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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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सनातन धर्म ही भारतीय राष्ट्रवाद का आधार है। जिस दिन हम इस बात को स्वीकार कर लेंगे, उस दिन से भारत का उत्थान शुरू हो जाएगा। मैंने अपने एक लेख में धार्मिक राष्ट्रवाद की अवधारणा पर विस्तार से लिखा था, और अखंड भारत की परिकल्पना वाले लेख में भी सनातन धर्म ही राष्ट्रवाद पर संक्षिप्त में लिखा था।
सनातन धर्म ही भारतीय राष्ट्रवाद का मजबूत स्तंभ है, जैसा कि महर्षि अरबिंदो ने 1911 में अपने उत्तर पाड़ा के भाषण में कहा था। भारत का अस्तित्व सनातन धर्म से है, और सनातन धर्म का उत्थान होगा तो भारत का उत्थान होगा। सनातन धर्म की अवनति होगी तो भारत की अवनति होगी, और सनातन धर्म के बिना भारत के अस्तित्व की कल्पना करना संभव नहीं है।
इसलिए, हमें सनातन धर्म राष्ट्रवाद के रूप में स्वीकार करना चाहिए और आब्रह्मिक संदर्भ में भारतीय राष्ट्रवाद को परिभाषित करना बंद करना चाहिए। सर्वभौम हिंदू आइडेंटिटी के ढोंग को भी त्यागना चाहिए। इसके बजाय, हमें त्रिगुणात्मक सृष्टि, भगवान श्री कृष्ण के कर्म सिद्धान्त, और मनुस्मृति में बताए गए धर्म के 10 लक्षणों को पालन करना चाहिए।
इसे शुद्धतावाद कहकर नकाराने की प्रवृत्ति को छोड़नी चाहिए, और हमें हिंदू और सनातन धर्म के मध्य विभेद खड़ा करना भी बंद करना चाहिए, जिससे समाज में विखंडन पैदा होता है।
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