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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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॥ जय श्री राम ॥
राम अखंड, राम प्रचंड,
राम राम है अनुरागी ।
राम तेजस्वी, राम ओजस्वी, राम है बैरागी।।
राम कोमल, राम सुकोमल,
राम हैं कौशल रघुराई।
दीनन के नाथ, पतित पावन,
राम हैं सत की परछाई।।
अहिल्या तारी, ताड़का मारी,
शबरी निहारी।
दुख भंजन, सुखनंदन,
रघुनाथ मैं तुमरी बलिहारी।।
कौशल्या प्यारे, दशरथ दुलारे,
राम हैं मंगलकारी।
दानव दल पर भारी,
हमरे राम, राम हैं शुभकारी।।
मेरी कलम से श्री राम को समर्पित।
साभार
श्री प्रकाश कर्मा जी
उप महाप्रबंधक/ वित्त
इरकॉन इंटरनेशन लिमिटेड बिलासपुर (म.प्र.)
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