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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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जिहादी नेटवर्क कैसे आपकी ही जाति-धर्म के राजनेता और सरकारी कर्मचारी को लालच देकर अपना जाल फैलाता है ? इसका साक्षात उदाहरण आप दिल्ली में देख सकते है जहां उन्होंने इतने हॉटस्पॉट बना लिए है कि आपकी 20 विधानसभाओ को प्रभावित कर सकते है ।
कभी सोचे है कि इन अवैध मोम्बीज को बांग्लादेश से इधर लाना, राज्य राज्य घुमाते हुए दिल्ली में घुसाना, उनके रहने का प्रबंध करना, उनके आधार कार्ड / राशन कार्ड / आयुष्मान कार्ड बनवाना, उन्हें रोजगार दिलवाना और उन्हें वोटर की तरह खड़ा करना कितना दुरूह कार्य होता होगा जिसको वो अपने नेटवर्क के माध्यम से आसानी से अंजाम देते है ।
इस सब कामों में आपकी जाति और धर्म के लोगों का भी बराबर इस्तेमाल किया जाता है जो 500-1000 रुपए की रिश्वत में बिक जाते है । उन्हें आज पत्ती के लालच में ये भी नहीं पता कि वो अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए कब्रें खोद रहे है । कागज बनाने तक सरकारी आदमी का इस्तेमाल होता है और रोजगार में आम हिंदू का । जिस स्त्री के दरवाजे पर हर वक्त अमेजन, फ्लिपकार्ट, ब्लिंकिट, और जोमैटो वाला खड़ा रहता है उसे भी 200 रुपए सस्ती बाई चाहिए । और वो सस्ती बाई सिर्फ अवैध बंग्लादेशी मोम्बीज की घरवाली ही हो सकती है कोई हिंदू नहीं ।
आज दिल्ली नोएडा की सारी सोसायटी इन्हीं बाईयो से भरी हुई जो आपको थूक मूत वाला खाना खिला रही है । थूक मूत वाली साजिश अब बहुत पीछे रह गई है आजकल आपके और आपके बच्चों के खाने में नपुंसकता की दवाई भी जुड़ चुकी है ।
आपके सारे सरकारी स्कूल और अस्पताल इन्होंने ही भर रक्खे है क्योंकि आप तो करदाता है और आपका तो आयुष्मान कार्ड तक कोई दक्खनी नेता बनवाकर नहीं देता ।
ये हाल केवल दिल्ली का नहीं लगभग हर शहर का हो चुका है और आपको हवा तक नहीं है क्योंकि आपके पास समय नहीं है जानने का । आपके नेताओं को इसको जानने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि ये उनके भी काम भी आते है । विश्वास न हो तो अपने किसी कट्टर हिंदू हृदय सम्राट विधायक के खास ठेकदारों की सूची देख लेना आपके होश उड़ जाएंगे ।
इस विषय को उठाते हुए Sudhir Chaudhary ने जो सवाल पूछा है वो बहुत कड़वा है कि जो पार्टियां चुनाव के वक्त इस मुद्दे को उठाती है पूरे 5 साल कहां रहती है । नेता लोग तो व्यस्त है पर #सेल्फी_विद_भाईसाहब वाले कट्टर कार्यकर्ता क्यों आवाज नहीं उठाते, आंदोलन नहीं करते ।
✍️ निखिलेश
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