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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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मां बाप को सेक्स करते देखने वाले विवाद को जड़ दो पीढ़ी पुरानी है।
इसके बीज दो पीढ़ी पहले बोए जा चुके थे जिसके मूल में आपके एक सीने स्टार "राजकपूर" भी थे।
आज तो आप उस बीज को लहलहाती फसल के रूप में देख पा रहे हो।
हो सकता है की अपने पूजनीय माता पिता को संभोग करते देखने की बात आपके लिए सोचना भी दूभर हो लेकिन इस सोच को चोरी चोरी चुपके इतना खाद पानी दिया जा चुका है कि यह सार्वजनिक मंच से on air कही जा चुकी है।
इस परिप्रेक्ष्य में हो सकता हे आप आधुनिक नहीं हो,आप गंवार हो, प्रगतिशील समाज के फैलाव से अनभिज्ञ हो।
या फिर आप नीरे मूर्ख हो।
तभी तो आपकी सोच इतनी दकियानूसी और संकुचित है कि आज जो चीज तथाकथित आधुनिकों के लिए एक सामान्य हंसी ठिठोली की घटना मात्र रह गई हो वह आज भी आपको असहज कर गई है।
आप विषय तो समझ ही गए होंगे न ......?
बियर बाइसेप्स तो आज का लड़का है जिसे अपने माँ बाप को सेक्स करते देखना है।
लेकिन
वामपन्थ तो इस देश के भांड बहुत पहले ला चुके थे, बस तब मेन स्ट्रीम नही हुआ था।
मैं बात कर रहा हूँ राज कपूर की जिसे अपनी माँ को नहाते देखने मे मजा आता था।
बातें भले ही वही वामपंथियों वाली कि न्यूडिटी, प्योरिटी होती है ब्ला ब्ला।
आड़ हिन्दुओ के स्क्रिप्चर से लेकर मूर्तियों की जिनका इस पश्चिमी नंगेपन से कोई लेना देना नही था।
फिर उस वामपंथ के वायरस से जकड़े ने बनाई
"सत्यम शिवम सुंदरम",
"मेरा नाम जोकर",
"राम तेरी गंगा मैली"
जैसी फिल्में जिससे न्यूडिटी मन्दिर से लेकर स्तनपान के नाम पर फैलाई गई।
आज बहुत सी "कुंवारी" भंडिया भी फुल मेकअप कर स्तनपान कराते वीडियो डालती हैं।
नंगई को
"नजर तेरी खोटी"
"देवी भी नग्न है"
"कामसूत्र" इस देश मे लिखा था के नाम पर डिफेंड करती हैं।
और सिर्फ दो जनरेशन लगी राज कपूर से शुरू होकर जब ये मेन स्ट्रीम न था से आज के हाल होने में।
उल्टा किसी "साला मैं तो साहब बन गया" गाने में साला कहने पर तब बवाल मच गया था और आज गालियों का क्या स्तर है आपको दिख ही रहा है।
तो सोच लो कि दो जनरेशन पहले शुरू हुए से आज इतनी गंदगी आ चुकी है तो, अगले दो जनरेशन बाद का क्या हाल होगा।
आपके समाज मे पहले कुंवारी लड़की पर फोकस कराया गया, फिर जवान भाभी पर और अब उन औरतों पर जो माँ की उम्र की हैं लेकिन सेक्सी बनकर घूम रही उन्हें "Mommy" कहकर सामान्य किया जा रहा।
इसी के उलट सुगर डैडी भी चल रहा।
क्योंकि 21st सेंचुरी की लड़कियां क्या किसी से कम हैं तो वो भी जगह जगह मुंह मारेंगी।
गाली देंगी।
नशा करेंगी।
क्योंकि ऐसा सिर्फ लड़का कर सकता है क्या?
यही हुआ जब पहले बॉडीबिल्डिंग लड़को को पकड़ाई गयी, नॉर्मल बात लगी, लड़को को जॉकी के कच्छे पकड़ाए गए जिनका जॉकी लिखा इलास्टिक जीन्स से बाहर दिखता था।
आज लड़की जब पुट्ठे टाइट कर रही
(उनकी कथित फिटनेस) या अपनी अंडरवियर की इलास्टिक को जीन्स से बाहर दिखा घूम रही तो यही डिफेंड चल रहा कि लड़को के करने में तुम्हे समस्या नही हुई थी।
इसी तरह लड़का ये बड़ाई मार सकता है कि 6-6 पटा रखी जिसका मतलब कि 6-6 से मजे लेता हूँ।
तो हम लड़कियों ने कर दिया तो हम "RNDईई" बन गयी क्या?
ये सोच है तुम पितृसत्ता वालों की है।
बाकी उन जैसियो का सातवां/आठवां बनने के सपने देखने वाले हैं ही जो "I सपोर्ट you" कह इस फिराक में रहते हैं कि ऐसा बोलने पर मुझे भी मिलेगी।
हालत तो ये तक है कि अब लौंडो को खुद हॉट गर्लफ्रैंड या हॉट बीवी चाहिए ताकि वो दूसरे को जला सकें कि ऐसे माल के साथ सोता हूँ।
और इसे वो खुद शो ऑफ करते हैं अपनी पार्टनर की नुमाइश कराकर जैसा क मेज कुर्सी की तरह प्रोडक्ट मात्र होती है।
इस तरह ये बर्बादी हमने भी खुद लिखी है।
चित्र के लिए क्षमा चाहूंगा।
लेकिन विषय की गम्भीरता को समझाने के लिए चित्र और उसका केप्शन मुझे उचित लगा।
तनिक विचार कीजिएगा।
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