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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
RSS: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर: उपलब्धियां, कार्यशैली, दृष्टिकोण और भविष्य की योजनाएं
प्रस्तुतकर्ता
महेन्द्र सिंह भदौरिया
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भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई थी इस महान संगठन ने 100 वर्षों की यात्रा में भारतीय समाज को एकात्मता और राष्ट्रभक्ति के सूत्र में पिरोने का कार्य किया है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का यह शताब्दी वर्ष केवल इतिहास का स्मरण नहीं बल्कि वर्तमान की प्रेरणा और भविष्य की दिशा को तय करने का भी समय है इस लेख में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की उपलब्धियों कार्यशैली दृष्टिकोण और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला गया है
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की उपलब्धियां
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने बीते 100 वर्षों में विविध क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है
सांस्कृतिक पुनर्जागरण में इसकी भूमिका अविस्मरणीय है जहां भारतीय संस्कृति और सभ्यता के मूल्यों को जागृत किया गया वहीं समाज में परंपराओं और भारतीय गौरव का प्रचार-प्रसार हुआ है
सेवा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का योगदान प्रेरणादायक रहा है आपदा प्रबंधन शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने असंख्य सेवा प्रकल्प चलाए हैं एकल विद्यालय वनवासी कल्याण आश्रम और सेवा भारती के माध्यम से समाज के सबसे वंचित वर्गों को सशक्त बनाया गया है
राष्ट्रीय सुरक्षा और देशभक्ति को प्रोत्साहित करते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में राष्ट्रीय चेतना का विकास किया गया है
राष्ट्रीय राजनीति को अप्रत्यक्ष रूप से नैतिकता और सिद्धांत आधारित नेतृत्व की प्रेरणा देने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कार्यशैली इसे अद्वितीय बनाती है शाखा पद्धति के माध्यम से स्वयंसेवकों के व्यक्तित्व का निर्माण किया जाता है जहां शारीरिक मानसिक और नैतिक विकास पर बल दिया जाता है
स्वयंसेवकों की निःस्वार्थ स्वैच्छिकता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सबसे बड़ी शक्ति है संघ का ध्यान व्यक्ति निर्माण के माध्यम से समाज निर्माण पर केंद्रित रहता है
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ "वसुधैव कुटुम्बकम" और "सर्वे भवन्तु सुखिनः" के भारतीय आदर्शों को आत्मसात करता है इसका उद्देश्य भारत को न केवल एक सशक्त राष्ट्र के रूप में देखना है बल्कि ऐसा देश बनाना है जो विश्व का पथ प्रदर्शक बने
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आने वाले समय में निम्नलिखित प्राथमिकताओं पर कार्य करेगा
भारतीय शिक्षा प्रणाली में संस्कार और तकनीकी ज्ञान का संतुलित समावेश
हर गांव और हर नगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की उपस्थिति सुनिश्चित करना
पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का अभियान
समाज में समरसता और समानता का भाव बढ़ाते हुए जातिवाद और भेदभाव को समाप्त करना
भारत को वैश्विक नेतृत्व की भूमिका में स्थापित करना जहां भारतीय संस्कृति और आर्थिक शक्ति का समन्वय हो
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी वर्ष केवल उत्सव नहीं बल्कि एक संकल्प है यह वह समय है जब बीते 100 वर्षों की प्रेरणा लेकर अगले 100 वर्षों के लिए एक सशक्त और समरस भारत का निर्माण करने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का उद्देश्य केवल व्यक्ति निर्माण नहीं बल्कि भारत के माध्यम से विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त करना है
"राष्ट्र के हित में समर्पित हर प्रयास ही हमारी साधना है और अखंड भारत का पुनर्निर्माण ही हमारी आराधना है"
महेन्द्र सिंह भदौरिया
स्वयंसेवक


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