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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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अंगदान देने वाले धर्मनिष्ठ हिंदू सावधान
रामेश्वर मिश्र पंकज
यदि आपका दिया हुआ अंग अभी की विचित्र सरकारों के विचित्र नियमों के कारण किसी पापी को लग गया( प्रत्यारोपित हुआ )और उसने पाप किया तो वह सब पाप आपकी प्रेत योनि में अथवा आपके अगले जन्म में आपके खाते में जाएगा।
सावधान रहिए।
इस तरह के अंगदान का हिंदू धर्म शास्त्रों में कोई भी प्रतिपादन नहीं है।
दधीचि के द्वारा अपनी हड्डियों का दान देवताओं के कार्य के लिए दिया गया था:- धर्म कार्य के लिए ।
अधर्म के नाश के लिए।
वह एक बहुत बड़ा बलिदान था ।उत्सर्ग था।
परंतु सामान्य गृहस्थ के लिए ऐसा कोई नियम नहीं है कि वह अपना अंगदान देकर जाए क्योंकि उनके यह बस में नहीं है कि उनका अंg जिस पर प्रत्यारोपित हुए ,वह धर्माचरण ही करेगा ।।
दधीचि को तो पता था कि उनकी अस्थियों से जो वज्र बनेगा वह इंद्र के कार्य के लिए देवताओं के कार्य के लिए बहुत उपयोगी है और वृत्रासुर के नाश के लिए आवश्यक है ।
क्या आपको पता है?
बिना ऐसा ज्ञान रखे दान देना पाप का कारण बनेगा।
अंगदान केवल तभी करिए जब शासन यह नियम बनाएं कि अंगदान लेने वाला या उसके सगे कुटुंबी यह लिखित शपथ पत्र देंगे कि वह सत्य धर्म अहिंसा तथा सार्वभौम मानवीय नियमों में श्रद्धा रखेंगे और किसी के भी धर्म या मजहब या रिलिजन को बदलने की कोई कोशिश नहीं करेंगे तथा किसी भी धर्म या रिलिजन या मजहब पर कोई आघात नहीं करेंगे ,उसके विरुद्ध कोई वक्तव्य नहीं देंगे ,भारत के सभी नागरिकों में बंधुता को सुदृढ़ करेंगे और सबको एक ही मानेंगे।
इस्लाम और ईसाइयत को हिंदू धर्म से श्रेष्ठ मानने या बताने जैसा कोई पाप नहीं करेंगे।
तभी अंगदान देना उचित है ।
यदि आपसे किसी अहिंदू को अंगदान हो गया और उसने हिंदू धर्म के नाश को ही अपना लक्ष्य बना लिया तो उसका आप आपके सर पर ही होगा।
रामेश्वर मिश्र पंकज
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