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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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आज शीतला सप्तमी है, आज ठंडे और बासी भोजन को सुबह कलेवा के रूप में खाने की परंपरा है। आहार विज्ञान के रूप में इसे देखा जाय तो आज के बाद बासी खाना बंद कर देना चाहिए। सर्दियों में बासी भोजन सुबह तक खाने योग्य होता है, बचपन में हम लोग रात में बना निमोना भात, सगपहिता भात सुबह कलेवा में खाकर स्कूल जाते थे लेकिन सत्तमी के बाद यह बंद हो जाता था।
शीतला माता नीम के पेड़ में वास करती हैं, नीम के नव पल्लव की लौछार ज्वर में फिराई जाती थी, माता से कृपा और आशीष बनाए रखने की प्रार्थना माएं करती थीं। शीतला माता बीमारियों को दूर करने वाली हैं,
वन्देऽहंशीतलांदेवीं रासभस्थांदिगम्बराम्।।
मार्जनीकलशोपेतां सूर्पालंकृतमस्तकाम्।।
अर्थात माता मार्जन यानी स्वच्छता की आग्रही हैं, साफ सफाई का निर्देश देती हैं जिससे रोग दोख दूर हो जाते हैं। स्कंद पुराण में शीतला माता की आराधना की गई है। स्कंद पुराण शिव नंदन कार्तिकेय को समर्पित है। सप्त मातृका की एक देवी कौमारी हैं जिनकी शक्तियों से युक्त कार्तिकेय ब्रह्मांड की रक्षा करते हैं।
सप्त मातृका की एक मुहर सिंधु घाटी सभ्यता से प्राप्त हुई है जिसे मैंने चित्र में लगाया है। इसमें बाईं तरफ स्वास्तिक जरूर देखिएगा, मेरा अनुमान है कि यह राम की शक्ति पूजा से संबंधित है। इसमें वह शक्ति की आराधना कर रहे हैं और सप्त शक्तियां साक्षी हैं।
आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के चेब्रोलू गाँव में पाया गया है। यह शिलालेख संस्कृत में लिखा गया है जिसकी लिपि ब्राह्मी है, इसे सातवाहन वंश के राजा विजय द्वारा 207 ईसवी में जारी किया गया था। इसमें सप्त माताओं के वर्णन हैं। मेरे नव बौद्ध मित्र जो संस्कृत और ब्राह्मी को लेकर वैचारिक विष के शिकार हैं वह स्वयं को परिमार्जित कर लें, अभिलेख को टिप्पणी में उद्धृत कर दिया है।
भारत में देवियां ऊर्जा और शक्ति हैं जिनसे पिंड गति को प्राप्त करता है, सामर्थ्य प्राप्त करता है। हमारे यहां देवी मां संतान को गोद में खिलाते हुए परिवार की सदस्य के रूप में हैं। सप्त मातृकाओं में केवल चामुंडा को छोड़ सभी की गोद में शिशु है।
एक लोकगीत है जिसे पचरा कहते हैं मेरी माई गाती है,
निमिया के डाढ़ मईया नावेली झुलनवा
हो कि झुलई लागी ना
इस गीत में देवी का मालिनी से संवाद होता है, अद्भुत संवाद है। मालिनी बिना भय और आश्चर्य के मां से बातचीत करती है उनसे अपने बालक और परिवार की समृद्धि के लिए आशीष देने को कहती है।
माता से सभी जुड़ते हैं, जुड़ाते हैं।
जगत जननी जगतारिणी मां शीतला की जय हो, माई अपराध छमा करे, रोग दोख दूर करे, अंचरा के छांव में लिए रहे।
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