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ईरान और नादिर शाह दुर्रानी

ईरान और नादिर शाह दुर्रानी :

आज जब ईरान पर इजरायल अमेरिका और ब्रिटेन के संयुक्त सेना का प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष हमला हो रहा है, तो बहुत आश्चर्य नहीं कि भारत में एक समूह के लोगों की छाती में ईरान के पक्ष में दूध उतर रहा है।

कारण स्पष्ट है कि ईरान के सर्वकालिक सबसे शक्तिशाली सुल्तान नादिर शाह दुर्रानी की नाजायज औलादें भारत में मौजूद हैं। लोग भूल गए हैं कि तैमूर को अपना हीरो मानने वाला नादिर शाह भी जब 1738/39 में भारत में लूटमार के लिए आया था तो खैबर दर्रे से दिल्ली तक हर एक किलोमीटर पर नरमुंडों के पहाड़ खड़े करवाता हुआ दिल्ली पहुंचा।

तब दिल्ली पर मुगल "बादशाह" मुहम्मद शाह #रंगीला नामक जोकर की सत्ता थी. ये वही रंगीला था जो अफीम, शराब, और वेश्याओं के साथ नंगा दरबार लगाया करता था। शायद ही किसी दरबारी ने इसे होश में कभी भी देखा हो।

आश्चर्य नहीं है कि नादिर शाह से पांच गुनी बड़ी सेना होने के बाद भी रंगीला करनाल में आमने सामने की लड़ाई में बुरी तरह हार गया।

फरवरी 1739 में दिल्ली में घुसते ही इस नीच लुटेरे की सेना ने वो कत्लेआम मचाया था, जिसकी मिसाल नहीं। दो दिन में 30,000 से अधिक निरपराध नागरिकों को मार दिया गया। 10,000 से अधिक महिलाओं और बच्चों को (गुलाम) बनाया गया और अनगिनत महिलाओं का "बतातकार" हुआ, जिनकी औलादें आज ईरान के लिए टसुएँ बहा रहे हैं।

मोहम्मद शाह रंगीला को नंगा करके दरबार में नचवाया और उसकी बेटी छीन कर अपने बेटे को दे दी। दिल्ली का खजाना लूट लिया। विश्वप्रसिद्ध मयूर तख्ते ताऊस के साथ #कोहिनूर हीरा और दरिया ए नूर हीरा भी लूट लिया।

तत्कालीन इतिहासकार लिखते हैं कि लूट का सामन 700 हाथियों, 4000 ऊंटों और 12,000 घोड़ों और गधों पर लाद कर नादिर शाह दिल्ली से वापस लौट गया। कुल लूट उस जमाने के 70 करोड़ रुपए के आस पास आंकी गई थी।

इतना धन लूटने वाला नादिर शाह स्वयं कभी महलों के नहीं रहा। उसका पूरा जीवन ओमन से लेकर दागेस्तान और खुरासान से लेकर बुखारा और मध्य एशिया के ऑटोमन साम्राज्य से लड़ते हुए युद्ध के मैदानों में टेंट में ही बीत गया।

नादिर शाह की सनक उम्र के साथ बढ़ती जा रही थी। वो चंगेज खान को अपना हीरो मानता था। एक बार ये उज़्बेकिस्तान में चंगेज खान के वंशज को युद्ध में हराकर उसकी बेटी से अपने बेटे रजा कुली को शादी करने के लिए कहा। रजा के मना करने पर खुद ही उस कन्या से निकाह कर लिया। 😀

मध्य एशिया के एक युद्ध पर जाते समय नादिर शाह की हत्या का प्रयास हुआ तो उसे लगा कि उसके बेटे रजा का हाथ है। तो आदेश दिया कि उसकी आँखें निकल कर थाली में सजा कर नादिर शाह के सामने पेश की जाएं। हुकुम की तामील हुई।

थाल में अपने ही "बेटे की आंखे" देख कर उसे बहुत पछतावा हुआ पर बहुत देर हो चुकी थीं

आज ही के दिन 20 जून 1747 को उसके टेंट में उसके विश्वासपात्र लोगों ने सोते समय इस दुरात्मा की आत्मा को उसके तन से जुडा कर दिया।

भारतीय इतिहास के पन्नों में सबसे बड़े नर संहारी लोगों में नादिरशाह का नाम पहले पांच लोगों के सम्मिलित है.

मुचलमान जमात मानती है कि दीन का ये सेवक जन्नत में बैठा शराब पी रहा होगा। 

और हम हिंदू मानते हैं कि यह दुराचारी नर्क की आग में कड़ाही में तला जा रहा होगा।

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