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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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भारत अपनी संपूर्ण चेतना के साथ फिर उठ खड़ा ना हो, इसे सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने भारतवर्ष के भीतर दो प्रचंड शत्रु राज्य ( एनीमी स्टेट) खड़े किए और यह सुनिश्चित किया कि भारतीय राजनीति में केवल विदेशी मतवादों से प्रभावित दल ही आपस में प्रतिस्पर्धा करें।
उनका वह प्रभाव आज तक बना हुआ है ।
भारत की राजनीति की दो मुख्य धाराएं हैं :एक कांग्रेस है जो विकसित होते-होते अब मजहबी उग्रवाद और कन्वर्जन के द्वारा हिंदू धर्म के नाश की ईसाई धारा ,इन दोनों की संरक्षक बन गई है और वह क्रमशः हिंदू धर्म हिंदू समाज के विलोप का कारण बनेगी।
दूसरी धारा भाजपा की है जो आरक्षण के नाम पर ब्राह्मण क्षत्रियों और संपन्न वैश्य के शत्रु के रूप में एक बहुत बड़ा वर्ग खड़ा करना चाहती है और असत्य आंकड़ों पर खड़ा मण्डलीय आरक्षण उसके लिए एक आड़ है जो मूल संविधान के नितांत विरोध में है।
मूल संविधान में आरक्षण सचमुच जिनके साथ कुछ अन्याय हुआ उन जातियों के लिए रखा गया था केवल 10 वर्ष के लिए।
और अब,
आरक्षण सब तरह से संपन्न कृषि भूमियों के स्वामी कृषि पशुओं के स्वामी अलग-अलग शिल्पो के स्वामी और सब तरह से वैभव संपन्न समुदायों को अन्य पिछड़ा वर्ग कह कर दिया जा रहा है और यह हिंदू धर्म के विरोध में उनके बीच विरोध भाव पैदा करते हुए दिया जा रहा है इसलिए हिंदू समाज के संसाधनों के बहुत बड़े अंश का उपयोग करते हुए भी वह हिंदू धर्म और हिंदू समाज के सबसे प्रबल शत्रु ही बने रहेंगे और विदेशी मतवादों के शिष्य ही बने रहेंगे ।
इस प्रकार यह दूसरी धारा जिसे वर्तमान में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ,
वह भी अंतत :हिंदू धर्म के विलोप का ही कारण बनेगी ।।
न तो जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी सचमुच हिंदू धर्म के शत्रु थे और ना ही मोदी जी शत्रु हैं।
परंतु इन नीतियों का परिणाम यही होना है ।
क्योंकि सारी दलीय राजनीति इस समय अमेरिका इंग्लैंड और पश्चिमी यूरोपकी राजनीति के अनुसरण में या कहें कि उनके खेल के अनुसार ही चल रहे हैं ।।
परंतु महाकाल सर्वोपरि हैं और कब नई शक्तियां प्रकट हो जाएँ, यह केवल महाकाल ही जानते हैं।
यह सत्य बार-बार प्रकट होता है कि वास्तव में हिंदू धर्म का और हिंदू समाज के लोक प्रवाह का सच्चा प्रतिनिधित्व भारत में अभी तक तो कोई दल नहीं करता ।
आगे महाकाल जानें।
साभार
रामेश्वर मिश्र पंकज जी
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