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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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भारत में आजकल कुछ कॉमेडियन या यूट्यूबर सुर्खियों में है- अनर्गल बयानबाजी के लिए। एक क्लिप भी देखा जिस में एक कन्या और दो तीन लड़के गाली गलोच को कॉमेडी के रूप में प्रस्तुत कर रहे थे। मालूम हुआ सब पे fir हुई है- एक दो मुख्यमंत्री भी इस में दिलचस्पी ले रहे है।
सबसे पहले तो-
भारत में स्टैंड अप कॉमेडी के नाम पे भौंडा नंगा नाच चल रहा है- अनगिनत लोग इस में अपना करियर ढूँढ रहे है। और इस गाली गलोच वाले में और भी महारथी है जो अब तक सेफ है। कामरा, वीर दास जैसों ने भी खूब गंद फैलाई हुई है। शायद इस fir से एक नज़ीर बनें।
दूसरी बात- कॉमेडी के नाम पर गालियाँ देना, अनर्गल बातें करना और to top it all- इस सब पर मिलियन व्यूज़ पा कर प्रसिद्धि पाना, रेवन्यू पाना ही इस कॉकटेल का मिक्सचर है। गाली नहीं देंगे तो व्यूज़ नहीं मिलेंगे- विवादित बातें नहीं बोलेंगे तो कोई नहीं देखेगा। ये अब एक टैक्टिक बन चुका है।
तीसरी बात- व्यस्क कंटेंट भी खुल कर ऑनलाइन बांटा जा रहा है। पिछले साल फ़ेसबुक मित्रों से ही उल्लू आदि ऐप के बारे में मालूम हुआ- बड़ा हैरान कर देने वाला मंजर था। इस क्षेत्र में तो हमने अमरीका को भी पीछे छोड़ दिया है- इतना कुछ सहजता से उपलब्ध है।
चौथी बात- सोशल मीडिया पर रील वीडियो भी खूब उपलब्ध है, शहरी वर्ग तो छोड़िये, गाँव देहात में भी ये बीमारी फ़ैल चुकी है। लोग समझ चुके है अकाउंट मॉनेटाइज होने का अर्थ है लाटरी लगना और लाटरी का अमाउंट केवल व्यूज़ से डेटरमाईन होगा। तो व्यूज़ लाने के लिए नाच से लेके तमाम हथकंडे अपनाये जा रहे है। जो देखो कमबख़्त नाचे जा रहा है। अफ़सोस तब होता है जब बालिकाओं और तरुणियों को भी इस दलदल में धकेला जा रहा है- बाप पति सब कैमरामैन बने घूम रहे है।
इन सब मुद्दों का घूम फिरा कर एक ही नतीजा है- यूट्यूब फेसबुक इंस्टाग्राम आदि से होने वाली आय। तन उघाड़ कर, गाली बक कर, नाच कर मटक कर -कैसे भी बस व्यूज़ बढ़ने चाहिए।युवा तो युवा,अधेड़ और बुजुर्ग भी इन सब में अपना जीवन करियर तलाश रहे है। ये महामारी और आगे फैलेगी- ये तो पक्का है।
इस हालिया कांड से पहले ये तक ना मालूम था कि रणबीर अलाहबादिया है कौन- यकीन मानिए एक भी वीडियो नहीं देखा था। ऐसे युवाओं को ऐसी हरकतें वो भी कॉमेडी के नाम पर करते देख अफ़सोस के अतिरिक्त और कुछ नहीं कर सकते। अपने बच्चों को इस मकड़जाल से बचाना ही शायद पेरेंट्स का अब ध्येय होगा- होना चाहिए।
ये बीमारी लाइलाज हो चुकी है- अब काबू में ना आएगी।
व्यूज़ से रेवन्यू बनाना सबसे आसान तरीका है- ये बात इन इन्फ़्लुएंसर्स को समझ आ चुकी है।
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