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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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भारत में जातिगत राजनीति का आधार समझे बिना हम लोग हवा तीर मार रहे हैं भारत में पूरी जातिगत राजनीति के पीछे बहुत बड़ा विभाजनकारी षड़यंत्र काम कर रहा है उसे हम लोगों को समझने की आवश्यकता है इसकी शुरुआत आर्य आक्रमण सिद्धांत हुई थी यह सिद्धांत अंग्रेजों ने इसलिए दिया था उन्हें यह सिद्ध करना था भारत की संस्कृति सभ्यता जो आज है वह विदेशी आक्रमण से हुई आर्य मध्य युरोप से आये थे उन्होंने पूरी संस्कृति को बदल रख दिया भारत में निरंतर विदेशी आक्रमण हुए हैं हम भारत में आये भारतीय समाज सभ्य बनाने के लिए इसके लिए अंग्रेजों ने छल प्रपंच किये उन्हें हिंदू समाज को जातियों विभाजित करने के लिए अलग अलग नेता खड़े किये दक्षिण पेरियार उत्तर ज्योतिबा फुले डॉ अंबेडकर जोगेंद्र नाथ मंडल है । आंकड़ों की बात करे तो 1911 की जनसंख्या में 2% अस्पृश्य आबादी थी। भारत में बड़े पैमाने अस्पृश्यता जो उस समय दिखती थी अंग्रेजों आर्थिक समाजिक नीतियों के कारण बहुत बड़े अकाल और महामारी फैली जिसमें करोड़ों लोग काल ग्रास समा गये थे इस महामारी बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का सिस्टम शुरू हुआ उसे कोविड 19 कोराना काल के समय समझ सकते हैं उस समय पूरा देश लाक डाउन में था उस समय सोशल डिस्टेंसिग नियमों का पालन किया गया था उसी प्रकार उस समय यह सिस्टम था उसी अंग्रेजों ने इतना बड़ा बना दिया 22% आबादी को अनुसूचित जाति दलित बना दिया पीड़ित शोषित बना दिया उनके नाम पर आरक्षण लागू कर दिया उसके बाद यह राजनीति में विकृति स्पष्ट देखने लगी क्योंकि अंग्रेजों नीतियों हिंदू आर्थिक मॉडल पूरी तरह ध्वस्त हो गये थे लोगों के लिए जीविकोपार्जन के लिए सरकारी नौकरी के आलावा कोई दूसरा विकल्प उस समय नहीं था आरक्षण के वजह नौकरी मिलने लगी गई जब भारत स्वतंत्र हुआ तो उस वक्त की सरकारों ने और अति कर दी पूरी तरह शिक्षा क्षेत्र लेकर आर्थिक मॉडल तक सब में पूरी तरह कम्युनिस्ट सम्मवादी विचार को समाजवाद के नाम पर लागू करके सबकी अधिग्रहण कर लिया उद्यमिता का गला घोंट दिया इसके कारण भारत में बड़े पैमाने बहुत गरीबी बढ़ी है। उस समय लोगों के पास रोजगार का एक अवसर था सरकारी नौकरी इसे ऐसे समझ सकते जैसे बिहार बंगाल के उदाहरण से इन राज्यों में 1960 के दशक में बड़े पैमाने उद्योग धंधे थे सरकार की नीतियों और कम्युनिस्टो ने सबकुछ तबाह कर दिया इन राज्यों के पास सरकारी नौकरी के आलावा कोई आज विकल्प नहीं है वहीं गुजरात दक्षिण भारत में बड़े पैमाने उद्यमिता बढ़ावा मिला आज आर्थिक रूप यह राज्य संपन्न हैं 1955 से लेकर पूरी भारत की अर्थव्यवस्था बंद थी लोगों के पास रोजगार बहुत कम अवसर थे। इसी कारण आरक्षण की व्यवस्था स्थाई होती है गई मंडल कमीशन की फर्जी आंकड़ों आधार पर ओबीसी आरक्षण लागू हो गया इसमें हिंदू समाज की बड़ी आबादी आरक्षण के अंदर आ गई यहीं से लठैत जातियों ने हिंदू घृणा को बढ़ावा देने लग गई पूरी राजनीति यही से कल्चरल मार्क्सवाद क्रिटिकल रेस थ्योरी के आधार पर भारत कस्ट रेस थ्योरी में बदल गई हिंदू समाज एक वर्ग जन्मसिद्ध शोषक कर्ता और दुसरे वर्ग शोषित पीड़ित और वंचित बना दिया गया यह सबकुछ समाजवादी कम्युनिस्ट आर्थिक नीतियों के कारण हुआ इसे समानता स्थापित करने के नाम पर समाजिक न्याय के नाम पर यह सबकुछ है। ये सब आब्रहिमक अवधारणाएं थे क्योंकि जब प्रकृति त्रिगुणात्मक है तो जब प्रकृति एक समान नहीं तो मनुष्य एक समान कैसे हो सकता है सब राजा कैसे बन सकते सब सैनिक कैसे बन सकते हैं गुण स्वभाव कर्म स्वभाव इस इस सृष्टि आधार है इसे इस बात समझ सकते आज कुछ वर्ष पूर्व नारी सशक्तिकरण के नाम पर हिंदू स्त्रियों एक बात बताई गई महिला पुरूष एक समान होते हैं लेकिन आज वह सिद्धांत पूरी तरह गलत हो रहा है जो काम महिला अच्छे कर सकती पुरूष अच्छे नहीं कर सकता जो काम पुरूष अच्छे कर सकती वो महिला नहीं कर सकती हैं महिला भावनात्मक होती है तो पुरुष कठोर होता है। यही त्रिगुणात्मक सृष्टि सत रज तम मनुष्य यह इस चराचर जगत कोई जीव गुण कर्म स्वभाव एक जैसा नहीं हो सकता है। इसी सिद्धांत के विपरीत हमारी समाजवादी सरकारों की जिद सबको एक समान करना जिसका यह परिणाम हिंदू समाज की बहुसंख्यक आबादी अपने हीन मानती है उसे लगता उसके साथ हजारों वर्षों शोषित हुआ शोषण करने वाले ब्राह्मण है इसका कोई ऐतिहासिक आधार नहीं है जब भारत दुनिया की जीडीपी पर 33% योगदान देता है हिंदू समाज की बहुसंख्यक आबादी का शोषण हो रहा था तो तब कैसे भारत इतना संपन्न भारत से अंग्रेज 45 ट्रिलियन डॉलर लूटकर ले गए हैं। इसलिए भारत जातिगत राजनीति के आधार को समझे बिना एससी एसटी ओबीसी या ब्राह्मण को दोषी ठहराना पूरी तरह ग़लत है। इसके पीछे सरकारों आर्थिक समाजिक नीति अधिक जिम्मेदार है जिन्हें आरक्षण का लाभ मिल रहा है उन्हें लगता आरक्षण उनका जन्मसिद्ध अधिकार है आरक्षण की वैशाखी बिना नहीं रह सकते क्योंकि इन जातियों ने अपने परंपरागत कार्य छोड़ दिये एजुकेशन सिस्टम पढ़ें लिखे डिग्रीधारी तैयार किया स्किल डेवलपमेंट पर काम ही नहीं किया लोगों के पास स्किल का अभाव इसलिए लोग सरकारी नौकरी अंतिम विकल्प मानते हैं इसलिए आरक्षण के लाभ को नहीं छोड़ना चाहते इसलिए उन्हें MY DM PDA जैसे समीकरण बनाने कोई समास्या नहीं है इसे देश टूट जाये करोड़ों लोगों मारे जा कोई समास्या नहीं इसी कारण आज निजी क्षेत्र आरक्षण मांग हो रही है एससी एसटी ओबीसी शामिल जातियों को लगता उनके पास स्किल है नहीं सिर्फ डिग्री ऐसी कहानी सवर्ण जातियों की भी है किसी पास स्किल नहीं सिर्फ डिग्री है इसी कारण सबकों लगता आरक्षण के वैसाखी बिना नहीं चल सकते इसी कारण सवर्णों के लिए EWS आरक्षण सरकार लाना पड़ा है। दोष कम्युनिस्ट समाजवादी मॉडल कहां है लेकिन दोष हम एससी एसटी ओबीसी को देते हैं उन्हें अपने हित दिख रहे हैं क्योंकि वर्तमान आर्थिक समाजिक व्यवस्था विभाजनकारी है । समाज के अंदर विभेद उत्पन्न करती है जो समूह स्किल्ड डेवलपमेंट में काम किए वो बहुत संपन्न हैं जिन्होंने स्किल्स डेवलपमेंट नहीं किया तो आज लगातार गरीब होते जा रही प्रतिस्पर्धा दौर में पिछड़ रही आर्थिक स्वलंबन स्किल्ड डेवलपमेंट और समाजवाद कम्युनिस्ट आइडिया से जब तक हम लोग मुक्त नहीं होंगे एक दुसरे पर दोष मढ़ते रहेंगे इस्लाम ईसाई वामपंथियों का चारा बनते रहेंगे। इसलिए हमें समझना पड़ेगा यह सृष्टि त्रिगुणात्मक है यह धर्म अर्थ काम मोक्ष का सिद्धांत हमें बचाएगा हम कर्म सिद्धान्त बचाएगा हमें वर्ण व्यवस्था बचाएंगी जिन्हें लगता वर्ण व्यवस्था का कोई मतलब नहीं है उसे आज की क्लास सिस्टम की कोई समझ नहीं है। जन्म और पुनर्जन्म का सिद्धांत हमें बचाएगा हम गौ बचाएगी हमें अपने चिंतन ओर लौटना ही पड़ेगा उसे अपनाना पड़ेगा एक दुसरे दोष मढ़ने बचाना होगा न ब्राह्मण खतरे में न अन्य जातियां ख़तरे में ख़तरे हिंदू सभ्यता हिंदू मूल्य और परंपरा आब्रहिमक मतों और विचारधाराओं से सतत आक्रमण हैं धर्म की रक्षा करेंगे तो धर्म तुम्हारी रक्षा करेंगे। आर्थिक समाजिक राजनैतिक स्तर पर सनातन धर्म को मूल सिद्धांत आधार पर चलना होगा। धर्म विराटता सबको समहित करते चलना सतत चलते रहना है।
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