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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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इसी मार्जिन से DOG Ngo's चलते हैं, टीकाकरण नसबंदी के लिए सरकारी पैसा डॉग NGO को मिलता है… पर अब तक कितने आवारा कुत्तों का टीकाकरण और नसबंदी हो पाया है? मेनका गांधी जैसे कई शातिर लोगों ने देशव्यापी NGO बनाकर करोड़ों रुपए अंदर कर लिया है अबतक।
बड़े बड़े Dog NGO के साथ जुड़े NGO वर्कर को महीने का 50,000 आता है। उसमें कुत्तों के लिए कपड़े, सोने के लिए गद्दा, महंगी फीड, टीकाकरण, बीमारी की दवाओं… सबका खर्चा शामिल होता है। लेकिन Dog NGO वर्कर करता क्या है? पुरानी अखबारें, मांग के लाए हुए गत्ते, लोगों से मांग कर लाई सड़ी सी रूई कुत्तों को देता है… टीकाकरण तो करवाता नहीं,,, कुत्ते भी जख्मी हुए रहते हैं दवा मिलती नहीं।
हेरफेर कैसे होती है वो भी समझें… आसपास के 3-4 बुद्धू लोगों को कुत्तों को खाना डालने, सर्दियों में कार्टून का प्रबंध करने के लिए कह देता है NGO वर्कर… उसे पता है कुछ पागल लोग हैं ही आवारा कुत्तों को खिलाने पिलाने के लिए… इस प्रकार वो महीने का 50,000 अपनी जेब में डाल लेता है। हां साल में एक बार अपने पालतू कुत्ते के साथ फोटोशूट करवा के ऊपर भेज देता है,, जिससे NGO को लगे वाकई में कुत्तों पर खर्च कर रहा है।
…जिस दौर में लोग अपने सगे संबंधी को ना पूछ रहे, वहां अचानक से Dog NGO वर्कर आपके आस पास कैसे पनप गए कभी सोचा है आपने? महीने की 50,000 रुपए आमदनी का लालच है जो ऐक्टिविस्ट बने घूम रहे… कभी गौर से देखें तो इनमें से अधिकांश लोग कोई दूसरा काम भी नहीं करते,,, या दिखावे का कुछ छोटा मोटा काम करते हैं। सोचने वाली बात 24 घंटे डॉग एक्टिविस्ट बनकर घूमने से घर कैसे चलता है? …सारा पैसा का खेल हैं NGO नमक गिरोह चाहे जितने भी हों… जोकि विदेशों सहित देश में भी भांग बूटी की तरह उग आए हैं।
• केजरीवाल जैसे गिरोह पनपे ही NGO की सहायता से हैं… राहुल गांधी को जॉर्ज सोरोस से फंडिंग NGO के माध्यम से हो रही है… सुप्रीम कोर्ट के तथाकथित वकीलों को आतंकवादियों और घुसपैठियों के लिए केस लड़ने के लिए तैयार भी NGO करते हैं और फीस भी वहां से आती है। सो, हर मुद्दे पर जहां भी NGO को कोई दिक्कत होगी वहां वहां ऐसे पॉलिटिकल पार्टियों और वकीलों को NGO के समर्थन में आना ही पड़ेगा।
ये तथाकथित मुद्दा लोगों के लिए बहुत छोटा मुद्दा हो सकता है… लेकिन इन NGO's के पीछे मनी लॉन्ड्रिंग नेक्सस, ब्लैक मनी मशीनरी, विदेशी चंदा सहित सारी ताकतें खड़ी हुई हैं… यूंही नहीं सुप्रीम कोर्ट बिक जाता है… पूर्व चीफ जस्टिस मार्कण्डेय काटजू के अनुसार जजों को रिश्वत का पैसा विदेश में मिलता है।
✍️ आर्यन
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