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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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लक्ष्य विहिन और संकल्प विहीन हिंदू एकता निरर्थक है ।
एक प्रश्न बहुत लोग करते हैं कि मुस्लिमो मे 72 फिरके है तो फिर मुस्लिम एक कैसे हो जाता है उनके अंदर आपस हजारों विवाद है वो एक दूसरे मस्जिद में नहीं जाते हैं फिर वो एक कैसे हो जाते हैं हम क्यों बंट जाते हैं? इस प्रश्न का उतर स्पष्ट है कि हम एक है लेकिन हमारे अंदर व्याप्त अंहकार और हीनता बोध और सद्गुण विकृति एवं वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था ने हमें और अधिक बांट दिया है लेकिन यह उत्तर पूर्ण नहीं है जब तक हम हिन्दू एकता का अर्थ लोगों को समक्ष नहीं रखेंगे हम एक क्यों होना है? हम किन संकल्प लक्ष्यों की पूर्ति के लिए एक होना है हमारा उद्देश्य क्या है? हिंदूओं को एक क्यों करना चाहते हैं इसमें हमारे अल्पकालिक स्वार्थ नहीं छिपे हमारा उद्देश्य पुनित है हम बड़े लक्ष्यों को लेकर काम करेंगे यह सब आम हिन्दू को नही बताएंगे कहेंगे तो बंटेंगे तो कटेंगे एक रहेंगे तो नेक रहेंगे इस नारे का कोई महत्व नहीं है एक समय के बाद यह नारा भी मज़ाक बन जाएगा। इसलिए हमें समाज को स्पष्ट विजन देना पड़ेगा हम किसलिए हिंदू समाज को संगठित करना चाहते हैं ।
लोकसभा चुनाव के समय में बीजेपी की केंद्रीय नेतृत्व ने एक नारा दिया था अबकी बार 400 पार लेकिन नारा तो यह दे दिया था अबकी बार 400 पार लेकिन यह नहीं बता पाएं अबकी बार 400 पार क्यो चाहते हैं 400 पार होने के बाद हम क्या करेंगे यह बताने आम जनता को विफल रहे परिणाम क्या 400 पार तो नहीं हुआ 240 में अटक गये चुनाव में ऐसी अफवाह फैलाई गई कि जिसका काउंटर आज भी नहीं कर पा रहे हैं नारेटिव की लड़ाई हार गये है उसी तरह हिंदू एकता हम क्यों स्थापित करना चाहते हैं वह बताने विफल हो रहे हैं ।
एक विषय आता है कि हिंदू समाज एक क्यों नहीं रहा है उसके कारण क्या है मुस्लिम क्यो एक हो जाता? अन्य मत वाले क्यों एक हो जाते हैं? इस विषय को समझने के पूर्व हमे यह समझना होगा कि हिंदू हमेशा एक रहा धार्मिक सांस्कृतिक आध्यात्मिक रूप हिंदू एक रहा कुंभ का मेला दीवाली रक्षाबंधन नवदुर्गा गणेश उत्सव समेत अनेक ऐसे अवसर आते हैं जिसमें हिंदू समाज एकता स्पष्ट रूप दिखती है जिसमें जाति क्षेत्र भाषा सभी बंधन टूट जाते हैं लेकिन वह एकता सामूहिक रूप से दिखती लेकिन व्यक्तिगत स्तर नहीं दिखतीं है क्योंकि एक वह एकता अपने धार्मिक कार्यों तक सीमित कर दी गई है उसे यह बता दिया गया सात समुंदर पार नहीं करना चाहिए उसे यह बता दिया अहिंसा तुम्हारा परम धर्म है सब एक जैसे होते हैं उसके मन में यह धारणा बैठा दी गई अधर्म भी धर्म है इसके आलावा हमारे राजनीतिक नेतृत्व के गुलामी की मानसिकता इतना हावी है कि भारत के बाहर जाने के बाद कहने लगता भारत बुद्ध और गांधी का देश है हमने किसी पर आज तक आक्रमण नहीं किये है । क्योंकि उसे लगता ऐसा कहेंगे तो हमारी सॉफ्ट इमेज़ बनेगी और हम शांतिप्रिय बन जाएंगे। हमारा राजनीतिक नेतृत्व यह भूल जाता है कि जब हम शक्तिशाली होंगे तभी दुनिया हमारी बात सुनेंगी हम दीन-हीन बनेंगे एक समय के बाद हमारी कोई बात नहीं सुनेगा। भगवान राम भी धरने में बैठ जाते तो रावण उनकी बात मानता है जब भगवान राम लड़े और रावण विजय प्राप्त की रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद चारो भाई शांत नहीं बैठे अनरत युद्ध में करते रहे और अश्वमेध यज्ञ यह सब बिना आक्रमण किये संभव नहीं था उसी तरह भगवान श्री कृष्ण जी पूरे जीवन काल युद्ध में रहे यहां तक जब उनके कुल के लोग अधर्मी हो गये उनका भी उन्होंने नाश किया पांडव तो हमारे परिवार के विरुद्ध खड़े थे क्योंकि उनके परिवार के लोग अधर्म पक्ष में थे उनका नाश किया महाभारत युद्ध के बाद भी उन्होंने युद्ध जारी रखा अश्वमेध यज्ञ किया कई देशों पर आक्रमण किया महाभारत काल के बाद आधुनिक काल में लौट आते हैं पुष्यमित्र शुंग ने अपने राज्य के विस्तार के लिए युद्ध किया ईरान तक गये उसके बाद उन्होंने अश्वमेध यज्ञ किया समुद्रगुप्त को भारत का नेपोलियन कहा जाता है जितने युद्ध लड़े एक भी युद्ध भी नहीं हारे यहां तक आज के इजिप्ट तक उन्होंने आक्रमण किया विक्रमादित्य ने यही किया लेकिन हिंदू को यह पढ़ा दिया गया कि हम बुद्ध और गांधी के देश से हमने किसी पर आक्रमण नहीं किया जिसके कारण हम मूल स्वभाव को भूल गये हमारा परभाव शुरू हो गया। इसलिए हिंदू एकता सही मायने में स्थापित करनी है तो सद्गुण विकृति को पूरी तरह छोड़ना पड़ेगा और अपने स्वधर्म का पालन करना पड़ेगा तभी हिंदू एक हो पाएगा।
हिंदू एकता संदर्भ में एक बात और हमें समझनी पडेगी हम कुछ लक्ष्य और संकल्प निर्धारित नहीं करेंगे हिंदू एकता की जितनी बात करेंगे लेकिन पूरी समाज किसी एक चीज के लिए संगठित नहीं होगा उसे यह समझना पड़ेगा हमारे पूर्वजों ने क्यों कृण्वन्तो विश्वमार्यम् का मंत्र दिया था उन्हें यह बताना पड़ेगा कैसे 9% आबादी ने हमारे 60% भूभाग पर 300 वर्षों में कब्जा कर लिया आज के वर्तमान भारत में 9 राज्यों में अल्पसंख्यक हो गये है हम इन स्थितियों को बदलना हमें अखंड भारत की संकल्पना को साकार करना है हमें पूरी दुनिया को भगवा ध्वज के नीचे लाना है हमें यह बताना असभ्य दुनिया को आर्य बनाना है हमें यह बताना हि अधर्मियों का विनाश करके सनातन धर्म की पुनः स्थापना करनी है । जिस दिन इन लक्ष्यों को आम हिन्दू उनकी भाषा में बताएंगे तो हिंदू इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए मोटिवेट होगा तन मन धन से स्वधर्म का पालन करते हुए समर्पित भाव से इन संकल्प और लक्ष्यो को पूरा करने के लग जाएगा। हम हिन्दू समाज को यह नहीं बता पाए तो लक्ष्य विहिन संकल्प हिंदू एकता पूरी तरह निरर्थक सिद्ध होगी सिर्फ अल्पकालिक राजनीतिक लाभ दे सकती लेकिन उसका परिणाम बहुत भयावाह होगा इसलिए हमें हिंदू समाज को एक करने के लिए हिंदू समाज को लक्ष्य आधरित बनाना पड़ेगा नहीं बना पाये तो एकता करते रह जाएंगे बंटेंगे तो कटेंगे एक रहेंगे नेक रहेंगे तो इस तरह का नारा देते रहेंगे लक्ष्य विहिन दिशा विहिन संकल्प विहीन टूटा हुआ समाज हीनता बोध से ग्रस्त समाज उठ नहीं सकता है। हिंदू समाज को संगठित करने हैं तो उसे लक्ष्य आधरित बनाना पड़ेगा हमारे राजनीतिक समाजिक धार्मिक संगठनो और धर्मगुरुओं और विचारको को यह बताना पड़ेगा हम सनातन धर्म की स्थापना कैसे करेंगे पूरी दुनिया के लोगों आर्य कैसे बनाएंगे हम पूरी दुनिया को भगवा ध्वज के नीचे कैसे लाएंगे अखंड भारत का संकल्प कैसे साकार करेंगे इसका विजन डॉक्यूमेंट आम हिंदुओं के समक्ष रखना पड़ेगा तभी पूरा समाज लक्ष्य आधरित और संकल्प रहित और हीनता बोध से मुक्त होगा उसके अंदर कुछ कर गुजरने का जज्बा आएगा और कुछ करके दिखाएगा। हिंदू समाज के समाज के समक्ष विजन डॉक्यूमेंट प्रस्तुत नहीं कर पाए हिंदू समाज हिंदू समाज को लक्ष्य आधरित और संकल्प आधरित नहीं बना पाए तो यह हिंदू एकता पूरी तरह से निरर्थक है ।
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