सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

सिकन्दर लोधी पठान ने रीवा के बघेल राजा से बेटी की माग की थी

सिकन्दर लोधी पठान ने रीवा के बघेल राजा से बेटी की माग की थी
रीवा के राजा दिल्ली सुल्तान के तुलना में बहुत छोटे से राजा थे 
रीवा के राजा ने मना किया तो सिकन्दर लोधी पठान 60 हजार घुड़सवारों के साथ रीवा पर अटैक कर दिया था
महीनों किले का घेरा चलता रहा हजारों राजपूतो सहित अन्य हिंदुओं की भी जान गई 
क्योंकि मुगल और पठान सैनिक गांवों में हिंदू औरतों की भी इज्जत लूटते थे उन्हें काफ़िर को लूटने उनकी औरतों को गुलाम बनाने की पूरी छूट होती थी
वास्तब में मुस्लिम ऐसे ही हिन्दुओ पर बेटी देने का दवाब बनाते थे फिर अगर किसी ने दासी पुत्री भी दे दी तो उनके इतिहासकार ये लिखते थे कि राजपूत राजा ने उन्हें अपनी पुत्री देने के लिए प्राथना किया और मैंने हरम में ले लिया
खैर इस समय ग्वालियर के राजा मान सिंह बहुत ताकतवर थे वो राजकुमारी की रक्षा के लिए तोमरो की बड़ी सेना लाये भीषण युद्ध हुआ तब पठान और तुर्क सेना भाग गई
अगर मान सिंह ताकतवर न होते तो या तो जौहर होता या हजारों जान बचाने को एक लड़की को दे दिया जाता फिर मुस्लिम इतिहासकार शेखी बघारते कि राजा ने अपनी पुत्री हमे देने के लिए विनती की और हमने ले ली
ऐसा ही किस्सा चारूमती का है जिससे औरंगजेब जबर्दस्ती कर रहा तो मेवाड़ की सेनाएं जाकर उन्हें बचाई मेवाड़ के राजा राज सिंह अगर उसे समय ताकतवर ना होते और औरंगजेब से लड़ने की हिम्मत ना करते तो या तो चारुमति का डोला औरंगजेब पर जाता 

 या तो हजारों राजपूतानियों का जौहर होता

और औरंगजेब अपने इतिहासकारों से यह लिखवा देता की चारुमति के पिता ने अपनी पुत्री देने की मुझे प्रार्थना की और मैंने दया करके ले लिया
ऐसे ही किस्सा अकबर ने किया था सबसे पहले उसने अपने सगे जीजा स्फूरुद्दीन से आमेर के राजा भारमल के बेटे जगन्नाथ और उनके भाई के बेटे राज सिंह और जगमाल के बेटे को कैद करवाया फिर अपने जीजा से उन्हें जान से मरवाने की धमकी दिलवाया
फिर अपना एक गुलाम भेजकर कहलवाया की 
अगर भार मल अपनी बेटी का विवाह मुझे कर दें तो दोनों तीनों राजकुमारों को छोड़ दिया जाए 

और जब इन तीनों राजकुमारों को बचाने के लिए राजा भारमल ने एक अपनी दासी पुत्री दे दी तो अकबर ने अकबरनामा में यह लिखवा दिया कि 
राजा भार मल आए उन्होंने मुझे अपनी बेटी देने का निवेदन किया और मैंने उसको अपने हरम में रख लिया 
प्रमाण ग्वालियर के तोमर पेज 154 हरिहरनाथ

टिप्पणियाँ