सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

"महू की घटना हिंदू समाज के लिए चेतावनी अब तैयार हो जाओ!"


 सनातन पर बढ़ते हमले: अब सहन नहीं, प्रतिकार होगा

भारत की भूमि पर हजारों वर्षों से सनातन धर्म पुष्पित और पल्लवित होता आया है। यह वही धर्म है जिसने हर आक्रमणकारी का प्रतिकार किया, जिसने अपने बलिदान से राष्ट्र को बचाया और जिसने सहिष्णुता को अपनी पहचान बनाया। लेकिन अब यह स्पष्ट हो चुका है कि इस्लामी कट्टरपंथी हमारी सहिष्णुता को हमारी कमजोरी समझ बैठे हैं। देश में जिस तरह से हिंदू समाज को निशाना बनाया जा रहा है, धार्मिक आयोजनों पर हमले हो रहे हैं, पत्थरबाजी और दंगे हो रहे हैं, यह कोई संयोग नहीं, बल्कि एक योजनाबद्ध जिहादी षड्यंत्र है। महू, मध्यप्रदेश में जिस तरह से मस्जिदों से पेट्रोल बम और पत्थर फेंके गए, यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि इस मानसिकता का प्रमाण है जो हिंदू समाज को आतंकित करना चाहती है।

 आज वही स्थिति फिर से उत्पन्न हो रही है, जहां हिंदू समाज को उसके ही धार्मिक आयोजनों, त्योहारों और सामाजिक उत्सवों में आतंकित करने का प्रयास किया जा रहा है। महू, मध्यप्रदेश में चैंपियंस ट्रॉफी की जीत का उत्सव मना रहे हिंदुओं पर मस्जिदों से पेट्रोल बम और पत्थर फेंकने की घटना एक बार फिर से यह सिद्ध करती है कि इस्लामी कट्टरता अब खुलकर सामने आ रही है। यह कोई पहली घटना नहीं, बल्कि योजनाबद्ध रणनीति का हिस्सा है, जो हर बार तब देखने को मिलती है जब हिंदू समाज अपनी धार्मिक आस्थाओं के साथ खड़ा होता है। रामनवमी, गणेश चतुर्थी, दुर्गा विसर्जन, शोभायात्राओं और हिंदू युवकों की हत्याओं की घटनाएँ बार-बार दोहराई जा रही हैं। यह केवल पत्थरबाजी नहीं, बल्कि हिंदू अस्मिता पर हमला है, सनातन धर्म को कमजोर करने की गहरी साजिश है, जिसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता

भारत में वक्फ बोर्ड, पीएफआई, तबलीगी जमात और कई अन्य मुस्लिम संगठनों के माध्यम से इस्लामी कट्टरता को पोषित किया जा रहा है। सरकारी संरक्षण में वक्फ बोर्ड की आड़ में हजारों एकड़ जमीन कब्जाई जा रही है, जहाँ अवैध मस्जिदें और मदरसे स्थापित कर कट्टरता का जहर घोला जा रहा है। हज सब्सिडी, मदरसों को सरकारी अनुदान और विशेष सुविधाएँ देकर मुस्लिम समाज को हिंदुओं के विरोध में खड़ा किया जा रहा है। लेकिन इन संगठनों और कट्टरपंथियों को यह नहीं भूलना चाहिए कि सनातन धर्म ने हजारों वर्षों तक आक्रमणकारियों का प्रतिकार किया है और आज भी वह अपने धर्म और अस्तित्व की रक्षा करने में सक्षम है। हिंदू समाज को अब यह समझना होगा कि सहिष्णुता की सीमा समाप्त हो चुकी है। अब शिवाजी, महाराणा प्रताप और चाणक्य के सिद्धांतों पर चलने का समय है। आत्मरक्षा, संगठन और प्रतिकार ही अब एकमात्र मार्ग है। जो समाज अपनी रक्षा नहीं करता, वह समाप्त हो जाता है। महू की घटना चेतावनी है कि अगर अब भी हम एक नहीं हुए, तो सनातन धर्म के अस्तित्व को खतरा बढ़ता जाएगा।

कट्टर इस्लामी मानसिकता को समझना जरूरी

इतिहास गवाह है कि जब भी इस्लामी कट्टरता को बढ़ावा मिला है, तब-तब हिंदू समाज पर आघात हुआ है। जब भारत का विभाजन हुआ, तो जिन्ना और मुस्लिम लीग के समर्थकों ने स्पष्ट रूप से कहा था कि मुसलमानों के लिए अलग देश चाहिए – पाकिस्तान और पूर्वी पाकिस्तान (जो आज बांग्लादेश है)। हिंदू समाज और तत्कालीन सरकार ने न केवल उनकी मांग मानी, बल्कि भारत की संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान को सौंप दिया, ताकि वे वहां सम्मानपूर्वक रह सकें। लेकिन क्या हुआ? वे फिर भी यहां रुके, और रुके भी तो इस देश में रहकर इसी के खिलाफ षड्यंत्र रचने के लिए। आज वही कट्टरपंथी, जो उस समय पाकिस्तान की मांग कर रहे थे, अब भारत में रहकर इसे इस्लामी देश बनाने की साजिश रच रहे हैं।

आज स्थिति यह है कि मस्जिदों से न केवल नमाज पढ़ाई जाती है, बल्कि वहां से हिंदुओं के खिलाफ जिहाद का संदेश भी दिया जाता है। कट्टरपंथी संगठन जैसे पीएफआई, तबलीगी जमात, जमात-ए-इस्लामी, और कई अन्य इस्लामी संस्थाएं खुलेआम हिंदू विरोधी एजेंडा चला रही हैं। वक्फ बोर्ड के जरिए सरकार की जमीनों पर कब्जा किया जा रहा है, हिंदू मंदिरों की जमीनें हथियाई जा रही हैं, और सरकारें मूकदर्शक बनी हुई हैं। मदरसों में बच्चों को यह सिखाया जा रहा है कि भारत एक इस्लामी देश बनेगा और काफिरों (हिंदुओं) को मिटाना ही इस्लाम का मकसद है।

भारत एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसका फायदा उठाकर इसे इस्लामी राष्ट्र बनाने की साजिश रची जाए। अगर इस देश में रहना है तो भारत के संविधान का सम्मान करना होगा, इस देश की संस्कृति को स्वीकार करना होगा, और इस देश के हिंदू समाज के खिलाफ षड्यंत्र बंद करना होगा।

अगर किसी को भारत के संविधान से दिक्कत है, अगर किसी को हिंदू समाज से दिक्कत है, अगर किसी को भारत के त्योहारों, मंदिरों और धार्मिक परंपराओं से समस्या है, तो वह यहां रहने का अधिकारी नहीं है। ऐसे लोगों के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश बने हैं, वे वहीं जाएं। भारत में रहकर, भारत का ही खाकर, और भारत के ही खिलाफ षड्यंत्र करना अब और सहन नहीं किया जाएगा।

महू की घटना और इससे पहले कन्हैया लाल की हत्या, रामनवमी शोभायात्रा पर हमले, गणेश विसर्जन पर रोड़े फेंकना, हिंदू लड़कियों को लव जिहाद में फंसाना, यह सब यह साबित करता है कि इस्लामी कट्टरता को अब पूरी तरह कुचलने का समय आ चुका है। अब हिंदू समाज को न केवल संगठित होना होगा, बल्कि आत्मरक्षा के लिए तैयार भी रहना होगा।

हर हिंदू परिवार को अपने बच्चों को शस्त्रविद्या सिखानी होगी। हर युवा को कराटे, जूडो, कुश्ती और परंपरागत अस्त्र-शस्त्र का ज्ञान लेना होगा। जैसे शिवाजी महाराज ने अपने गुरिल्ला युद्ध से मुगलों को धूल चटाई थी, वैसे ही अब हर हिंदू को सशक्त बनना होगा। अगर कोई हिंदू युवकों पर हमला करेगा, तो उसका प्रतिउत्तर दस गुना मिलेगा। अब केवल मार खाकर सहने का समय नहीं, अब शत्रु को उसकी भाषा में जवाब देने का समय है।

भारत सरकार को अब स्पष्ट करना होगा कि

 वक्फ बोर्ड को तुरंत समाप्त किया जाए और उसकी संपत्तियों की सरकारी जाँच हो।

हज सब्सिडी और मदरसों को मिलने वाले सरकारी फंड को बंद किया जाए।

इस्लामी कट्टरता फैलाने वाले संगठनों – पीएफआई, जमात-ए-इस्लामी, तबलीगी जमात पर प्रतिबंध लगाया जाए।

जिन मस्जिदों से हिंसा भड़काई जाती है, उन्हें तुरंत ध्वस्त किया जाए।

हिंदू समाज पर हमला करने वालों को या तो फांसी दी जाए या उन्हें पाकिस्तान भेजा जाए

यह स्पष्ट हो चुका है कि हिंदू समाज अब जाग गया है। सनातन धर्म कोई कायर धर्म नहीं, यह वही धर्म है जिसने भगवान परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण, शिवाजी, महाराणा प्रताप और गुरु गोविंद सिंह जैसे योद्धा दिए हैं। अब हर हिंदू बच्चा शिवाजी बनेगा, हर युवा महाराणा प्रताप बनेगा, और अगर किसी ने हिंदू समाज पर हाथ उठाया, तो उसका हाथ काट दिया जाएगा। अब सनातन धर्म की रक्षा केवल शब्दों से नहीं, बल्कि शक्ति से होगी।

भारत में कब हुआ इस्लाम का प्रवेश

सांस्कृतिक दृष्टि से भारत एक प्राचीन देश है, जहां सभ्यता सबसे पहले आई. यहां हिंदू धर्म के लोग निवास करते थे. इतिहास पर नजर डालें तो इस्लाम का प्रवेश भारत में 11वीं -12वीं शताब्दी के बीच हुआ. इससे पहले कुछ मुस्लिम आक्रांता भारत आए, लेकिन वे सिर्फ इस देश पर हमला करने आए थे, इसलिए उनका कोई प्रभाव भारत पर नहीं दिखा. लेकिन मुहम्मद गोरी के गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक ने दिल्ली सल्तनत की स्थापना की. गुलाम वंश की स्थापना के बाद मुस्लिम धर्म और उनकी संस्कृति का प्रसार देश में बढ़ा. कुतुब मीनार का निर्माण भी इसी कालखंड में शुरू हुआ था. इस दौरान फारस से कई मुसलमान भारत आए और यहां बस गए. कहने का आशय यह है कि इसी दौर में इस्लाम का भारत में उदय हुआ और उसका प्रसार होने लगा.

 भारत में इस्लाम का प्रवेश उसी दौर में हुआ, जब इस्लाम का प्रसार शुरू हो गया था. 11वीं-12वीं शताब्दी में इस्लाम भारत आया. इससे पहले जो मुस्लिम शासक भारत आए, जिसमें महमूद गजनवी और मुहम्मद गोरी जैसे लोग भी थे, लेकिन इन लोगों का उद्देश्य यहां से धन लूटना ज्यादा था ना कि यहां शासन करना. लेकिन कुतुबुद्दीन ऐबक जब यहां का शासन बना और दिल्ली सल्तनत की नींव रखी गई, तो इस्लाम का प्रभाव देश में दिखने लगा. लेकिन यहां गौर करने वाली बात यह है कि इतिहास में जो भी मुस्लिम शासक हुए उन्होंने खुद को मुसलमानों का शासक माना, उन्होंने भारत की हिंदू संस्कृति से कुछ नहीं लिया. उन्होंने अपनी चीजों का ही प्रसार किया, इसका परिणाम यह हुआ कि यहां की जनता खुद को असुरक्षित महसूस करने लगी. उन्हें यह लगने लगा कि उनका धर्म और संस्कृति खतरे में है. परिणाम यह हुआ कि हिंदुओं में असंतोष उत्पन्न हो गया और वे खुद को बचाने की कोशिश करने लगे, जिसका परिणाम भक्ति मूवमेंट के रूप में सामने आया जब हिंदू धर्म का पुर्नरुद्धार हुआ. अकबर और शाहजहां जैसे शासकों को छोड़ दें तो अधिकतर ने खुद को इस्लाम तक सीमित करके रखा.

"जो सनातन से टकराएगा, वह मिट्टी में मिल जाएगा!"

ज हमें संकल्प लेना होगा कि हिंदू समाज अब न केवल संगठित होगा, बल्कि हर उस कट्टर मानसिकता का प्रतिकार करेगा जो सनातन के विरुद्ध खड़ी है। धर्म की रक्षा के लिए अब सजग रहना ही एकमात्र उपाय है।


लेखक 

महेन्द्र सिंह भदौरिया (राष्ट्रीय विचारक)

विश्व हिंदू परिषद उत्तर गुजरात प्रांत

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