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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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आगामी भारतवर्ष के संविधान की प्रस्तावना निम्नलिखित स्वरूप में निर्धारित की जानी चाहिए।
हम, भारतवर्ष के नागरिक, सनातन धर्म की जीवनदृष्टि, सांस्कृतिक परंपरा तथा ऋषि-मनीषियों की लोककल्याणकारी चिन्तनधारा से अनुप्राणित होकर, भारत को आत्मनिर्भर, धर्मनिष्ठ, रामराज्य-सम्मत, न्यायप्रिय, स्वतंत्र, समत्वयुक्त तथा बन्धुत्वमूलक गणराज्य रूप में प्रतिष्ठित करने हेतु यह संविधान कर्तव्यबोधपूर्वक अंगीकृत, अधिनियमित एवं आत्मार्पित करते हैं; ताकि प्रत्येक नागरिक को सनातन धर्म के सिद्धांतों पर आधारित न्याय, विवेकयुक्त स्वतंत्रता, अवसरों में समता, तथा परस्पर सौहार्दपूर्ण बन्धुत्व प्राप्त हो सके — और यह राष्ट्र धर्म, सत्य, सेवा एवं सार्वभौम मंगल के पथ पर निरंतर गतिशील रहे।"
दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर, 1949 ई० (मिति मार्गशीर्ष शुक्ला सप्तमी, संवत् दो हजार छह विक्रमी) को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
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