सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

श्रीमंत_बाजीराव_बल्लाळ जन्म जयंती

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आप सभी को "राष्ट्रपिता" के नाम से प्रसिद्ध मोहनदास #गांधी जी की जन्म तारीख तो याद होगी ही। शायद आपको "चच्चा नेहरू" जी का बर्थडे भी याद होगा. देश भर के स्कूलों में प्रतिवर्ष सरकारी /गैर सरकारी कार्यक्रम भी होते हैं। परंतु अपने हृदय पर हाथ रखकर बताइएगा - क्या आपको पता है श्रीमंत #बाजीराव_बल्लाळ जी की #जन्मतिथि याद है?

क्या आपने कभी #बाजीराव की जन्मदिवस मनाया है? 

क्या आप को उनकी जन्मस्थली का पता है? बिना इंटरनेट पर खोजे बताइए ना कहां हुआ था उनका जन्म? किस गांव, किस तहसील या किस जिले में इस #वीर_शिरोमणि का जन्म हुआ था?

कदाचित एक हजार लोगों में से नौ सौ निन्यानवे लोगों को इन दोनों प्रश्नों का उत्तर "नही" पता होगा..😢

उत्तर में मुगल सत्ता का सिरमौर #दिल्ली_सल्तनत और दक्षिण में #निजामशाही, आदिलशाही, पुर्तगाली, फ्रांसीसी, अंग्रेज, इथियोपियाई सिद्धी सत्ताओं को #हराने वाले और पिछले हजार वर्षों में हिंदुओं की ओर से लड़ने वाले अनगिनत वीरों में से सबसे सफल और एकमात्र #अजेय_योद्धा श्रीमंत बाजीराव के जन्म दिन बहुसंख्य हिंदू समाज को क्यों नहीं पता होना चाहिए??

सोमनाथ, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, त्र्यंबकेश्वर, भीमाशंकर, गृहणेश्वर, मल्लिकार्जुन, इत्यादि #ज्योतिर्लिंग और अन्य सैकड़ों मंदिरों को स्वतंत्र करा कर वहां मुगलों द्वारा बंद कर दी गई पूजा अर्चन को पुन: आरम्भ कराने वाले #धर्म_रक्षक योद्धा बाजीराव का #गौरव_गान क्यों नहीं होना चाहिए?

देश का दुर्भाग्य है कि श्रीमंत की जन्मजयंती पर कोई सरकारी या सांगठनिक कार्यक्रम भी नहीं होता!!

 ना देश की राजधानी दिल्ली में और ना ही उनके जन्म राज्य महाराष्ट्र में (चाहे सरकार किसी भी पार्टी की हो) कोई "आधिकारिक कार्यक्रम" नही होता है...!! 

क्यों?

विचार तो कीजिए... जिस योद्धा ने पृथ्वीराज चौहान (1192) के बाद से गुलाम हुई #दिल्ली को मुगलों के दासत्व से 545 वर्षों बाद स्वतंत्र कराया, उस दिल्ली में बाबर रोड है, हुमायु रोड है, अकबर रोड है, तुगलक रोड है; परंतु उसी दिल्ली में #बाजीराव के नाम की कोई #सड़क नही है और ना ही किसी सार्वजनिक स्थल पर कोई प्रतिमा.

क्या कारण है कि राजनैतिक दल और सरकारें इस हीरो के प्रति उदासीन हैं, मुझे नही पता. अगर आपको पता हो, तो अवश्य लिखिए.

परंतु.. क्या हम सरकारों के भरोसे ही बैठे रहें? 

अगर नेतागण कोई कार्यक्रम नहीं करते; तो क्या हम #राष्ट्रनिष्ठ_हिंदू गण भी अपने स्तर पर कुछ नही कर सकते? 

क्यों हम बच्चों और युवाओं के बीच जागरूकता फैलाने हेतु #बाजीराव जैसे गुमनाम हीरो, अपने वीरों की पुण्य तिथियों पर छोटा सा कार्यक्रम, कोई बाइक रैली, कोई व्याख्यान माला, इत्यादि का आयोजन नही करते?

अगर हम उनके "जन्मस्थल" तक नही जा सकते, तो क्या हम अपने अपने गांव, शहर, मुहल्ले या कॉलेज में श्रीमंत की एक छोटी सी *फोटो रख कर दो पुष्प* भी नही चढ़ा सकते? अपने घर, अपने मोहल्ले, अपने गांव/शहर में ही एक छोटा बड़ा कार्यक्रम अवश्य कीजिए. बच्चों, युवाओं, वृद्धों को एकत्र कर के पुष्पांजलि और #जयकारा तो लगा ही सकते हैं.

किसी राजनैतिक दल का मुंह ताकने की कोई आवश्यकता नहीं. एक हिंदू होने के नाते अपने वीरों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना हमारा भी व्यक्तिगत #कर्तव्य है.

सनद रहे - अब तक हमें बताया जाता रहा है - "जो जीता वो सिकंदर". जबकि ऐतिहासिक तथ्य है कि सिकंदर भी अपने जीवन की आखरी लड़ाई भारत से हार कर वापस गया था। 

श्रीमंत बाजीराव पिछले 1000 वर्षों के आक्रमणकाल में #हिंदू_प्रतिकार के ऐसे एकमात्र योद्धा हैं जो कभी हारे ही नही. उन्होंने अपने जीवन में 41 युद्ध लड़े और सभी 41 में विजयश्री का वरण किया. कभी हिंदुओं के नुकसान / अपमान वाला कोई समझौता नहीं किया. और इसलिए मैं कहता हूं - #जो_जीता_वो_बाजीराव 🧡

हर हर महादेव 🚩

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