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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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न तो विरोधी न ही समर्थक, 95% लोगों ने आजतक मनुस्मृति पढ़ी ही नही है.
मनुस्मृति के वास्तविक रचयिता स्वयम्भू मनु नही बल्कि प्रजापति हैं
(मनुस्मृति, शतपथ ब्राह्मण व ऐतरेय ब्राह्मण आदि के अनुसार प्रजापति को ब्रह्मा जी ने रचा)
(प्रजापति ने तपोबल द्वारा मनु की रचना और मनु ने दश महाऋषियों की रचना की - पुलत्स्य, मरीचि, अत्रि, भृगु, अङ्गिरस, पुलह, प्रचेतस, क्रतु, वशिष्ठ, नारद <मनुस्मृति/अध्याय 1/ श्लोक 30-35>) --
मनुस्मृति अध्याय 1 :
इदं शास्त्रं तु कृत्वासौ मां एव स्वयं आदितः।
विधिवद्ग्राहयां आस मरीच्यादींस्त्वहंमुनीन्।।
।।श्लोक 58।।
एतद्वोऽयं भृगुः शास्त्रं श्रावयिष्यत्यशेसतः।
एतद्धि मत्तोऽधिजगे सर्वं एषोऽखिलं मुनिः।।
।।श्लोक 59।।
ततस्तथा स तेनोक्तो महर्षिमनुना भृगुः । तानब्रवीदृषीन्सर्वान्प्रीतात्मा श्रूयतां इति ।।
।।श्लोक 60।।
मनुस्मृति अध्याय प्रथम के श्लोक 58, 59, 60 का #भावार्थ →
स्वयम्भू मनु महराज कहते हैं
सृष्टि से पूर्व इस शाष्त्र को प्रजापति ने रच कर सर्वप्रथम मुझे इसका उपदेश दिया,
फिर मैंने इसका उपदेश मारीचि आदि मुनियों को दिया,
अब आप लोगों के सम्मुख भृगु मुनि इसका वर्णन करेंगे जिन्होंने मेरे सम्मुख इसको पढ़ा. इसके बाद मनु की आज्ञा पाकर महर्षि भृगु ने सब ऋषियों को यह वृतांत सुनाया- - - -
इस प्रकार मनुस्मृति के वास्तविक रचयिता प्रजापति जी हैं..
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