- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
महाराष्ट्र, हरियाणा एवं दिल्ली के चुनाव परिणामों के पश्चात यह पूर्णतः स्पष्ट हो चुका है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में 240 सीटें आने के पीछे बहुत बड़े स्तर पर षड़यंत्र हुआ है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
महाराष्ट्र, हरियाणा एवं दिल्ली के चुनाव परिणामों के पश्चात यह पूर्णतः स्पष्ट हो चुका है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में 240 सीटें आने के पीछे बहुत बड़े स्तर पर षड़यंत्र हुआ है। चुनाव की तिथि अत्यधिक भीषण ग्रीष्मकाल में निर्धारित की गई थी, जिससे मतदान प्रतिशत न्यूनतम हो सके। यह समस्त घटनाक्रम एक गहरे तंत्र (डीप स्टेट) के निर्देशानुसार संचालित हुआ प्रतीत होता है।
अतः उस समय के निर्वाचन आयोग एवं गृह मंत्रालय के अधिकारियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए कि किनके निर्देशानुसार चुनाव तिथियों का निर्धारण इस प्रकार किया गया, जिससे अत्यधिक गर्मी के कारण मतदान प्रभावित हो सके। महाराष्ट्र को छोड़कर अन्य किसी भी राज्य में भाजपा की सीटों में इतनी गिरावट की संभावना नहीं थी। टिकट वितरण में कुछ त्रुटियाँ हुईं, संघ एवं सरकार के मध्य कुछ राज्यों में समन्वय की कमी परिलक्षित हुई, तथा अनेक राज्यों में भाजपा कार्यकर्ता निष्क्रिय दिखाई दिए। तथापि, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के उद्घाटन के पश्चात जो वातावरण निर्मित हुआ था, उसे दृष्टिगत रखते हुए भाजपा को न्यूनतम 320 सीटें प्राप्त होनी चाहिए थीं।
अतः प्रश्न यह उठता है कि ऐसी कौन-सी परिस्थितियाँ उत्पन्न हुईं, जिनके कारण अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हो सके? इन सभी विषयों की गहन जांच आवश्यक है। यह भी विचारणीय है कि मतदान प्रतिशत बढ़ाने के नाम पर अमेरिकी सरकार द्वारा 21 मिलियन डॉलर की धनराशि क्यों और किस उद्देश्य से प्रदान की गई? यह राशि किन-किन व्यक्तियों अथवा संगठनों को वितरित की गई? इन सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, किंतु वर्तमान में इस संबंध में कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो रही है, और समस्त तंत्र मौन प्रतीत होता है।
हमें सामाजिक माध्यमों (सोशल मीडिया) के माध्यम से सरकार पर दबाव बनाना चाहिए, ताकि यह 21 मिलियन डॉलर की राशि कहाँ और कैसे व्यय की गई, इसकी विस्तृत जांच हो। 2024 के चुनाव परिणामों का यदि सूक्ष्म विश्लेषण किया जाए, तो संपूर्ण परिदृश्य अत्यंत स्पष्ट हो जाएगा। मैंने प्रथम चरण के मतदान के उपरांत "जय सनातन भारत" वेबसाइट पर एक लेख लिखा था, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख किया था कि यह 400 सीटों वाला मतदान पैटर्न नहीं है।
जमीन स्तर पर जो कुछ घटित हो रहा था, वह हमें प्रत्यक्षतः ज्ञात था। उत्तर प्रदेश को लेकर मेरी चर्चा संघ के एक वरिष्ठ स्वयंसेवक से हुई थी, जिन्होंने कहा था कि यदि 50 सीटें प्राप्त हो जाएँ, तो इसे भी एक बड़ी उपलब्धि माना जाएगा। यह समस्त घटनाक्रम अत्यंत विस्तृत स्तर पर संचालित किया गया प्रतीत होता है। भगवान जगन्नाथ एवं मध्यप्रदेश की जागरूक जनता ने स्थिति को संभाल लिया, अन्यथा स्थिति और भी विकट हो सकती थी।
हम सभी को ज्ञात था कि जमीनी स्तर पर क्या परिस्थितियाँ विद्यमान थीं, और यह भी स्पष्ट था कि सरकार एवं संगठन को भी इस समस्त घटनाक्रम की वास्तविकता का आभास था। किंतु चुनाव परिणामों के उपरांत इस वामपंथी तंत्र (इकोसिस्टम) को ध्वस्त करने के लिए कोई सशक्त प्रयास नहीं किया गया। डोनाल्ड ट्रंप के वक्तव्य के उपरांत इस संपूर्ण प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
दीपक कुमार द्विवेदी
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें