सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

संविधान बनाम मनुस्मृति: संविधान की आड़ में सनातन पर प्रहार कब होगा राहुल गांधी का हिंदू विरोधी चेहरा बेनकाब

राहुल गांधी द्वारा संसद में संविधान और मनुस्मृति को एक साथ प्रस्तुत कर तुलना करना सोची-समझी साजिश है जिसका उद्देश्य सनातन धर्म के गौरवशाली शास्त्रों को अप


मानित करना है संविधान आधुनिक भारत का मार्गदर्शक कानूनी दस्तावेज है जबकि मनुस्मृति प्राचीन हिंदू समाज के आचार विचार और नैतिकता का आधार है इन दोनों की तुलना करके राहुल गांधी ने हिंदू समाज को विभाजित करने और विशेष धर्म को खुश करने का एक और प्रयास किया है

संविधान भारतीय लोकतंत्र का आधार है जो समानता और न्याय की गारंटी देता है यह आधुनिक समय में सभी नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों को परिभाषित करता है जबकि मनुस्मृति हिंदू समाज के प्राचीन धार्मिक और सामाजिक जीवन का प्रतिबिंब है जो उस समय की सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप थी इन दोनों की तुलना न केवल अनुचित है बल्कि यह हिंदू संस्कृति पर सीधा आघात ह

राहुल गांधी ने संसद में संविधान और मनुस्मृति को उठाकर एक अनावश्यक विवाद को जन्म दिया यह उनकी सनातन विरोधी मानसिकता को स्पष्ट करता है उन्होंने जानबूझकर सनातन धर्म के पवित्र शास्त्र को विवादित बनाने की कोशिश की है ताकि हिंदू समाज में विभाजन पैदा किया जा सके और विशेष धर्म के तुष्टिकरण का एजेंडा आगेa बढ़ाया जा सके यह उनका नया प्रोपेगेंडा है जिसमें हिंदू समाज की आस्थाओं को निशाना बनाया जा रहा है

संसद में राहुल गांधी द्वारा एक हाथ में संविधान और दूसरे हाथ में मनुस्मृति उठाना प्रतीकात्मक रूप से सनातन धर्म का अपमान करने की कोशिश है संविधान के सम्मान के नाम पर हिंदू ग्रंथों को नीचा दिखाना उनकी मानसिकता को दर्शाता है यह घटना केवल राजनीतिक लाभ के लिए सनातन परंपराओं पर प्रहार है जो हिंदू समाज को उकसाने और आस्थाओं को चोट पहुंचाने की मंशा से किया गया है


राहुल गांधी की विचारधारा और सनातन विरोध के प्रमाण को इन्हीं बातों से समझ सकते है कि उसने 

हिंदू आतंकवाद शब्द गढ़कर पूरे हिंदू समाज को कट्टरपंथी बताने की कोशिश की गई

राम मंदिर निर्माण का लगातार विरोध कर हिंदू आस्थाओं पर प्रश्न खड़े किए गए

भगवा रंग को हिंसा और नफरत का प्रतीक बताकर सनातन के पवित्र प्रतीकों का अपमान किया गया

विशेष धर्म को खुश करने के लिए बार-बार हिंदू मान्यताओं और शास्त्रों को निशाना बनाया गया

काशी और मथुरा जैसे पवित्र स्थलों पर हो रहे संघर्षों पर कांग्रेस का मौन सनातन विरोधी रुख को उजागर करता है

राहुल गांधी का यह कृत्य कोई पहली घटना नहीं है बल्कि उनकी राजनीति हमेशा से तुष्टिकरण पर आधारित रही है चुनावी मंचों पर विशेष धर्म के नेताओं के सामने झुकने से लेकर हिंदू धर्म पर हमले करना उनकी नीति का हिस्सा है वे हिंदू समाज की आस्थाओं पर सवाल उठाकर समाज को बांटने का षड्यंत्र रचते हैं ताकि विशेष वर्ग का समर्थन हासिल किया जा सके

संविधान और मनुस्मृति की तुलना करके राहुल गांधी ने न केवल सनातन धर्म का अपमान किया बल्कि हिंदू समाज की आस्थाओं को चोट पहुंचाने का प्रयास किया यह कृत्य उनकी हिंदू विरोधी मानसिकता को उजागर करता है सनातन धर्म जो सहिष्णुता और शांति का प्रतीक है उसके पवित्र शास्त्रों को विवादित बनाकर राहुल गांधी ने अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने की कोशिश की है हिंदू समाज को अब एकजुट होकर ऐसे कृत्यों का विरोध करना होगा और सनातन की गरिमा और मान का सम्मान बनाए रखना होगा

 लेखक 

महेंद्र सिंह भदौरिया (राष्ट्रीय विचारक)

प्रांत सेवा टोली सदस्य 

विश्व हिन्दू परिषद उत्तर गुजरात

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