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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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दुनिया की कुल सम्मिलित शक्ति की तुलना इस्लाम की शक्ति से कर लीजिए. किसी भी इस्लामी देश के पास एक सशक्त सेना नहीं है. इस्लाम के पास कोई टेक्नोलॉजी नहीं है. दुनिया के किसी भी महत्वपूर्ण भाग में इस्लाम बहुमत में नहीं है. लेकिन यह शक्तिशाली महसूस होता है.. क्यों?
क्योंकि इस्लाम के पास एक रक्षा कवच है... इसका रिलिजन का स्टैटस! इस्लाम किसी भी स्क्रुटिनी से मुक्त है. इसकी गतिविधियाँ कितनी भी हिंसक, कितनी भी अपराधिक क्यों न हों, इसके लिए आप सिर्फ व्यक्ति विशेष को दंडित कर सकते हैं. वह आपराधिक विचारधारा अभी भी वैध है जो उन व्यक्तियों को अपराध और हिंसा करने की प्रेरणा देती है. सारी शक्तियों के बावजूद बड़े से बड़ी महाशक्ति उस विचारधारा को वहन करने वाले व्यक्ति को इस आपराधिक सिंडिकेट का भाग होने के अपराध के लिए दंडित नहीं कर सकती.
इसके विपरीत यदि इस्लाम की सही पहचान स्थापित हो पाती, इसको एक आपराधिक विचारधारा के रूप में चिन्हित किया जा सकता, इसकी वैधता पर प्रश्नचिन्ह लगाया जा सकता और इसकी रिलिजियस आइडेंटिटी का रक्षा कवच हटाया जा सकता, तब क्या इस्लाम शेष विश्व की सैनिक शक्ति का सामना एक दिन के लिए भी कर सकता?
सैनिक शक्ति नैतिक शक्ति पर आश्रित होती है. सैन्य कारवाई को नैतिकता का अप्रूवल चाहिए होता है. और यह कार्य वही कर सकते हैं जिनके पास स्वयं अपनी नैतिकता का संबल होता है. दुर्भाग्य से हमने नैतिकता को एक ऑप्शनल डिस्पोजेबल विषय समझ कर उन लोगों के हाथ में छोड़ रखा है जो इस आपराधिक सिंडिकेट के साथ सहभागी बने हुए हैं.
नैतिकता का सम्बल साथ रखें. आपके पास बुद्धिमता है, उसके प्रयोग से इस्लाम का सच समझें...और साहस है तो इस्लाम का सच बोलें. सत्य इस्लाम का रक्षा कवच छीन लेगा और फिर शक्ति प्रभावी होगी.
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