सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

पिछले दो महीने से देख रहा हूं। मॉडर्न हिंदू बुद्धूजीवी का निशाना केंद्रित है

#अपने_अपने_युद्ध :


▪️शंकराचार्य और मठों की व्यवस्था को सतत अपशब्द.

▪️ हिंदू संस्कृति और परंपराएं निशाने पर. पूछा जा रहा है संगम में नहाने से पाप धुलेंगे?

▪️ हिंदू समाज में परिवार व्यवस्था पर सतत आघात

▪️ जातिगत वैमनस्य के टच प्वाइंट को कुरेदना

क्या आप ने इस गिरोह के किसी #बुद्धुजीवी सदस्य को पिछले एक बरस मे एक बार भी इन पर लिखते देखा : 👇

▪️ ततुआ मजहबी उन्माद के विरुद्ध? 

▪️भंगलादेश के हिंदुओं के उत्पीड़न पर या साइलेंट जेनोसाइड रोकने के लिए सरकार पर दबाव बनाते?

▪️ चिरई लोगों द्वारा धर्मांतरण के विरुद्ध?

▪️ ह.लाल, ज.खात अर्थव्यवस्था के विरुद्ध?

▪️वामुल्लों के एंटी हिंदू प्रोपेगेंडा नैरेटिव के विरुद्ध?

▪️ मुफ्तखोरी के बढ़ते प्रभाव और प्रकोप पर?

▪️ शिक्षा व्यवस्था/पाठ्यक्रम में परिवर्तन की मांग?

▪️हिंदू इकोनॉमी को मजबूत करने का कोई प्रयास?

नही ना? दिखेगा भी नही... 😀

यही है इनका शत्रुबोध? 

"अपनों और अपनी संस्कृति" पर हमला कर के हिंदुत्व को बचाएंगे? ऐसे योद्धाओं के बल पर आप विधर्मियों से लड़ोगे?

ये पूरा खलिहर गैंग "कीचड़/गटर का चैंपियन" है। 

अगर आप इन्हें समझाने या लड़ने के लिए "गटर" में उतरोगे तो आप बदबू ही सहन नही कर पाओगे.. 

लड़ना या उन्हीं के गटर समान लोट कर नाचना तो दूर की बात है... 

चुप रहोगे तो भी दुखी ही होना है...

साभार:- आदरणीय बाजीराव बल्लाळ जी

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