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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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इन साप्ताहिक हनुमान चालीसा की टोलियों का उपयोग हिंदू समाज को लक्ष्य आधारित करने के लिए कैसे किया जा सकता है, इस विषय पर इस लेख में चर्चा करेंगे। इस देश में 2014 के बाद हिंदुत्व और सनातन को लेकर एक बड़े वर्ग में जागृति आई है। इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भारतीय जनता पार्टी और हिंदू विचारकों एवं लेखकों की बहुत बड़ी भूमिका रही है।
हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री युगपुरुष नरेन्द्र मोदी जी ने इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसके कारण आज हिंदू समाज के बड़े वर्ग में हिंदुत्व और सनातन के प्रति निष्ठा जागृत हुई है। जो समाज कुछ महीनों में हुई घटनाओं को भूल जाता था, आज उस समाज के एक वर्ग के भीतर यह चेतना जागृत हुई है कि वह हजार वर्षों के इतिहास की बात कर रहा है। यह वर्ग पहले भी था, लेकिन इसकी संख्या कम थी, और इसे बोलने का अवसर नहीं मिलता था।
सोशल मीडिया ने जब इसे अवसर दिया, तो इसने हिंदू समाज के एक बड़े वर्ग में हिंदुत्व के विचार को लेकर जागरूकता फैलाई। लेकिन यह जागृति इस्लाम, ईसाईयत और वामपंथ की प्रतिक्रिया में अधिक है। यह एकता स्थाई नहीं है। जो लोग आज हिंदुत्व और सनातन की बात कर रहे हैं, वही लोग जब जाति, क्षेत्र और भाषा की बात आती है, तो अपनी ही शाखा काटने लगते हैं। यहां तक कि आपस में लड़ने-भिड़ने तक की स्थिति आ जाती है।
इस एकता को स्थाई करना और हिंदू समाज के बड़े वर्ग के भीतर व्याप्त अलगाव की भावना को समाप्त करना आवश्यक है। इसके लिए गहन चिंतन और मंथन की आवश्यकता है। हिंदू समाज को धार्मिक, आध्यात्मिक, राजनीतिक, शास्त्र और शस्त्र की शिक्षा कैसे दिलाई जाए, इस पर विचार करने के बाद यह समझ में आया कि साप्ताहिक हनुमान चालीसा, सामूहिक सहभोज और संस्कार आधारित शिक्षा को पुनः कैसे स्थापित किया जाए, यह मुख्य बिंदु हो सकते हैं।
हर मोहल्ले में 10 लोगों का चयन करके उन्हें आत्मरक्षा प्रशिक्षण दिलाया जाए। इस पर भी ध्यान देना होगा कि हिंदू समाज को राम, कृष्ण, शिव और लोक देवताओं, कुल देवताओं और कुल देवियों से जोड़कर संगठित किया जाए। इसमें जाति-पाति के बंधन टूट जाते हैं। उदाहरणस्वरूप, हमारे रीवा क्षेत्र में यादव समाज कुल देवता बाबा साहब की पूजा कुल देवता के रूप में करता है। यही स्थिति अन्य क्षेत्रों में भी पाई जाती है।
हमारे देश को राम, कृष्ण, शिव, जगत जननी जगदंबा और कुल देवता जोड़ते हैं। जब हम राम, कृष्ण, शिव, कुल देवता और कुल देवी की बात करते हैं, तो यह हमें अपनी मूल परंपरा और संस्कृति पर गर्व का अनुभव कराता है। यही भाव एक बड़ा परिवर्तन लाने में सक्षम है।
हनुमान चालीसा टोलियों की भूमिका
साप्ताहिक हनुमान चालीसा, शिव चालीसा, विष्णु सहस्रनाम का पाठ और कुल देवता-कुल देवी के पूजन के माध्यम से हिंदू समाज को संगठित किया जा सकता है। इन आयोजनों के साथ सहभोज की परंपरा को जोड़ने से भी समाज में सामूहिकता की भावना मजबूत होगी।
एक मोहल्ले में साप्ताहिक हनुमान चालीसा की टोली बनाएं। जब इस टोली में 300 लोग हो जाएं, तो इनमें से 20 लोगों का चयन करें और उन्हें आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिलाएं। इन लोगों पर अपने मोहल्ले की सुरक्षा का दायित्व हो। इनमें से 15 लोगों को संघ, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल जैसे संगठनों से जोड़ा जाए।
इसके साथ ही 50 बच्चों को संस्कारशाला जैसे प्रकल्पों के माध्यम से धार्मिक शिक्षा दिलाने का प्रयास करें। बाकी लोग, जिनमें महिलाएं और 40 वर्ष तक के लोग शामिल हैं, उन्हें अन्य धार्मिक परियोजनाओं से जोड़ा जाए। प्रबुद्ध और शिक्षित वर्ग को कुटुंब प्रबोधन के लिए प्रेरित किया जाए।
चयनित 10 लोगों, जिन्हें सैन्य प्रशिक्षण दिया गया हो, को ऐसी किसी भी स्थिति में कानूनी और आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। इनका सहयोग टोली के आर्थिक रूप से सक्षम सदस्य करें। जिससे इन चयनित लोग के अंदर यह भाव न आये उनके साथ कोई खड़ा नहीं होगा चयनित लोग हर परिस्थिति में समाज के रूप खड़े हुए तो अपने आप हर परिस्थिति में आपके मोहल्ले परिवार की रक्षा करेंगे।
वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह जी ने कहा था कि हिंदू समाज में जातिगत भेदभाव का सबसे बड़ा कारण यह है कि छोटी जातियों को सम्मान नहीं मिलता। इन्हें वह मान-सम्मान दिया जाए, जिसके वे अधिकारी हैं। कांशीराम और मायावती ने जब सत्ता में आकर इन्हें यह अनुभव कराया कि उनकी बात सुनी जा रही है, तो वे उनके स्थाई समर्थक बन गए।
हिंदू समाज का प्रबुद्ध वर्ग यदि इन वर्गों के घर जाकर भोजन करे और इन्हें सम्मान दे, तो यह वर्ग आपके साथ आ जाएगा। इससे एक कुआं, एक श्मशान और एक साथ सहभोज की परंपरा को स्थापित किया जा सकता है।
साप्ताहिक हनुमान चालीसा, सुंदरकांड टोलियां और कुल देवी-देवता के पूजन के माध्यम से हिंदू समाज को संगठित किया जा सकता है। छोटे स्तर की ये टोलियां हिंदू समाज को आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक रूप से सशक्त बना सकती हैं।
यदि हर व्यक्ति अपने गांव, मोहल्ले और शहर में ऐसी टोलियां बनाने का प्रयास करे, तो यह हिंदू धर्म और राष्ट्र की महान सेवा होगी।
✍️दीपक कुमार द्विवेदी
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