सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

बांग्लादेश हिंसा और हिन्दू समाज की ऐतिहासिक संघर्ष गाथा: भविष्य की रणनीति और समाधान"

"

बांग्लादेश में हो रही हिंसा के मुद्दे पर हिन्दू समाज का बड़ा वर्ग बहुत विचलित और परेशान है। लोग कह रहे हैं कि सरकार क्या कर रही है, कार्यवाही क्यों नहीं कर रही है। ऐसी बातें करते हुए लोग कह रहे हैं कि हमने सरकार को वोट दिया, लेकिन वोट किसलिए दिया?

इस विषय पर चर्चा करते हुए वही लोग यह भी कह रहे हैं कि पाकिस्तान बनवाने वाली कांग्रेस ने हिन्दू समाज को हजार वर्षों के इतिहास में असहनीय घाव दिए। तथाकथित गुलामी के इन हजार वर्षों में ऐसा कोई दिन नहीं गया जब हिन्दू समाज ने इस्लाम और ईसाईयत से संघर्ष न किया हो। जब कोई मोहम्मद कासिम खड़ा हुआ, तो बप्पा रावल खड़े हुए। कोई खिलजी खड़ा हुआ, तो राणा सांगा खड़े हुए। अकबर के सामने महाराणा प्रताप खड़े हुए और औरंगज़ेब के विरुद्ध वीर शिवाजी। अंग्रेजों के समय में भी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सुभाष चंद्र बोस, लोकमान्य तिलक और वीर सावरकर जैसे महान स्वतंत्रता सेनानी खड़े हुए।

हिन्दू समाज ने हजार वर्षों तक संघर्ष किया, लेकिन नेहरू-गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने बिना लड़े ही 9% मुसलमानों को 40% भूभाग दे दिया। जिन लोगों ने पाकिस्तान के लिए वोट दिया, उन इस्लामी रक्तबीजों को कांग्रेस ने पाल-पोसकर और सशक्त किया। विभाजन मज़हब के आधार पर हुआ, लेकिन भारत को हिन्दू राष्ट्र नहीं बनाया गया, जबकि पाकिस्तान को इस्लामी राष्ट्र घोषित किया गया।

कांग्रेस और नेहरू-गांधी की नीतियाँ
इस विभाजन का परिणाम यह हुआ कि 30 लाख हिन्दुओं का नरसंहार हुआ। पूर्वी पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश) में जहाँ 27% हिन्दू थे, वह संख्या आज घटकर मात्र 8% रह गई है। पाकिस्तान में 13% हिन्दू घटकर 2% रह गए, जबकि भारत में जिहादी आबादी 9% से बढ़कर 28% हो गई है। हिन्दू समाज, जो पहले 84% था, अब 78% पर सिमट गया है। भारत के नौ राज्यों और 150 जिलों में हिन्दू अल्पसंख्यक हो चुके हैं।

कांग्रेस ने इन परिस्थितियों को जन्म दिया, लेकिन हिन्दू समाज 60 वर्षों तक कांग्रेस को वोट देता रहा। कभी यह नहीं सोचा कि जिन रक्तबीजों को दूध पिलाया जा रहा है, वे ही भविष्य में घात करेंगे।

भाजपा और हिन्दुत्व की राजनीति
आज, जब भाजपा ने राम मंदिर और अनुच्छेद 370 जैसे असंभव कार्य किए, तो भी समाज ने उसे संपूर्ण समर्थन नहीं दिया। आरक्षण की अफवाहों ने भाजपा को हराने का प्रयास किया। भगवान जगन्नाथ की कृपा से उड़ीसा में भाजपा की लाज बची, अन्यथा 2024 में हिन्दुत्व की राजनीति समाप्त हो जाती।

इस्लामिक समस्या का समाधान
इस्लामी आक्रामकता का समाधान लोकतांत्रिक व्यवस्था में असंभव प्रतीत होता है। यदि हिन्दू समाज वैचारिक रूप से स्पष्ट नहीं हुआ, तो 20-25 वर्षों में ओवैसी जैसे लोग प्रधानमंत्री बन सकते हैं। यह कल्पना आज भले ही असंभव लगे, लेकिन इतिहास साक्षी है कि इस्लाम ने बड़ी-बड़ी सभ्यताओं को निगल लिया।

भारत ने हजार वर्षों तक इस्लामी आक्रमणों का सामना किया और इसे हर बार पराजित किया। लेकिन गांधी और नेहरू की नीतियों ने हिन्दू समाज को दुर्बल कर दिया। यदि सत्ता हमारे हाथ से गई, तो समस्या का समाधान अत्यंत कठिन हो जाएगा।

क्षात्र धर्म का पुनर्जागरण
हिन्दू समाज को हर उस नरसंहार और अत्याचार को स्मरण रखना चाहिए जो इतिहास में हुआ है। प्रतिशोध की अग्नि को प्रज्वलित रखना और आने वाली पीढ़ियों को इस सत्य से अवगत कराना चाहिए। जब तक इस्लामी रक्तबीजों का समूल नाश नहीं होता, तब तक यह समस्या जस की तस बनी रहेगी। 

आज यदि बांग्लादेश में हिन्दुओं पर अत्याचार हो रहा है, तो कल यह भारत में भी होगा। इस्लाम के जड़ पर प्रहार करना ही एकमात्र उपाय है। हिन्दू समाज को यह समझना होगा कि संघर्ष ही उसका धर्म है। भगवा त्यागने से अच्छा है कि संघर्ष में प्राण दे दिए जाएँ।

दीपक कुमार द्विवेदी

टिप्पणियाँ