म के खिलाफ युद्ध बन जाता है।

लेखक 
महेंद्र सिंह भदौरिया
प्रांत सेवा टोली सदस्य उत्तर गुजरात
सहमंत्री साबरमती भागवत विभाग 
विश्व हिन्दू परिषद उत्तर गुजरात प्रांत 

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