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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
महेन्द्र सिंह भदौरिया
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"संसद या रणभूमि: राहुल गांधी की कथित गुंडागर्दी पर उठे सवाल"
संसद में असंसदीय व्यवहार
भारतीय राजनीति में संसद वह पवित्र स्थान है, जहां जनता के प्रतिनिधि देश के विकास और नीति निर्माण के लिए चर्चा करते हैं। लेकिन हाल ही में संसद में जो घटना घटी, उसने लोकतंत्र के इस मंच को शर्मसार कर दिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर आरोप है कि उन्होंने संसदीय मर्यादा को ताक पर रखकर धक्का-मुक्की और हिंसा का सहारा लिया। इस घटना में भाजपा सांसद सारंगी जी को गंभीर चोट और मुकेश राजपूत को हल्की चोटें आईं।
क्या यह सांसद की मर्यादा के अनुरूप है?
संसद में धक्का-मुक्की और हिंसा जैसे कृत्य भारतीय लोकतंत्र के आदर्शों के खिलाफ हैं। यह घटना केवल राहुल गांधी के व्यवहार पर सवाल नहीं उठाती, बल्कि यह एक गंभीर मुद्दा है कि क्या हमारे नेता मर्यादा और अनुशासन का पालन कर रहे हैं।
जनता की प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। हैशटैग #राहुल_की_गुंडागर्दी और #संसद_की_मर्यादा ट्विटर पर ट्रेंड कर रहे हैं। जनता का गुस्सा और निराशा साफ झलक रही है। लोगों ने सवाल उठाया है कि अगर सांसद स्वयं असंसदीय आचरण करेंगे, तो वे देश को क्या दिशा देंगे?
इस घटना का व्यापक असर
संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली इस घटना ने न केवल राहुल गांधी की छवि को प्रभावित किया है, बल्कि पूरे राजनीतिक तंत्र पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह समय है कि संसद में अनुशासन और शिष्टाचार बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं
"जब संसद में मर्यादा टूटे, तो लोकतंत्र का दिल रोता है।"
लेखक
महेंद्र सिंह भदौरिया
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